28 जुल॰ 2021

गुरु (हेम के कुण्डलिया)

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‎गुरु वंदना

‎हेम के दोहे

‎करहूँ पहली वंदना, दाई-बाबू मोर।

‎गुरु ला दूसर वंदना, ज्ञान करय अंजोर।।

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‎हेम के कुण्डलियाँ

‎करलौ पहिली वंदना, गुरु सम हे भगवान।

‎गुरु देवय हमला ज्ञान, धरलौ ओखर ध्यान।।

‎धरलौ ओखर ध्यान, सही रद्दा देखाही।

‎सबो ईरखा फेंक, ज्ञान के अलख जगाही।।

‎कहय हेम कविराय, बात ला गुरु के सुनलौ।

‎जिनगी होही पार, वंदना गुरु के करलौ।।

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‎रचनाकार – हेमलाल साहू

‎गाँव – गिधवा, जिला – बेमेतरा (छ.ग.)

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तुरते ताही

धरहूँ माटी भेस 🌿

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