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हेम के कुंडलियाँ

हेम के कुंडलियाँ महँगाई  ‎घर के मुखिया आलसी, बन बइठे सरकार। घूमे देश बिदेश ला, बेच अपन घर द्वार।। बेच अपन घर द्वार, छाय घर मा कंगाली। ‎बढ़े जिनिस के भाव, जेब हर होगे खाली।। ‎बाढ़य करजा रोज, कहाँ हे अच्छा दिन हर। ‎आँखी उँगरी डार, देख बइठे मुखिया घर।। ‎-हेमलाल साहू ‎गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा