30 अप्रैल 2016

आवव संगी

आवव संगी मिलके करबोन काम।
छत्तीसगढ़ माटी के बढ़ाबोन नाव।।
मिलके करबोन हमन अइसन काम।
रही देश दुनिया मा हमरो गा नाव।
आवव संगी............

छत्तीसगढ़ भुईया मा करबोन काम।
बनाबोन संगी सरग जइसन गांव।।
बेटी बेटा ला पढ़ाये के करबो काम।
पढ़े लिखे शिक्षित हमरो रही गांव।
आवव संगी.................

अपन धरोहर के करबोन सम्मान।
देश दुनिया मा सदा रही गा नाव।
हवे सदा गा माटी के मोरे किसान।
परथे जेह सदा भुईया दाई के पाव।
आवव संगी.............

28 अप्रैल 2016

हेम के दोहे

भुइँया हर कतका जरे, फेकत हावे भाप।

सूरज उगले आग ला, गरमी मा दे झाप।।


सबो डहर गरमी बढ़े, जरथे भारी पाँव।

जीव सबो खोजत हवे, कौन मेर हे ठाँव।।


तरिया नदिया सूख गे, नइहे एको बूँद।

सबो जीव तरसे इहाँ, खोजत आँखी मूँद।।


मनखे मन समझे नहीं, रुख राई ला काँट।

मिले नहीं अब छाँव हर, कउनो रद्दा बाँट।।


कहना मोरो मानलव, लगाबोन रुख आँव।

सुख से गाड़ी हर चले, मिलही सबला छाँव।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

22 अप्रैल 2016

गरमी (हेम के चौपाई छंद)

ऐदे गरमी के दिन आगय। सबो डहर ये घाम जनावय।

झांझ म तन हर लेसावय। देख पसीना हर चुचवावय।


रूख राई के छाँव सिरागय। भुइँया मा दर्रा हा फाटय।

पानी बिन जीव सबो रोवय। काम बिना पानी नइ होवय।


नदिया नरवा सबो सुखागय। देख घाम ला जी थर्रागय।

घाम नहीं कउनो ला भावय। भुइँया देख जरत बड़ हावय।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

17 अप्रैल 2016

बदलाव नवा लाबोन

चल संगी बदलाव नवा लाबोन।
चल संगी नवयुवक ल जगाबोन।।

नवा जवाना के नवा रद्दा ला।
चल संगी हमन हा दिखाबोन ।।
चल संगी .............

पढ़बो लिखबो अऊ हमन पढ़ाबोन।
सुघ्घर पढ़ा लिखा के जगाबोन।।

देश ला जागरूक अपन बनाबोन।
शिक्षित समाज ला हमन लाबोन।।
चल संगी................

मया दया के भाव सदा राखबोन।
मिलके रद्दा मा अपन चलबोन।।

झन गढ़य ककरो पाव मा काँटा।
अइसन रद्दा ला अपन बनाबोन।।
चल संगी...............

जतन अपन माटी के करबोन।
अपन बोली भाखा ला बोलबोन।।

छत्तीसगढ़ के किसनहा माटी मा ।
चल संगी हमन सरग ला बनाबोन।।
चल संगी.....................

8 अप्रैल 2016

जेवारा

जेवारा

नवदिन बर आगे हवय, देख नवरात तोर।
जेवारा बोयेव घर, मात बिराजव मोर।।

जेवारा दाई हवय, नवदिन घर मा मोर।
सेवा दाई के करव, भक्ति भाव ला जोर।।

पान फूल नरियर धरे, हाथ चढ़ाये जोर।
सदा रहे आशीष हा, देवव दाई तोर।।

अड़हा गरीब मे हवव, सेवा ल करव तोर।
भूल चूक माफ करहव, जोरेव हाथ जोर।।

हेमलाल साहू

6 अप्रैल 2016

जय गुरु घसीदास

जय गुरु घासीदास बाबा
जय जय हो गुरु घासीदास।
तोरे शरन आयेव बाबा
तोरे चरन मा तोरे पास।

तोरे महिमा ला बाबा गायेव
तोरे महिमा ला सुनायेव।
सुने हव बाबा तोर महिमा
हावे जग मा गा भारी।

अड़हा बइला ला बाबा
बनाये बाबा गुनकारी।
महू हवव निचट अनारी
महू ला बनादे गुनकारी।
जय गुरु ..................

