माटी मिलके तन बने, जिनगी इहे पहाय।
माटी के सेवा करत, सुघ्घर भाग जगाय।।
जियत मरत ले मँय सदा, माटी माथ लगाव।
जनम जनम के साथ हे, माटी ला अपनाव।।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)
जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
धरके माटी भेस 🌿 चिमनी के बाती कस जरके, अँधियार ला हरावँ। दया-मया के आखर भर के, सबके बात सुनावँ।। छत्तीसगढ़ी के माटी मा, अपन पसीन...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें