25 अग॰ 2016

कन्हैया (हेम के पकैया छंद)


छन्न पकैया छन्न पकैया, लीला करय कन्हैया।

अजब गजब ले करे तमासा, मुरली देख बजैया।।


छन्न पकैया छन्न पकैया, छेड़य राधा रानी।

फोड़े मटकी ग्वालिन मन के, राधा बर हे बानी।।


छन्न पकैया छन्न पकैया, ग्वालिन हे नादानी।

बजे बाँसुरी के धुन भैया, दउड़त हे दीवानी।।


छन्न पकैया छन्न पकैया, राधा रानी हारे।

हवे मोहना मोर कन्हैया, सबला मोही डारे।।


छन्न पकैया छन्न पकैया, माखन ला चोरइया।

घर घर जाके करथे चोरी, देख दशोदा मइया।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

दाई शारद मोर (हेम के रोला)

दाई शारद मोर, ज्ञान दे दे अनमोले।

मोर लगै हे आस, मिले विद्या के बोले।

साधक बनके तोर, साधना पूरा करहूँ।

सदा पाँव आशीष, शरण मा तोरे रइहूँ।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ.ग.)

कृष्ण कन्हैया (रोला छंद)









कृष्ण कन्हैया (रोला छंद)

कहिथे माखन चोर, नाव हे कृष्ण कन्हैया।
बँसरी मधुर बजाय, भगत नाचे ता थैया। 
आस नन्द के लाल, दई हे तोर यशोदा।
रचै गजब तँय रास, देख हाँसत हे कोंदा।।

करै प्रेम के रास, संग मा राधा रानी।
गोपी नाचे रोज, रखै हावस तँय बानी।
बृंदाबन मा अजब, खेल खेले माया के।
रोज चराये गाय, संग जाके गइया के

रखै जगत मा ज्ञान, याद राखे दुनिया हा।
सबके भाग जगाय, देख कृष्ण कन्हैया हा।
साथी बन जा मोर, बिराजव मन मा आके।
जपते रइहँव नाव, सदा मन अपन लगाके।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा (छ.ग.)

मुरली वाला (हेम के दोहे)

मुरली वाला आँव तँय, मनमा बसजा मोर।

जिनगी भर तँय साथ दे, नाम जपव मँय तोर।।


मिटै मोह माया सबो, मिलै ज्ञान के छोर।

अंधकार ला दूर कर, लावव नवा अँजोर।।


मँय तोला सुमिरन करव, ये पापी ला तार।

कलयुग के परदा हटा, भवसागर कर पार।।


भाई भाई दुश्मनी, करत मार अउ काट।

परभू आके प्रेम ला, अबतो सब मा बाँट।।


परभू बिनती मोर हे, भरदे मन मा प्रेम।

तोर भजन करहूँ सदा, श्रद्धा ले हर टेम।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा

तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

23 अग॰ 2016

कमरछठ

हवे कथा ला सुनत, देख परभू के खासे।

आज कमरछठ आय, रखै हे दई उपासे।।

सुघ्घर जिनगी अपन, पूत बर हावे माँगत।

दाई ला परनाम, सदा रहे जियत जागत।।


-हेमलाल साहू 

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

21 अग॰ 2016

सन्देस

भरगे सबके गाँव, मोर हे गावे सुक्खा।
रोवत खेती खार, हमन ला राखे भूखा।।
भेजत हव सन्देस, गाँव आ बरखा रानी।
तरसत हावे जीव, गिरादे अब तो पानी।।

20 अग॰ 2016

हेम के रोला छंद

रखबे सबके मान, अपन करले गुरु ध्याने।

होय सफल जी काम, हेम तँय पाबे ज्ञाने।।

साधक बनके साध, लक्ष्य मा रखके ध्याने।

मिले नहीं गुरु ज्ञान, राख ले तँय गुरु माने।


धरती दाई तोर, सदा मँय परहूँ पइयाँ।

हावे गिधवा गाँव, जनम के मोरे भुइयाँ।।

हेमलाल हे नाव, मेहनत अपन करइया।

माटी के दिन रात, हरँव सेवा ल बजइया।।


किरपा मया दुलार, हवै परभू के जाने।

जिनगी के सुख पान, करम मा हावे माने।

करे मेहनत रोज, पूत मँय आँव किसाने।

खून पसीना सींच, महूँ बोथँव जी धाने।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ.ग.)

