हेम के हास्य कविता
महँगाई के हाट
लम्बा लिस्ट धराके बाई,
भेजिस मोला हाट।
जेब टटोलत पैसा गिनतें,
निकरेंव अपन बाट।।
पहिली गे हौं पताल तिर मा,
दिखे लाल मुस्कात।
सौ रुपिया किलो भाव सुन,
जीव मोर अकुलात।।
मँय कहेंव, "बेचे बर हे या,
मंदिर चढ़ाव, बाप?"।
कहिस दुकनिया – नइ लेना हे,
ता रद्दा ले नाप।।
मिरचा नइहे एक्को तीखा,
तीखा ओकर भाव।
धनिया रानी बन के बइठे,
जेब कहिस – घर जाव।।
देखव पियाज आँख मटकावय,
चढ़के भाव अगास।
तेल के भाव सुनतें मोरो,
जेब धलिस उपवास।।
सबले बड़का मजाक ता ए,
देख हँसी मा रोन।।
बेचे किसान दस रुपिया मा,
हमन खरीदन सोन।।
झोला आइस खाली-खाली,
झोला घलो लजाय।
फूट परिस बाई के गुस्सा,
बघवा कस गुर्राय।।
बाई कहिथे – बिना साग के,
चलही का घर-बार।
जेब मा एक कौड़ी नइहे,
जीना हे दुसवार।।
रचनाकार – हेमलाल साहू
गाँव – गिधवा, जिला – बेमेतरा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें