6 अग॰ 2016

अपन देस बर जीबो मरबो (हेम के सरसी छंद)

‎अपन देस बर जीबो मरबो (हेम के सरसी छंद)

‎अपन देस बर जीबो मरबो, हमला हवय गुमान।

‎ए माटी के मान रखे बर, अरपन तन मन प्रान।।

‎हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, एक देस के फूल।

‎मया-दया ले महकय बगिया, समरसता हे मूल।।

‎पूरब पच्छिम उत्तर दक्खिन, हावन एक समान।

‎सीमा के रखवारी करबो, भीमा जस बलवान।।

‎हवै भरोसा ए जाँगर मा, करथन जी भर काज।

‎माटी ले हमर बने चोला, रखथन माटी लाज।।

‎दाई के जयकारा गावत, चलथन सीना तान।

‎बइरी कतको आवै संगी, रहिबो बन चट्टान।।

‎भगत सिंह अउ खुदीराम कस, जनमिन बड़का वीर।

‎भारत दाई बर लड़त-लड़त, हाँसत सहिगे पीर।।

‎बापू, तिलक, नेहरू, सुभाष, देस के रहिन शान।

‎स्वाभिमान के जोत जलाइन, देस बढ़ाइन मान।।

‎आजादी बर लड़िन वीर मन, रखिन देस के मान।

‎ब्रिटिश राज ला दूर भगाइन, गूँजिस हिन्दुस्तान।।

‎हवन हमन माटी के बेटा, मन बसथे सम्मान।

‎हमर तिरंगा झंडा हावय, भारत के पहिचान।।

‎रचनाकार-हेमलाल साहू

‎गाँव-गिधवा, जिला बेमेतरा (छ. ग.)

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