27 फ़र॰ 2016

‎झन पीयव भैया शराब। (हेम के कज्जल छंद)

‎हेम के कज्जल 

‎झन पीयव भैया शराब।

‎झन पीयव भैया शराब।

‎बात मान ले गा जनाब।

‎जिनगी हो जाथे खराब।

‎पीये के झन राख ख्वाब।।

‎गोड़ देख ले लड़खड़ात।

‎मुँह ले निकले अबड़ बात।

‎करजा बोझा बढ़त जात। 

‎सबले गारी हवय खात।

‎करथे नित गोहार हेम।

‎करबे परिवार ले प्रेम।

‎दारू के तँय छोड़ नेम।

‎खुशियाँ रहिबे सबो टेम।।

‎रचनाकार -हेमलाल साहू 

‎गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा 

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