राखी साखी प्रेम के (हेम के उल्लाला छंद)

ये राखी साखी प्रेम के, देख देख मन हा भरै।

नित दया मया दीदी रखै, भैया दुलार ला करैै।।


मन रोवत दीदी के हवे, भैया ला सुरता करै।

दुख पीरा ला काला कहै, बइठे राखी ला धरै।। 


गे भाई रक्षा बर हवय, बार्डर हमार देश के।

मैना के आँखी भींजथे, रोवत दीदी देख के।।


ओ मैना बोलिस बात सुन, जाहू भैया पास ओ

दे आहू राखी तोर मँय, अउ संदेशा खास ओ।।


सुन दीदी अतका बात ला, राखी लावय साथ मा।

खुश होके राखी अपन, देवत ओकर हाथ मा।।


कर पूजा सुघ्घर भेजथे, देवत शुभ संदेश ला।।

पहिना राखी ला मोर तँय, हरहू जम्मो क्लेश ला।


-हेमलाल साहू

छंद साधक सत्र-01

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)


10 अग॰ 2016

गोस्वामी तुलसीदास (उल्लाला छंद)

परम भगत ओ राम के, संत महात्मा जे रहै।

नावे तुलसीदास हे, राम कथा ला नित कहै।


रतना के फटकार ले, मिलगे परभू राग हा।

मिटगे मन के पाप हा, जागे सुघ्घर भाग हा।


डूब राम के भक्ति मा, पाये अमरित ज्ञान ला।

रामचरितमानस लिखे, जग पाये पहचान ला।


कासी मा जिनगी कटै, करत राम गुनगान ला।

त्यागे अस्सी घाट मा, जप के राम परान ला।


दया धरम के बात ले, रखै जगत के मान ला।

अहंकार माया मिटै, पढ़ लौ तुलसी ज्ञान ला।


-हेमलाल साहू 

छंद साधक सत्र-01

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ.ग)



9 अग॰ 2016

टूरी बर मोर मया उमड़ गे (हेम के सार छंद)

टूरी बर मोर मया उमड़ गे, रोजे नींद चुरावय।

देखत देखत सपना ओकर, सुध बुध मोर गँवावय।।


गोरी के सुरता हा आवय, सुघ्घर मुखड़ा हावय।

गोरी नारी सुघ्घर हावय, देख मोर मन भावय।।


कारी कारी आँखी हावे, भरे मया के थारी।

गोल चेहरा ओकर हावे, हवै मया गा भारी।।


घर में रोजे गारी देथे, टूरा ल काय होगे।

बइहा भुतहा मोला कहिथे, टूरी बर मोहागे।।


झूले नजरे नजर मोर जी, मोला कछू न भावय।

प्रेम रोग मोला लगे हवे, बइगा कोन बुलावय।।


--हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ.ग.)

7 अग॰ 2016

नागपंचमी (हेम के सरसी छंद)

नागपंचमी आगय भइया, पूजा करबो साँप।

महादेव के जप ला करबो, सबो कटे गा पाप।।


लछ्मी दाई घर लावय जी, सुमिरन करलव नाग।

दूर करय सब दरिदरता ला, हमर जगावय भाग।।


साँप नहीं मनखे के बइरी, ओकर जान मितान।

शिव बोला के माला हावे, बिसनू आसन जान।।


हितवा मन के साथी जानव, बइरी के तो काल।

हवे मोह सबला परान के, रखथे एखर ख्याल।।


-हेमलाल साहू 

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा (छ.ग.)

मितान (हेम के सरसी छंद)

सुख दुख के मोर संगवारी, जेला कहे मितान।

हावय सुघ्घर जी चिन्हारी, दया मया पहिचान।।


सुघ्घर खाथन मिल बाँट हमन, लेथन परभू नाम।

संगे रहिथन संगे घुमथन, करथन सुघ्घर काम।।


कृष्ण सुदामा हवे मितानी, हिरदय रखे मितान।

धन दौलत ला जानत नइहे, सबले बड़े महान।।


ऊँच नीच ला नइ जानय जी, मया रथे हर टेम।

मन मिलथे ता मितान बनथे, जान आज ले हेम।।


-हेमलाल साहू

ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा (छ.ग.) 

