हमर माटी हमर गोठ
जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
30 जुल॰ 2026
मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद)
28 जुल॰ 2026
(हेम के हास्य कविता) महँगाई के हाट
26 जुल॰ 2026
हेम के दोहे व्यंग्य के बान
19 जून 2026
हेम के दोहे (बाल जनऊला)
15 जून 2026
गिधवा मोरो गाँव
गिधवा मोरो गाँव।।
करिया माटी के चिन्हारी, बर पीपर के छाँव।
धरती महतारी के अँचरा, गिधवा मोरो गाँव।।
महमाया दाई के किरपा, अन्न-धान्य भंडार।
नीम छाँव मा बइठे हावय, बड़का तरिया पार।।
तरिया नरवा निरमल पानी, झलमल बहिथे धार।
कलकल करथे बगरत पानी, सींचय खेत खार।।
रुख राई ले धरती दाई, अपन करय सिंगार।
हाँसत हवे फूल फुलवारी, महकय नवा बहार।।
छोट बड़े सब चिरई चुरगुन, गिधवा मा सकलाय।
गुरतुर गुरतुर गीत सुनाके, सबके मन हरसाय।।
हावय तरिया अउ बाँधा मा, चिरई मन के ठाँव।
बाम्हन चिरई अगास उड़थे, बनकुकरा दे बाँव।।
नीलकंठ मारे झपटा ला, चमके नील परेव।
रंग बिरंगी आनी - बानी, चिरई मन के नेव।।
देशी संग बिदेशी चिरई, किसम किसम के आँव।
जेकर किस्सा कहनी बगरे, दुरिहा दुरिहा गाँव।।
हरियर चुनरी ओढ़य सुग्घर, लहलय खेती खार।
छावय घर घर मा खुशिहाली, बसे सुखी संसार।।
रंग रंग के भाजी पाला, उगथे बखरी बाग।
चेच अमारी पटवा खेड़ा, खावय भाजी साग।।
बहा पसीना खेत खार मा, करथे हरियर बाग।
बाँधे पगड़ी करय किसानी, सबके जागे भाग।।
दाई काकी भौजी बहनी, करथे मया दुलार।
बबा कका अउ भैया बाबू, हिम्मत दैय अपार।।
दू पैसा के खातिर जावय, सबो शहर के ओर
लहुटय घर तिहार के बेरा, बाँध मया के डोर।।
सुम्मत के रस्ता ला चुनके, चलथें सब परिवार।
समरसता के दीया जलथे, जगमग हो घर बार।।
सुवा ददरिया राग भरथरी, गावे एक्के संग।
राउत पंथी करमा नाचय, दिखथे एक्के रंग।।
माटी के ये दया मया ले, गढ़े गाँव के ठाँव।
मन के मंदिर मा बसथे, गिधवा मोरो गाँव।।
गाँव मोर हे गिधवा सुघ्घर, सरग इही बन जाय।
बोली बोलय छत्तीसगढ़ी, सबके मन ला भाय।।
रचनाकार- हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा
27 मई 2026
सीखव गिनती
25 मई 2026
हेम के कुंडलियाँ
हेम के कुंडलियाँ महँगाई
घर के मुखिया आलसी, बन बइठे सरकार।
घूमे देश बिदेश ला, बेच अपन घर द्वार।।
बेच अपन घर द्वार, छाय घर मा कंगाली।
बढ़े जिनिस के भाव, जेब हर होगे खाली।।
बाढ़य करजा रोज, कहाँ हे अच्छा दिन हर।
आँखी उँगरी डार, देख बइठे मुखिया घर।।
-हेमलाल साहू
गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा
30 नव॰ 2024
जुबान (कुंडलिया छंद)
निकले वापस फेर ना, आवय तोर जुबान।
जइसे निकले तीर ले, आवय नहीं कमान।।
आवय नहीं कमान, बात ला छेड़व गुनके।
शारद दे आशीष, शब्द ला रखलव चुनके।।
कहे हेम कविराय, बोल तँय गुरतुर मन ले।
सब कड़वाहट फेक, फेर ना वापस निकले।।
- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा
22 नव॰ 2024
याद रखें बर हावय
कभू दुबारा नई मिले गा,
ये दाई ददा जवानी।
इकर मान ला रखले बढ़िया,
झन बनबे तँय अभिमानी।।
करे नाम ला बदनामी ये,
लालच गुस्सा अउ चोरी।
करँव कभू झन कोनो ककरो,
चारी चुगली मुँहजोरी।।
बइरी जर जमीन के कारन,
होथे भाई ले भाई।
रहव सबो मिलके आपस मा,
होवव झन कभू लड़ाई।।
सबला प्यारा होथे सबले,
बाई धन दौलत दाई।।
सोच समझ के रद्दा चुनहूँ,
कतको हे आगू खाई।।
असली सुख के रोड़ा हावय,
कोट कचहरी के द्वारी।
जिनगी मा मत हो कोनो ला,
तन मन के कुछु बीमारी।।
चुरा नई ले जावय कोनो,
अक्कल कला सदाचारी।
बने तोर दुख के कारन ये,
जलन आलसी लाचारी।।
याद रखें बर हावय सबला,
जनम मरन के सच्चाई।
तोर मान ला सदा बढ़ाही,
धरम करम अउ अच्छाई।।
-हेमलाल साहू
ग्राम-गिधवा, जिला-बेमेतरा
