*सीखव गिनती* आवव संगी सीखव गिनती। मुनिया बबलू करथे बिनती।। एक मया के ममता दाई। दूध पान मा हवय भलाई।। दू आँखी मा देखे मुनिया। रंग बिरंगी हावय दुनिया।। तीन रंग मा सजे तिरंगा। देश प्रेम अउ हे मन चंगा।। चार दिशा के अलग कहानी। चार महीना बरसा पानी।। पाँच उंगरी एक हथेली। मया-दया ला बाँट सहेली। छह ऋतु आवय बारी-बारी। ये भुइयाँ के हमन पुजारी।। सात सुरों मा गीत बनालव। पेटी तबला संग बजालव।। आठ पाँव के मकड़ी रानी। जाल बुनय सारी जिनगानी।। नौ ग्रह ऊपर चमकय दमकय। आसमान मा सुग्घर लटकय।। दस उँगरी दू हाथ लगालव। एक संग मिलके काम करालव ।। -हेमलाल साहू गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा
हेम के कुंडलियाँ महँगाई घर के मुखिया आलसी, बन बइठे सरकार। घूमे देश बिदेश ला, बेच अपन घर द्वार।। बेच अपन घर द्वार, छाय घर मा कंगाली। बढ़े जिनिस के भाव, जेब हर होगे खाली।। बाढ़य करजा रोज, कहाँ हे अच्छा दिन हर। आँखी उँगरी डार, देख बइठे मुखिया घर।। -हेमलाल साहू गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा