जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
27 दिस॰ 2021
सरसी छंद (गुरु घासीदास बाबा)*
23 अग॰ 2021
हेम के कुण्डलिया (राखी)
15 अग॰ 2021
28 जुल॰ 2021
गुरु (हेम के कुण्डलिया)
करलौ पहली वंदना, मानव जस भगवान।
मिले ज्ञान गुरु बिन नहीं, धरलौ सुघ्घर ध्यान।
धरलौ सुघ्घर ध्यान, सही रास्ता पकड़ाही।
मन के इरखा फेक, सत्य के नाम जगाही।।
कहय हेम कविराय, बात ला गुरु के सुनलौ।
जिनगी ला दे तार, वंदना गुरु के करलौ।।
-हेमलाल साहू
छंद साधक, छंद के छ सत्र -१
11 अप्रैल 2021
हेम के चौपाई छंद (कोरोना जागरूकता)
चौपाई छंद (गरमी)
21 फ़र॰ 2021
हेम के कुंडलिया
20 फ़र॰ 2021
हेम के कुण्डलिया
हेम के कुण्डलिया
हेम के कुकुम्भ छंद
हेम के कुकुम्भ छंद
जय छत्तीसगढ़ मोर माटी, जग बर हावच वरदानी।
सबले बढ़िया तोला कहिथे, तोरो हे गजब कहानी।।
सब दुख पीरा तही हरैया, तोला सब माथ लगाथे।
तोर शरण मा रहिके दाई, सुघ्घर जिनगी ल पहाथे।।
तोर हवे ये भुइँया पावन, बसे देवता अउ धामी।
गाँव गाँव माहामाया अउ, बसे राम अन्तर्यामी।।
घर घर रामायण बाचत हे, बहे ज्ञान गंगा गीता।
पावन हवे इहाँ के नारी, पूजे जस लक्ष्मी सीता।।
बगरे हावय खनिज सम्पदा, देख इहाँ कोना कोना।
हीरा मोती के खदान हे, भरे पड़े चाँदी अउ सोना।।
कतको हावय बड़का बड़का, देखव इहाँ कारखाना।
काम करे बाहर ले आवय, इहाँ बनावय ग ठिकाना।।
देख कला संस्कृति ला सँजोय, पावन हवे तोर माटी।
तोरच कोरा मा लइका मन, खेलय भँवरा अउ बाँटी।।
रंग बिरंगी चिरई चिरगुन, जिनकर गुरतुर हे बोली।
आनी बानी के जीव जन्तु, पाबे तँय टोली टोली।।
नाचा गम्मत लोगन मनके, देख खूब मन ला भावे।
सुवा ददरिया करमा पंथी, राग भरथरी जब गावे।।
मातर मड़ई मेला बर जी, गाँव गाँव राउत जागे।
नाच नाच के पारे दोहा, कतका सबला निक लागे।।
धान चना गेहूँ उपजाथस, अउ उपजाथस उँनहारी।
जय छत्तीसगढ़ मोर माटी, महिमा हवे तोर भारी।।
सबले बढ़िया तोला कहिथे, तोरो हे गजब कहानी।।
जय छत्तीसगढ़ मोर माटी, जग बर हावच वरदानी
-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र -1
ग्राम-गिधवा, पोस्ट नगधा
जिला बेमेतरा (छ. ग.)
19 फ़र॰ 2021
हेम के दोहे
हेम के दोहे
अलवा जलवा लेखनी, आखर ले अनजान।
तुरते ताही
हेम के दोहे (बाल जनऊला)
हेम के दोहे (बाल जनऊला) नाच नचावँन अंगरी, काम सबो के आँन। सारी जग के बात ला, ले पहुँचावँन कान।। संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस...
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बाबा घासीदास गा, तोर आय हव द्वार। तँय हर दीया ज्ञान के, मोरो मन मा बार।। निचट अज्ञानी मँय हवव, बता ज्ञान के सार। बाबा अड़हा जान हव, जग ले मोल...
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निकले वापस फेर ना, आवय तोर जुबान। जइसे निकले तीर ले, आवय नहीं कमान।। आवय नहीं कमान, बात ला छेड़व गुनके। शारद दे आशीष, शब्द ला रखलव चु...
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ढोलक तबला थाप मा, बाजय मांदर संग। नाचय साधक साधके, देखव पन्थी रंग।। बाबा घासी दास के, करथे सुघ्घर गान। गावय महिमा देखले, गुरु के करत बखान।। ...