छाता पहाड़ में बैठ के
बाबा तै धुनी ला रमाय।
अवरा धवरा पेड़ मेर
बाबा ज्ञान ला तै पाये
महू हवव अनपढ़ अज्ञानी
महू ला बना दे बाबा ज्ञानी
जय गुरु ..............................

मरे मनखे मा बाबा तैहा
प्रान के दीपक जलाये
बन मा रहिके बाबा तैहा
शेर भालू ल साथी बनाये
जय गुरु....................

सत्य के रद्दा में चलके
बाबा तैय ज्ञान ला पाये।
सत्य के नाम ला बाबा
तैय हा जग में फैलाय
सतनाम धरम के पंत ला
बाबा तैय जग मा चलाये
जय गुरु…..................

-हेमलाल साहू

2 अप्रैल 2016

होली तिहार (हेम के दोहे)

होली देख तिहार ला, सब्बो गाँव मनाय।

लिपे पुते घर मन हवे, सुघ्घर रौनक लाय।।


फागुन के महिना हवे, होली आय तिहार।

दहन होलिका बाद ही, खुशियाँ दे भरमार।।


सच के रद्दा मा चले, होय नही जी हार।

सुरता कर पहलाद ला, सच रद्दा के सार।।


होली हर आगे हवे,  उड़थे रंग गुलाल।

जगा जगा मा देख ले, बजे नगाड़ा ताल।।


फाग गीत ला गात हे, नाचत हावय यार।

संगी साथी मिल बने, हवे मनात तिहार।।


घर घर जाके चल बने, लगाबोन जी रंग।

मिलही आशीर्वाद हा, छोट बड़े के संग।।


मया दया के भाव धर, रंग लगा ले गाल।

धरती के बेटा हरन, उड़ाबोन ग गुलाल।।


सुघ्घर होली रंग हे, देख देख मन भाय।

ये होली के रंग मा, जम्मो झन पोताय।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

मेचका मेचकी( हेम के दोहे)

कहिस मेचका मेचकी, चल जाबो बाजार।

घर ले धर झोला चले, बैठ साइकिल यार।।


देख साइकिल ला चाल, जावत हावय हाट।

ट्रीन ट्रीन घण्ठी बजय, मनखे देखय बाँट।।


कहे मेचका तँय देख जी, मोरो एक कमाल।

हावँव अस्सी साल के, नइ हव फेर अलाल।।


कहिस मेचकी धीर ले, चला मेचका मोर।

जाबो कोनो मेर गिर, लग जाही जी थोर।।


देख मेचका मेचकी, जल्दी पहुँचे हाट।

हवे मेचकी मेचका, खूब ठाठ अउ बाट।।


करिस मेचका मेचकी, खूब घूम बाजार।

लागय संगी भूख ता,  खावय मुर्रा यार।।


दूनो कतको चीज लिस, खाये बर सम्मान।

नाती बर खाऊ धरिस, आइस दूनो जान।।


थके मेचका हा रहे, पैडल ना चल पाय।

देख साइकिल बाँट मा, बड़ भारी डोलाय।


देख डोकरी डोकरा, दूनो गिरे उतान।

कहिस मेचका मेचकी, होंगेन बुढ़ा जान।।



-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

20 मार्च 2016

होली (हेम के कज्जल छन्द)

आगे हे होली तिहार।

चलव मनाबो सबो यार।

मोर कामना शुभ हजार।

खुशी मिले सबला अपार। 


रंग खेलबो हमन लाल।

चलव लगाबो रंग गाल।

पिचकारी मा रंग डाल।

धर धरके जाबो गुलाल।



होली जम्मो खेल आय।

रंग मया के हे लगाय।

मुखड़ा मा रंग पोताय।

होली सबला हवे भाय।


-हेमलाल साहू

ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

19 मार्च 2016

तुलसी(हेम के दोहे)