6 अग॰ 2016

अपन देस बर जीबो मरबो (हेम के सरसी छंद)

‎अपन देस बर जीबो मरबो (हेम के सरसी छंद)

‎अपन देस बर जीबो मरबो, हमला हवय गुमान।

‎ए माटी के मान रखे बर, अरपन तन मन प्रान।।

‎हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, एक देस के फूल।

‎मया-दया ले महकय बगिया, समरसता हे मूल।।

‎पूरब पच्छिम उत्तर दक्खिन, हावन एक समान।

‎सीमा के रखवारी करबो, भीमा जस बलवान।।

‎हवै भरोसा ए जाँगर मा, करथन जी भर काज।

‎माटी ले हमर बने चोला, रखथन माटी लाज।।

‎दाई के जयकारा गावत, चलथन सीना तान।

‎बइरी कतको आवै संगी, रहिबो बन चट्टान।।

‎भगत सिंह अउ खुदीराम कस, जनमिन बड़का वीर।

‎भारत दाई बर लड़त-लड़त, हाँसत सहिगे पीर।।

‎बापू, तिलक, नेहरू, सुभाष, देस के रहिन शान।

‎स्वाभिमान के जोत जलाइन, देस बढ़ाइन मान।।

‎आजादी बर लड़िन वीर मन, रखिन देस के मान।

‎ब्रिटिश राज ला दूर भगाइन, गूँजिस हिन्दुस्तान।।

‎हवन हमन माटी के बेटा, मन बसथे सम्मान।

‎हमर तिरंगा झंडा हावय, भारत के पहिचान।।

‎रचनाकार-हेमलाल साहू

‎गाँव-गिधवा, जिला बेमेतरा (छ. ग.)

3 अग॰ 2016

सावन सोमवार (सरसी छन्द)

सावन सोमवार के संगी, साधक करय उपास।

महादेव के जाप करे जी, रख दरशन के आस।।


सरधा मन ले फूल चढ़ाबो, संग बेल के पान।

भूखा हे भगवान भाव के, रखे भगत के मान।।


अपन मनौती ला मनवाबो, गिर चरनन मा आज।

गंगा जल ला अरपित करबो, पूरन करही काज।।


जाप ओम के गूँजत हावय, देखव चारो धाम।

कैलाशपति तोर शिव भोले, अवघर दानी नाम।।


धरै हाथ मा डमरू त्रिशूल, गला लपेटे नाग।

देख जटा में गंगा सोहय, पिये धतूरा भाँग।।


जहर कण्ठ मा दाबे भोला, करै जगत कल्यान।

पहिर साँप बिच्छी के माला, रखथस संग मशान।।


माता पारवती सँग रहिथे, बेटा तोर गणेश।

दूर करे सबके दुख पीरा, धरे गजानन भेस।।


जय जय हो भोले भंडारी, करबे मन मा वास।

सावन सोमवार के संगी, साधक करय उपास।।


-हेमलाल साहू 

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ.ग.) 

1 अग॰ 2016

*नशा नाश के गढ़ ए*(पकैया छंद)


छन्न पकैया छन्न पकैया, नशा नाश के गढ़ ए।
नाश करै घर सबके संगी, रोग लाय के जड़ ए।1।

छन्न पकैया छन्न पकैया, दारू चेत बिगाड़य।
देख कका दसरू हा पीके, आँय बाँय चिल्लावय।2।

छन्न पकैया छन्न पकैया, बीड़ी खाँसी लाये।
करै फेफड़ा धुँगिया धुँगिया, कुँआ मौत के ताये।3।

छन्न पकैया छन्न पकैया, कैसर लाय गुड़ाखू।
गोहारत हव बात मान ले, भैया तँय बैसाखू।4।

छन्न पकैया छन्न पकैया, लाय गरीबी तंगी।
बड़े बड़े ज्ञानी मन कहिथे, नशा काल के संगी।5।