20 मई 2022
जागव रे (सरसी छंद)
16 अप्रैल 2022
जय हनुमान (हेम के बरवै छन्द)
19 फ़र॰ 2022
हेम के बरवै छन्द (सतगुरु रविदास)
*हेम के विधाता छन्द (किसान)*
17 फ़र॰ 2022
हेम के बरवै छंद (आगे नवा बछर)
हेम के सरसी छन्द (बसन्त ऋतु)
16 फ़र॰ 2022
हेम के सार छंद (बेटी)
29 जन॰ 2022
शंकर छंद (लाल बहादुर शास्त्री)
27 दिस॰ 2021
सरसी छंद (गुरु घासीदास बाबा)*
23 अग॰ 2021
हेम के कुण्डलिया (राखी)
15 अग॰ 2021
28 जुल॰ 2021
गुरु (हेम के कुण्डलिया)
हेम के दोहे
करहूँ पहली वंदना, दाई-बाबू मोर।
गुरु ला दूसर वंदना, ज्ञान करय अंजोर।।
हेम के कुण्डलियाँ
करलौ पहिली वंदना, गुरु सम हे भगवान।
गुरु देवय हमला ज्ञान, धरलौ ओखर ध्यान।।
धरलौ ओखर ध्यान, सही रद्दा देखाही।
सबो ईरखा फेंक, ज्ञान के अलख जगाही।।
कहय हेम कविराय, बात ला गुरु के सुनलौ।
जिनगी होही पार, वंदना गुरु के करलौ।।
रचनाकार – हेमलाल साहू
गाँव – गिधवा, जिला – बेमेतरा (छ.ग.)
11 अप्रैल 2021
हेम के चौपाई छंद (कोरोना जागरूकता)
चौपाई छंद (गरमी)
21 फ़र॰ 2021
हेम के कुंडलिया
20 फ़र॰ 2021
हेम के कुण्डलिया
हेम के कुण्डलिया
हेम के कुकुम्भ छंद
हेम के कुकुम्भ छंद
जय छत्तीसगढ़ मोर माटी, जग बर हावच वरदानी।
सबले बढ़िया तोला कहिथे, तोरो हे गजब कहानी।।
सब दुख पीरा तही हरैया, तोला सब माथ लगाथे।
तोर शरण मा रहिके दाई, सुघ्घर जिनगी ल पहाथे।।
तोर हवे ये भुइँया पावन, बसे देवता अउ धामी।
गाँव गाँव माहामाया अउ, बसे राम अन्तर्यामी।।
घर घर रामायण बाचत हे, बहे ज्ञान गंगा गीता।
पावन हवे इहाँ के नारी, पूजे जस लक्ष्मी सीता।।
बगरे हावय खनिज सम्पदा, देख इहाँ कोना कोना।
हीरा मोती के खदान हे, भरे पड़े चाँदी अउ सोना।।
कतको हावय बड़का बड़का, देखव इहाँ कारखाना।
काम करे बाहर ले आवय, इहाँ बनावय ग ठिकाना।।
देख कला संस्कृति ला सँजोय, पावन हवे तोर माटी।
तोरच कोरा मा लइका मन, खेलय भँवरा अउ बाँटी।।
रंग बिरंगी चिरई चिरगुन, जिनकर गुरतुर हे बोली।
आनी बानी के जीव जन्तु, पाबे तँय टोली टोली।।
नाचा गम्मत लोगन मनके, देख खूब मन ला भावे।
सुवा ददरिया करमा पंथी, राग भरथरी जब गावे।।
मातर मड़ई मेला बर जी, गाँव गाँव राउत जागे।
नाच नाच के पारे दोहा, कतका सबला निक लागे।।
धान चना गेहूँ उपजाथस, अउ उपजाथस उँनहारी।
जय छत्तीसगढ़ मोर माटी, महिमा हवे तोर भारी।।
सबले बढ़िया तोला कहिथे, तोरो हे गजब कहानी।।
जय छत्तीसगढ़ मोर माटी, जग बर हावच वरदानी
-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र -1
ग्राम-गिधवा, पोस्ट नगधा
जिला बेमेतरा (छ. ग.)
19 फ़र॰ 2021
हेम के दोहे
हेम के दोहे
अलवा जलवा लेखनी, आखर ले अनजान।
26 नव॰ 2020
हेम के कज्जल छंद
तुरते ताही
मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद)
हास्य कविता मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद) एक्के झन हे मोर मयारू, सुरता आवय रतिया। सुनलव मोर मया के किस्सा, नाव हवे फुलमतिया।। ...
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बाबा घासीदास गा, तोर आय हव द्वार। तँय हर दीया ज्ञान के, मोरो मन मा बार।। निचट अज्ञानी मँय हवव, बता ज्ञान के सार। बाबा अड़हा जान हव, जग ले मोल...
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निकले वापस फेर ना, आवय तोर जुबान। जइसे निकले तीर ले, आवय नहीं कमान।। आवय नहीं कमान, बात ला छेड़व गुनके। शारद दे आशीष, शब्द ला रखलव चु...
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ढोलक तबला थाप मा, बाजय मांदर संग। नाचय साधक साधके, देखव पन्थी रंग।। बाबा घासी दास के, करथे सुघ्घर गान। गावय महिमा देखले, गुरु के करत बखान।। ...