रख तुलसी घर अंगना,  पूजा करथे लोग।

तुलसी के महिमा हवे, काया करे निरोग।।


तुलसी जब घर मे रहे, तब लक्ष्मी हा आय।

घर मा खुशयाली रहे, आनंद उर समाय।।


नाम अमर तुलसी हवे, जब तक हे संसार।।

तुलसी पूजा जे करय, हावय भव ले पार।।


-हेमलाल साहू

ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

18 मार्च 2016

मोला देवय ज्ञान (हेम के दोहे)

जम्मो झन गुरु जस हवे, मोला देवय ज्ञान।

भइया कहय रमेश हा, देबे बढ़िया ध्यान।।


मोला अड़हा जोजवा, सँगवारी हो जान।

पाके मँय आशीष ला, मँय बनहूँ विद्वान।।


छोटे सबले मँय हवँव, करहूँ रचना यार।

एक ले बड़े एक हे, जग मा रचनाकार।।

-हेमलाल साहू

ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

13 मार्च 2016

बस्तर (हेम के कज्जल छन्द)

देखव गा बस्तर हमार।

सुघ्घर बस्तर हवे यार।

रुख राई हे भरमार।

भरे सम्पदा हे अपार।


हवे आदिवासी ह जान।

सीधा साधा ग पहचान।

मीठ मीठ हावय जुबान।

पहुना के करय सम्मान।


फेर नक्सली इहाँ आय।

बंदूक धरे अउ चलाय।

ये खूब अशांति फैलाय।

मारत ये जनता ल जाय।


- हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

12 मार्च 2016

हेम के हाइकू

सुन ले छोरी

हवच अलबेली

गाँव के गोरी


ये मोर रानी।

तोर संग ओ गोरी

हे मया टूरी


जबले आय

मोर मन ला भाय

सुरता आय


मया के रंग

चढ़ गे तोर संग

दूनो के रंग


- हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

3 मार्च 2016

सुनव मोर संगी (हेम के कज्जल छंद)

सुनव मोर संगी मितान।

हमर देश के तँय किसान।

मोरे भुइँया के सब जवान।

छत्तीसगढ़ बनाबो महान।


घर घर मा हमन जाबोन।

सोये मन ला जगाबोन।

चलव नवा जोश लाबोन।

अपन देश ला बचाबोन।


मया दया ला राखबोन।

मुख भाखा ला बोलबोन।

अपन लाज ला राखबोन।

जुरमिल के हमन चलबोन।


नव रद्दा आँव गढ़बोन।

सरग गाँव ला बनाबोन।

झूठ लबारी मिटाबोन।

सच के दीया जलाबोन।


- हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

28 फ़र॰ 2016

मन के आपा खोल (हेम के चौपई छंद)

मन के आपा ला तँय खोल। सुघ्घर गुरतुर बोली बोल।

मन ला पहली अपन टटोल। बढ़िया अमरित बानी घोल।।


मया दया ला सुघ्घर राख। सत रद्दा के रखले साख।

दान धरम ला करले पोठ। मया दया के करके गोठ।।


धरम करम ला संगी जान। सरग नरग हावय तँय मान।

काम पूण्य के करव मितान। मिलही तोला जी भगवान।।


- हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

27 फ़र॰ 2016

‎झन पीयव भैया शराब। (हेम के कज्जल छंद)

‎हेम के कज्जल 

‎झन पीयव भैया शराब।

‎झन पीयव भैया शराब।

‎बात मान ले गा जनाब।

‎जिनगी हो जाथे खराब।

‎पीये के झन राख ख्वाब।।

‎गोड़ देख ले लड़खड़ात।

‎मुँह ले निकले अबड़ बात।

‎करजा बोझा बढ़त जात। 

‎सबले गारी हवय खात।

‎करथे नित गोहार हेम।

‎करबे परिवार ले प्रेम।

‎दारू के तँय छोड़ नेम।

‎खुशियाँ रहिबे सबो टेम।।

‎रचनाकार -हेमलाल साहू 

‎गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा 

26 फ़र॰ 2016

सबले बढ़िया(हेम के सरसी छंद)

