4 जून 2016

कलजुग (हेम के दोहे)

कलजुग माया जान के, फूँक फूँक रख पाँव।

आही हमरो काल तौ, नइ मिलही जी ठाँव।।


सबले बड़का काल हे, हवय समय के मान।

कतको जीव छुपाय तँय, बाँचय नही परान।


भेस धरे साधू हवै, चोला पहिर सफेद।

करै दिखावा कोकड़ा, का जानव गा भेद।।


कलजुग के परताप ये, रखथें मन मा बैर।

भाई भाई दुश्मनी, नइये ककरो खैर।।


कायर मन मा हे भरे, रखे जहर ला डार।

सोच समझ के सँग रहौ, देवत हे फुफकार।।

-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

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