13 मार्च 2016

बस्तर (हेम के कज्जल छन्द)

देखव गा बस्तर हमार।

सुघ्घर बस्तर हवे यार।

रुख राई हे भरमार।

भरे सम्पदा हे अपार।


हवे आदिवासी ह जान।

सीधा साधा ग पहचान।

मीठ मीठ हावय जुबान।

पहुना के करय सम्मान।


फेर नक्सली इहाँ आय।

बंदूक धरे अउ चलाय।

ये खूब अशांति फैलाय।

मारत ये जनता ल जाय।


- हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

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