सबले बढ़िया छत्तीसगढ़िया, इही तोर पहचान।

खेत खार के सेवा करथस, कहिथे जगत किसान।।


माटी के पूजा ला करथस, माटी करत बखान।

भुइँया हे भगवान तोर गा, बइला हवय मितान।।


सीधा साधा भोला भाला, सादा हवय लिवाज।

धरती के सेवा ल बजावत, करथस रोजे काज।।


किसम किसम के चिरई चुरगुन, रुख राई अउ झाड़।

लागय अड़बड़ हमला निक गा, बड़का छोट पहाड़।।


सुघ्घर नदिया नरवा हावे, बहिथे निरमल धार।

पानी मा मिठास बड़ हावय,  पी ले बारम्बार।।


भरे अन्न के भंडार हवे, जग ला करथे दान।

मया दया के भुइँया हावे, बसे इहाँ भगवान।।


छत्तीसगढ़ी गुरतुर बोली, सुघ्घर लागय गोठ।

बड़ सुघ्घर हे मोरो भाखा, हावय सबले पोठ।।


जियत मरत ले गुण ला गाथे, माटी करत प्रणाम।

सबले बढ़िया छत्तीसगढ़िया, जपे जिहाँ प्रभु राम।।

-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)


20 फ़र॰ 2016

चल रे संगी

चल रे संगी चल रे साथी। बनके दुश्मन बर तँय हाथी।

अपन करम मा किस्मत गढ़बो। सुघ्घर सत के रस्ता चढ़बो।


जतन ददा दाई के करबो। गुरु के बताय रद्दा चलबो।

कठिन साँच के रद्दा हावय। करम करइया के मन भावय।।


सच के रद्दा सरग दिखावय। नरक पाप के रद्दा जावय।

चले करम के लेखा जोखा। मिलथे फल हर सबला चोखा।।


-हेमलाल साहू 

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)


19 फ़र॰ 2016

माटी(हेम के दोहे)

माटी मिलके तन बने, जिनगी इहे पहाय।

माटी के सेवा करत, सुघ्घर भाग जगाय।।


जियत मरत ले मँय सदा, माटी माथ लगाव।

जनम जनम के साथ हे, माटी ला अपनाव।।

-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा

तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)


17 फ़र॰ 2016

दोगला ( हेम के दोहे)

लाठी हा ताकत हवे, पइसा हा अभिमान।

राज करत हे दोगला, बनके जस शैतान।।


लबरा के आदर हवे, उहि हर पूजे जाय।

कलजुग के दुनिया हवे, पापी नाँव कमाय।।


मिलथे पैसा झूठ मा, सच बोले मा मार।

मिले नहीं मनखे सही, ढूंढत रह संसार।।


सीधा रुख काँटे सबे, छोड़ टेड़गा जाय।

देख सीधवा हा कहे, राज दोगला आय।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

हे मोर महामाया दाई

हे मोर महामाया दाई।
सुन ले तैहा पुकार माई।।

गोहार लगावत हव दाई।
सुन ले अरज मोर माई।।

तही मोर महतारी दाई।
रक्छा करव हे मोर माई।।

मोर आँसू  पोछ दे दाई।
दुःख पीरा उबार माई।।

पापी अज्ञानी हवव दाई।
तोरे सरन आयेव माई।।

बल, बुध्दि ल दे देवव दाई।
मोला जग तारव हे माई।।

13 फ़र॰ 2016

मँय छत्तीसगढ़िया आँव

होत बिहनिया उठके भइया, रामे नाँव जपइया आँव।

उठती बेरा के पाँव परइया, मँय छत्तीसगढ़िया आँव।।


मँय खाँटी किसान के बेटा, भुइँया जतन करइया आँव।

दुनिया के पालन ल करइया, मँय छत्तीसगढ़िया आँव।।


बासी चटनी नून खवइया, नित जाँगर पेरइया आँव।

सीधा साधा भोला भाला, मँय छत्तीसगढ़िया आँव।।


मया दया के गोठ करइया, निक बानी बोलइया आँव।

दाई बाबू के रोज कहइया, मँय छत्तीसगढ़िया आँव।।


इहि माटी मा सदा रहइया, धरती गान करइया आँव।

दान धरम के करम करइया, मँय छत्तीसगढ़िया आँव।।


चिरई चुरगुन मोर संगवारी, माटी मान बढ़इया आँव।

सुख दुख मा सँग के देवइया, मँय छत्तीसगढ़िया आँव।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा (छ. ग.)

