देखव गा बस्तर हमार।
सुघ्घर बस्तर हवे यार।
रुख राई हे भरमार।
भरे सम्पदा हे अपार।
हवे आदिवासी ह जान।
सीधा साधा ग पहचान।
मीठ मीठ हावय जुबान।
पहुना के करय सम्मान।
फेर नक्सली इहाँ आय।
बंदूक धरे अउ चलाय।
ये खूब अशांति फैलाय।
मारत ये जनता ल जाय।
- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)
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