7 अक्टू॰ 2015

जय महामाया दाई ( हेम के चौपाई छंद)

‎ जय माहामाया दाई।

‎जय जय माहामाया दाई।
‎विनती सुनले मोरो माई।
‎तँय तरिया के पार विराजै।
‎सोन के मुकुट हवय सुहाजै।।।

‎नर नारी महिमा ला गावय।
‎दाई सबला संबल बाटय।
‎आवय सब जन तोर दुआरी।
‎संकट-विपदा हर लेथस सारी

‎दुर्गा काली लक्ष्मी दाई।
‎सब जन बर हवस सहाई।
‎सबो पुकारे ज्ञानी ध्यानी।
‎तोर नाव ले माता रानी।।

‎सब जन के तैं महतारी।
‎दीन दुखी मन के रखवारी।
‎जग मा सबसे हावस न्यारी।
‎हे गौरी अम्बे राज दुलारी।।

‎रचनाकार - हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा


‎गणपति वंदना‎(हेम के सरसी छंद)‎

‎गणपति वंदना
‎(हेम के सरसी छंद)
‎गूँजत हावय जयकारा,
‎गणपति बाबा तोर।
‎साँझ बिहनिया ले पूजा के,
‎मचथे भारी सोर।।
‎भादो मास शुक्ल चउथी मा,
‎धरिस जगत अवतार।
‎बुद्धि-शक्ति के दाता गणपति,
‎जग के तारनहार।।
‎शिव शंकर अउ उमा पार्वती,
‎दाई-बाबू तोर।
‎एकदंत अउ दयावंत हा,
‎पहिली पूजा तोर।।
‎सजे-धजे गद्दी मा बइठे,
‎किसम-किसम के रंग।
‎गाँव-गाँव अउ गली-गली मा, 
‎रमथे मुसवा संग।।
‎हाथी कस लम्मा सूँड़ हवे,
‎बड़का भारी पेट।
‎भोग लगे लड्डू-मोदक के,
‎चढ़े मया के भेंट।।
‎करथें सेउक सेवा मन ले,
‎बाजय मंजीरा-ढोल।
‎गणपति के महिमा ला गावैं,
‎मन के आपा खोल।।
‎सुरता के गठरी ला राखँव,
‎बाँध मया के गाँठ।
‎रिद्धि-सिद्धि संग तोर चरनन,
‎करहूँ पूजा-पाठ।।
‎आके हरबे गणपति बाबा,
‎सब्बो पीरा मोर।
‎कोरी-कोरी नरियर-खीरा,
‎तोला चढ़ावँ जोर।।
‎रचनाकार — हेमलाल साहू 
‎गाँव–गिधवा, जिला–बेमेतरा (छ.ग.)

6 अक्टू॰ 2015

‎गुरतुर बोली के मया‎‎— हेम के रोला छंद —‎

‎गुरतुर बोली के मया
‎— हेम के रोला छंद —
‎तरिया-नदिया तीर, गूँजथे हँसी-ठिठोली।
‎मया भरिस संसार, मोह ले गुरतुर बोली।।
‎बसगे मुखड़ा तोर, मया ला करथस भारी।
‎नैना भीतर रोज, तोर झलकय उजियारी।।
‎बोली गुरतुर तोर, मोर हिरदे धड़कावय।
‎चंदैनी कस रूप, देख नयना मोहावय।
‎चंदा के अंजोर, परे ले मन अकुलावय।
‎अंतस पीरा जाग, तोर सुध रोज सतावय।।
‎रचनाकार – हेमलाल साहू
‎गाँव – गिधवा, जिला – बेमेतरा
‎गुरतुर बोली के मया, महके पसरा गंध।
‎लिखथौं माटी रंग ले, मोर मयारू छंद।।

तुरते ताही

‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद)‎

‎हास्य कविता  ‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद) ‎ ‎एक्के झन हे मोर मयारू, सुरता आवय रतिया। ‎सुनलव मोर मया के किस्सा, नाव हवे फुलमतिया।। ‎ ...