दोगला राज (हेम के कज्जल छंद)

‎हेम के व्यंग्य बान 

‎करय दोगला इहाँ राज। 

‎दू नम्बर ले बढ़य काज।

‎कुर्सी बर बेचथे लाज।

‎नोचय जन के मूल ब्याज।

‎बड़का घूमय इहाँ चोर।

‎शासन बनगे घूसखोर।

‎सच के नइहे इहाँ ठौर।

‎पैसा के दम चलय दौर।।

‎देखत तँय चलबे सियान।

‎मीठा गोठ जहर के बान।

‎मायाजाल ला पहिचान।

‎लूटत हावय बईमान।।

‎झूठ बने सच गा मितान।

‎सच ला मानय झूठ जान।

‎इहाँ सही के न पहचान।

‎सत्ता हर हवय भगवान।।

‎रचनाकार : हेमलाल साहू

‎गाँव : गिधवा, जिला : बेमेतरा


25 जन॰ 2016

नवा साल (हेम के कज्जल छंद)


नवा साल नवा अँजोर।
बगरत हावे गली खोर।
सुघ्घर बाढ़य मया तोर।
बधई हे नव साल मोर।

सब दुख पीड़ा ला मिटाय।
जिनगी मा सुख फेर आय।
बढ़िया नव संदेश लाय।
सबला हे नव साल भाय।

चलव जोर ला लगाबोन।
अमन देश मा जगाबोन।
चोर उचक्का भगाबोन।
सत के रस्ता बताबोन।

बनहूँ झन कोनो अलाल।
कभू काम झन देव टाल।
जाँगर पेर करव कमाल।
आगू जाबो नवा साल।

कहिथे भाई तोर हेम।
करले बढ़िया प्रकृति प्रेम।
छोड़ वीडियो सबो गेम।
करव मेहनत होय नेम।।

बने रहे नव साल तोर।
मिल मनाबो संगी मोर।
मया दया ला आँव जोर
बधई भेजत हवव सोर।।

-हेमलाल साहू 
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा (छ. ग.)

9 दिस॰ 2015

संत गुरु घासीदास (आल्हा छंद)

















संत महात्मा ये भुइँया के, सुघ्घर लाइस नवा उजास।
माता रहिस हवे अमरौतिन, ददा रहिस हे महँगू दास।

माह दिसम्बर रहिस अठारह, सन सतरा सौ छप्पन जान।
लेइस घासीदास जन्म ला, मनखे बर बनके भगवान।।
 
बाबा सत के रहिस पुजारी, बनिस गिरौदपुरी हा धाम।
होगिस हावय पावन भुइँया, सबो डहर गूँजय सतनाम।।

बाबा तँय अड़हा बइला मा, सुघ्घर गुन हवस जगायेंव।
काँटे साप बुधारू ला ता, करके चमत्कार जियायेंव।।

बइठे छाता के पहाड़ मा, बाबा अपन धुनी ला रामाय।
सत रद्दा मा चलके बाबा, नाम जगत मा सत फैलाय।।

अवरा धवरा पेड़ मेर तँय, बइठ ज्ञान ला सुघ्घर पाय।
मनखे मनखे समान हे कहि, भेद भाव ला हवस मिटाय।।

माह दिसम्बर अमर जयंती, गाँव गाँव मा तोर मनाय।
जैतखाम हा तोर निसानी, सत के झण्डा ला फहराय।

-हेमलाल साहू 
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा (छ. ग.)