छन्न पकैया छन्न पकैया, छोड़ नशा ला भाया।
हाथ जोड़ के करथौं अरजी, सुख के पाहू छाया।6।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

31 जुल॰ 2016

आँखी रहिके अंधरा (हेम के दोहे)

आँखी रहिके अंधरा, हावय मोर समाज।

बिकथे हावय न्याय हा, करे दोगला राज।।


धरम करम बस नाव के, पास नहीं ईमान।

सच के काटत हे गला, हाँसत हे शैतान।।


गूँगा बहरा न्याय हे, सुने नहीं फरियाद।

मोर मोर के शोर हे, पैसा बनय दमाद।।


-हेमलाल साहू 

ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा

तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ.ग.) 


30 जुल॰ 2016

सावन के महिमा (हेम के सार छंद)

सबो डहर देखव सुग्घर, बरसय रिमझिम पानी।

सबके मन में आस जगावय, हाँसय सबो परानी।।


अतल तला तल पानी भरही, जम्मो नरवा नदिया।

नाचय जल के रानी मन, देखव कतका बढ़िया।।


सुखी रही जिनगानी हर, शिव ला आँव मनाबो।

श्रद्धा मन ले दया मया के, सुघ्घर फूल चढ़ाबो।।


पहली घर खुशयाली लावय, घर मा आय हरेली।

पूजा करथे औजार सबो, फोड़य नरियर भेली।।


नीम दुवारी डारा खोचय, घर घर राउत भैया ।

चढ़ै सबो लइका मन गेड़ी, लोदी खावँय गैय्या।।


भागत लावय सावन संगी, देख मया के साखी।

भाई बहनी रद्दा जोहय, आवय भादो राखी।।


करिया करिया बादर देखत, निक लागे सँगवारी।

आय महीना सावन के जी, हावय महिमा भारी।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा (छ.ग.)

29 जुल॰ 2016

कड़ुवा गोठ (हेम के उल्लाला छंद)

जिनगी के तो भोगना, लिखै दियै भगवान हा।

कथनी करनी ला बने, दिखे नहीं इंसान हा।।


आँखी रहिके अंधरा, कइसे बनगे ज्ञान हा।

राज दोगला हर करै, हाँसत हे शैतान हा।।


दुख पीरा ला भोग थे, जिनगी होंगे जंग गा।

मारत हावय अउ मरे, देखव मनखे रंग गा।


कहाँ जियत मा पूछथे, कोनो बेटा बाप ला।

मर जाथे ता धोत हे, मनके अपने पाप ला।।


कलजुग के दुनिया हवे, करै दिखावा लोग हा।

आँसू पइसा मा बिके, अन्तस नइहे सोग  हा।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ.ग.)

23 जुल॰ 2016

आवव संगी (हेम के सार छंद)

आवव संगी आवव साथी, अंजोर नवा लाबो।

छाँव मया के संगी आवव, माटी मा बगराबो।।


हमर सोनहा भुइँया ला जी, सुघ्घर सरग बनाबो।

छत्तीसगढ़ी माटी मा जी, नव बिहान ला लाबो।।


सबो डहर संगी माटी के, मँहक हमन मँहकाबो।

पावन हवय हमर भुइँया हा, सुघ्घर मया जगाबो।।


अपन भरोसा हम जाँगर के, नव विकास ला गढ़बो।

पुरखा के सपना ला संगी, मिलके पूरा करबो।।


जय किसान अउ जय जवान के, नारा सफल बनाबो।

भुइँया के सेवा कर संगी, जिनगी अपन बिताबो।।


आगे हावय दिन बादर हा, माटी करजा छुटबो।।

पढ़ लिख अउ गढ़ मुख भाषा मा, खूब मया ला लुटबो।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

बेरोजगार के दरद (हेम के दोहे)

