28 अप्रैल 2016

हेम के दोहे

भुइँया हर कतका जरे, फेकत हावे भाप।

सूरज उगले आग ला, गरमी मा दे झाप।।


सबो डहर गरमी बढ़े, जरथे भारी पाँव।

जीव सबो खोजत हवे, कौन मेर हे ठाँव।।


तरिया नदिया सूख गे, नइहे एको बूँद।

सबो जीव तरसे इहाँ, खोजत आँखी मूँद।।


मनखे मन समझे नहीं, रुख राई ला काँट।

मिले नहीं अब छाँव हर, कउनो रद्दा बाँट।।


कहना मोरो मानलव, लगाबोन रुख आँव।

सुख से गाड़ी हर चले, मिलही सबला छाँव।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

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