हेम के कज्जल
झन पीयव भैया शराब।
झन पीयव भैया शराब।
बात मान ले गा जनाब।
जिनगी हो जाथे खराब।
पीये के झन राख ख्वाब।।
गोड़ देख ले लड़खड़ात।
मुँह ले निकले अबड़ बात।
करजा बोझा बढ़त जात।
सबले गारी हवय खात।
करथे नित गोहार हेम।
करबे परिवार ले प्रेम।
दारू के तँय छोड़ नेम।
खुशियाँ रहिबे सबो टेम।।
रचनाकार -हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा
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