जय माहामाया दाई।
जय जय माहामाया दाई।
विनती सुनले मोरो माई।
तँय तरिया के पार विराजै।
सोन के मुकुट हवय सुहाजै।।।
नर नारी महिमा ला गावय।
दाई सबला संबल बाटय।
आवय सब जन तोर दुआरी।
संकट-विपदा हर लेथस सारी
दुर्गा काली लक्ष्मी दाई।
सब जन बर हवस सहाई।
सबो पुकारे ज्ञानी ध्यानी।
तोर नाव ले माता रानी।।
सब जन के तैं महतारी।
दीन दुखी मन के रखवारी।
जग मा सबसे हावस न्यारी।
हे गौरी अम्बे राज दुलारी।।
रचनाकार - हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा
जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
7 अक्टू॰ 2015
जय महामाया दाई ( हेम के चौपाई छंद)
तुरते ताही
धरहूँ माटी भेस 🌿
धरके माटी भेस 🌿 चिमनी के बाती कस जरके, अँधियार ला हरावँ। दया-मया के आखर भर के, सबके बात सुनावँ।। छत्तीसगढ़ी के माटी मा, अपन पसीन...
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