करे रात दिन मेहनत, अपने जाँगर पेर।

दिन भर भूखा ओ रहै, जिनगी के हे फेर।।


करजा बोड़ी ला करे, बेटा खूब पढ़ाय।

ददा आस मनमें रखै, बने नौकरी पाय।।


हाथे मा डिग्री धरै, दर दर भटकत जाय।

इहाँ नौकरी ना मिलै, ठोकर रोजे खाय।।


बेटा चिन्ता ला करै, कइसे करज छुटाय।

मोर पढ़ाई मा ददा, पूँजी अपन लुटाय।।


काम मिलै मोला नहीं, घर का मुख देखाँव।

बोझ ददा के अब नहीं, तन मा आग लगाँव।।


पढ़े लिखे मा सब गये, खेत खार बेचाय।

खाये बर दाना नहीं, जिनगी कौन चलाय।।


बड़े बड़े वादा करै, साथी अपन बताय।

जाबे संगी तीर मा, घर ले देत भगाय।।


पूछत हावँव आज मँय, काबर अपन बनाय।

प्रवचन हमला ओ सुना, घर मा मजा उड़ाय।।


-हेमलाल साहू

ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा (छ. ग.)


21 जुल॰ 2016

दोगला (हेम के दोहे)

राजनीति मा दोगला, करे देख ले राज।

आँखी रहिके अंधरा, होगे हवे समाज।।


दुख पीड़ा पावच नहीं, मानवता ला खोय।

दूसर के जाँगर रहय, अपन नाव ला बोय।।


पइसा मा देखव इहाँ, मानवता बेचाय।

रुखवा काँटे सोझवा, छोड़ लेड़गा जाय।।


जगह जगह मा कोकड़ा, डेरा हवे जमाय।

ताकत बइठे ओ हवे, मउका फेर ग आय।।


कउनो बेद पुरान के, कहाँ रखे हे ज्ञान।

आँखी रहिके अंधरा, बनगे हे इंसान।।


-हेमलाल साहू

ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा (छ. ग.)

8 जुल॰ 2016

हेम के दोहे

माटी बन माटी मिलै, सुघ्घर लै आकार।

माटी ला पूजे सबे, जिनगी बर इहि सार।।


माटी के बेटा हमन, करथन सबसे प्रेम। 

राज भगा ले दोगला, आही हमरे टेम।।


सागर साहित साधना, जस उतरे तस डूब।

मिलथे कहाँ अथाह जी, पानी दिखथे खूब।।


मन के ईष्या फेक के, मया सबो से राख।

मानव मानव एक हन, राख बचाके साख।।


जिनगी के दिन चार हे, गाँठ बाँध ले हेम।

काल हवे सबसे बड़े, राख मया अउ प्रेम।।


जस रगड़े तँय रत्न ला, चमके ओकर रंग।

लेवन रहिके ज्ञान ला, जिनगी भर गुरु संग।।


कठिन हवे साधना, साहित के बड़ जान।

बिना मेहनत ना मिलै, भैया कउनो ज्ञान।।

-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

3 जुल॰ 2016

सियानी गोठ (हेम के दोहे)

मनखे मनखे एक हन, कहिस कबीरा जान।

मिलै नहीं गुरु के बिना, सुनलव संगी ज्ञान।।


सुन लौ संगी बात ला, फेर करव जी गोठ।

मिलथे सीख सियान के, रखे बात ला पोठ।।


कारज ला पहली करौ, फेर राख अधिकार।

जइसे धान किसान बो, फेर लुये सब खार।।


अच्छा बात सकेल के, एक एक रख बात।

गुरु के चलहूँ संग ता, खाव नहीं जी लात।।


मउहा संगी जान ले, अबड़ दूर ममहाय।

झूठ लबारी के सबे, माया हे फइलाय।।


भटकत रहिथे देख मन, कौन करे जी माफ।

गुरु के बानी हर करें, मन ला सुघ्घर साफ।।

 

-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)


28 जून 2016

बरखा रानी (हेम के सार छंद)

‎बाल कविता


‎बरखा रानी के रंग (हेम के सार छंद)


‎करिया-करिया बादर देखत
‎हाँसत हे जिनगानी।
‎सबके मन मा आस जगत हे,
‎आवत बरखा रानी।।

