9 दिस॰ 2015

‎हेम के दोहे ‎‎बिहान के उजियार‎

‎हेम के दोहे 

‎बिहान के उजियार

‎चीं चीं होत बिहान ले, चिरई करत पुकार।
‎उगत हे सुरुज देवता, झटकन आँख उघार।।

‎भोर बिहान मनखे कहें, जय जय सीताराम।
‎उवत सुरुज ला देखके, सब करथे परनाम।।

‎जल्दी करहूँ काम ला, टारव झन इक काम।
‎भाग्य मेहनत ले बने, आलस ले बदनाम।।

‎रचनाकार-हेमलाल साहू
‎गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा

 

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