‎हेम के दोहे ‎‎बिहान के उजियार‎

‎हेम के दोहे 

‎बिहान के उजियार

‎चीं चीं होत बिहान ले, चिरई करत पुकार।
‎उगत हे सुरुज देवता, झटकन आँख उघार।।

‎भोर बिहान मनखे कहें, जय जय सीताराम।
‎उवत सुरुज ला देखके, सब करथे परनाम।।

‎जल्दी करहूँ काम ला, टारव झन इक काम।
‎भाग्य मेहनत ले बने, आलस ले बदनाम।।

‎रचनाकार-हेमलाल साहू
‎गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा

 

गुरुवर (हेम के दोहे)

 देवय गुरु आशीष ला, लेलव बढ़िया ज्ञान।
जिनगी हो जाही सुखी, करले गुरु के ध्यान।।

सच्चा गुरुवर जौन हे, चेला ना भटकाय।
मन के दुविधा दूर कर, शंका दूर भगाय।।

गुरु अच्छा तँय बना, मन मा सोच बिचार।
जिनगी के नइया लगे, भवसागर से पार।।

गुरुवर कहना मान ले, भटकच नहीं सियान।
मानुष तन तोला मिले, झन कर गरब गुमान।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा (छ. ग.)

‎🌼 हेम के दोहे 🌼‎दाई-ददा वंदना

‎🌼 हेम के दोहे 🌼
‎दाई-ददा वंदना 
‎दाई बाबू मानथौ, तोला मँय भगवान।
‎जग मा सबले बड़ हवे, तोर मया वरदान।।
‎करहूँ सदा प्रणाम मँय, अपन हाथ ला जोर।
‎चारो तीरथ धाम अस, पूजंव चरन तोर।।
‎पहिली गुरु दाई ददा, खोलय ज्ञान दुआर।
‎सीख देय संस्कार के, मिटथे मन अँधियार।।
‎रचनाकार -हेमलाल साहू
‎गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा 

लुवई मिसई (हेम के दोहे)

कार्तिक अघ्घन पूस मा, लुवई मिसई आय।

मिले नहीं आराम हा, कसके रोज कमाय।।


धरके जावय हंसिया, खेत लुये ला धान।

पाही पाही धर लुये, करपा माढ़य घान।।


पूरा लाने धान के, डोरी गजब बनाय।

करपा लान सकेल के, बोझा बाँध बनाय।।


बइला गाड़ी धान भर, बोझा बोझा जोर।

मेड़ पार ला खेत के, लावन रावन फोर।।


गाड़ी ला कोठार मा, लान खड़ा कर तीर।

सुघ्घर खरही गाँज ले, मढ़ा मढ़ा के धीर।।


छोल चाच चतवार के, सुघ्घर हवे बनाय।

खवरावय कोठार झन, गोबर लेप चटाय।।


गोबर पानी डार के, लिप ले तँय कोठार।

झेल कलारी हाथ मा, पैर धान के डार।।


बेलन अउ दवरी चले, बइला ला खेदार।

बीच बीच मा कोड़ के, बने धान ला झार।।


पैरा सबो निकाल के, गोल गोल के गाँज।

पैरावट सुघ्घर दिखे, रखले भइया साज।।


जम्मो धान सकेल के, एक जगा मा लान।

पँखा लगा के तँय उड़ा, बाचय दाना धान।।


बोरा भरके धान ला, घर के कोठी डार।

लक्ष्मी के पूजा करें, घर भर दे भण्डार।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा (छ. ग.)

7 अक्टू॰ 2015

जय महामाया दाई ( हेम के चौपाई छंद)

‎ जय माहामाया दाई।

‎जय जय माहामाया दाई।
‎विनती सुनले मोरो माई।
‎तँय तरिया के पार विराजै।
‎सोन के मुकुट हवय सुहाजै।।।

‎नर नारी महिमा ला गावय।
‎दाई सबला संबल बाटय।
‎आवय सब जन तोर दुआरी।
‎संकट-विपदा हर लेथस सारी

‎दुर्गा काली लक्ष्मी दाई।
‎सब जन बर हवस सहाई।
‎सबो पुकारे ज्ञानी ध्यानी।
‎तोर नाव ले माता रानी।।

‎सब जन के तैं महतारी।
‎दीन दुखी मन के रखवारी।
‎जग मा सबसे हावस न्यारी।
‎हे गौरी अम्बे राज दुलारी।।

‎रचनाकार - हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा


तुरते ताही

‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद)‎

‎हास्य कविता  ‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद) ‎ ‎एक्के झन हे मोर मयारू, सुरता आवय रतिया। ‎सुनलव मोर मया के किस्सा, नाव हवे फुलमतिया।। ‎ ...