‎पानी देख मेचका टर्रय,
‎सुख के देय निशानी।

‎रुनझुन-रुनझुन पानी आथे,
‎बढ़िया होय किसानी।।

‎गावत सुघ्घर गीत ददरिया,
‎बैठ किसान दुआरी।
‎सावन-भादो महिना आगय,
‎छाय घपट अँधियारी।।

‎चंदा सूरज लुका छुपी ला,
‎खेलँय पारी-पारी।
‎छावय जग मा घुमड़-घुमड़ के,
‎बदरी कारी-कारी।।

‎उछलत कूदत नाचत-नाचत,
‎करँय तमासा मछरी।
‎झूमर-झूमर डोरी नाचत,
‎पिटय केकड़ा डफरी।।

‎झींगुर सोर मचावत हावय,
‎घोंघी खेलँय घाँदी।
‎चारो कोती स्वागत करथे,
‎झूम-झूम के काँदी।।

‎टपटप-टपटप पानी गिरथे,
‎चुहथे खपरा छानी।
‎तरिया-नदिया होय भरावर,
‎सुघ्घर हे जिनगानी।।

‎पहिरे धरती हरियर लुगरा,
‎लाय नवा खुशहाली।
‎चिरई-चुरगुन चहकत नाचय,
‎देखत बड़ हरियाली।।

‎लहलहात हे खेत-खार मन,
‎किरपा बरखा रानी।
‎हेम कहँय संवारव धरती,
‎ऐही धन के दानी।।

‎✍️ रचनाकार : हेमलाल साहू
‎गाँव : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)

‎शब्दार्थ :
डोरी= "साँप, घाँदी=घूमना, काँदी= घास,मेचका = मेंढक


26 जून 2016

रख जग ले नाता (हेम के उल्लाला छंद)

दाई अउ बाबू हवे, जग मा भगवान कस।

संतोषी बहनी हवे, यम हे भाई जान जस।।


पूजा कर परिवार के, जिनगी जाही तोर तर।

करम धरम करले इहाँ, दान दया ला मोर धर।।


मया दया के गाँठ ला, बाँध बने कस छोर से।

कतको बड़का भेद ले, टूटे झन बस जोर से।।


जियत मरत नाता रहे, सुघ्घर सबके संग मा।

कलजुग के दुनिया हवे, चढ़े मया के रंग मा।।


स्वारथ के मनखे हवे, जाँगर मा सम्मान हे।

बिन जाँगर पूछे नहीं, करत सदा अपमान हे।।


मानवता मन मा कहाँ, सोचत हावय हेम हा।

रख नाता जग ले सदा, मिलही सबसे प्रेम हा।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

25 जून 2016

झन काँटव रुख राई ला (हेम के सार छंद)

झन काँटव गा रुख राई ला, जेमा हे जिनगानी।

हावय सबके डेरा संगी, करहूँ झन मनमानी।।


सुघ्घर रुख राई मन हावे, देखव ठउर ठिकाना।

सबो जीव जंगल रहिथे, तँय झन खोज बहाना।।


अपने स्वारथ बर जी सबके, हवे उजारत डेरा।

चिरई चुरगुन रोवत हावय, करबो कहाँ बसेरा।।


दीया बूता गे जिनगी के, जले कहाँ ले बाती।

सब रुख राई कटगे संगी, जरथे भुइँया छाती।।


मिले नहीं निरमल पुरवाई, अटकत हावे साँसी।

बून्द बून्द पानी बर तरसे, जिनगी होगय फाँसी।।


सोचब समझव आवव संगी, लगाबोन रुख राई।

बाग बगइचा खूब बनावँन, निरमल हो पुरवाई।।


सुघ्घर धरती आँव सम्भरा, पहिरा हरियर लुगरा।

मान प्रकृति के रखबो संगी, नई करन जी उँघरा।।


जंगल झाड़ी रुख राई मा, सुघ्घर हमर निसानी।

चिरई चुरगुन सबो जीव के, हावय दबे कहानी।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

23 जून 2016

किसान (हेम के सार छंद)

होत बिहनिया उठके भैया, धरती करत बखाने।

सुरुज देव के पाँव परत हे, अंजोर नवा लाने।।


देखत हावे करिया बादर, हाँसत हे जिनगानी।

मनमे आस जगावत हावे, होही बने किसानी।।


 सान कोटना सुघ्घर आँटी, बइला खूब खवाये।

जिनगी ला मोर तार के तँय, घर मा लछ्मी लाये।।


बार बार वो पाँव परत हे, कसके मया दुलारे।

करबो चलना संगी खेती, आगे बारिस हा रे।।


होत बिहनिया निकले भैया, खाँदे बोहे नागर।

धरे तुतारी हाथे अपने, धरके जावय जाँगर।।


फाँदे बइला नागर भैया, खेत बोय जी धाने।

अरा तता के धुन हर गूँजे, देख जगत हा जाने।।


दुख पीरा ला सहत रहे जी, दूनो देख मिताने।

का कहिबो ए घाम छाँव ला, बइला जाँगर माने


बिना करम फल मिले नहीं, करव गान भगवाने।

जाँगर पेरत हवे रात दिन, करके सेवा ध्याने।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)


20 जून 2016

जिनगी ला संवार (हेम के सरसी छंद)

बेटी ला पढ़ा लिखा के दौ, सब विद्या ज्ञान।

किरण चावला कस संगी, बेटी भरय उड़ान।।


लछमी होथे नोनी घर के, बाँध रखे परिवार।

बाबू कस नोनी ला संगी, दे दौ जी अधिकार।।


नोनी बाबू एक हवे जी, सबला जग दौ आँन।

दुवा भेद ला छोडव संगी, सबला दौ सम्मान।।


झाँझी के रानी बाई जस, दे दौ जी तलवार।

दुर्गा काली चंडी जइसे, भरही ओ हुंकार।।


बढ़िया ये समाज मा संगी, राखव नवा विचार।

बेटी ला पढ़ा लिखा के दे, जिनगी ला संवार।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)


9 जून 2016

रुख राई (हेम के सार छंद)

आवव मिलके रुख राई ला, जम्मों डहर लगाबों।

निर्मल करबो पुरवा पानी, सुख के अलख जगाबों1।


पानी बर झन तरसे धरती, अइसन दिन ला लाबो।

किसम किसम के रुख राई मा, धरती ला सम्हराबों।2।


पेट भरे बर फल मिलही गा, घर बर लकड़ी झाड़ी।

प्यास जगत के बुझही संगी, सुख ले चलही गाड़ी।3।


झूम  झूम  के  बरखा आही, होही  बने  किसानी।

लाँघन कोनो नइ रइही गा, रुख सँग बदव मितानी।4।


भरे रहे नदिया नरवा मा, अतल तला तल पानी।

हरियर हरियर धरती सँभरे, हाँसय गा जिनगानी।5।


सबो डहर रुख राई पाबौ, सुघ्घर लगे घनेरा।

चिरई चुरगुन खेलय कूदय, लगा मया के डेरा।6।


रुख  राई  के रक्षा  करबो, तब पाबौ हरियाली।

हाँसत रइही सबके जिनगी, गाँव भरे खुशियाली।7।


गाँव गाँव मा बढ़िया संगी, नव सुराज ला लाबो।

रुख राई जइसे पूत नही,  सुघ्घर मान बढ़ाबों।8।

-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा (छ.ग.)

4 जून 2016

कलजुग (हेम के दोहे)

कलजुग माया जान के, फूँक फूँक रख पाँव।

आही हमरो काल तौ, नइ मिलही जी ठाँव।।


सबले बड़का काल हे, हवय समय के मान।

कतको जीव छुपाय तँय, बाँचय नही परान।


भेस धरे साधू हवै, चोला पहिर सफेद।

करै दिखावा कोकड़ा, का जानव गा भेद।।


कलजुग के परताप ये, रखथें मन मा बैर।

भाई भाई दुश्मनी, नइये ककरो खैर।।


कायर मन मा हे भरे, रखे जहर ला डार।

सोच समझ के सँग रहौ, देवत हे फुफकार।।

-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

तुरते ताही

‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद)‎

‎हास्य कविता  ‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद) ‎ ‎एक्के झन हे मोर मयारू, सुरता आवय रतिया। ‎सुनलव मोर मया के किस्सा, नाव हवे फुलमतिया।। ‎ ...