18 मार्च 2016

मोला देवय ज्ञान (हेम के दोहे)

जम्मो झन गुरु जस हवे, मोला देवय ज्ञान।

भइया कहय रमेश हा, देबे बढ़िया ध्यान।।


मोला अड़हा जोजवा, सँगवारी हो जान।

पाके मँय आशीष ला, मँय बनहूँ विद्वान।।


छोटे सबले मँय हवँव, करहूँ रचना यार।

एक ले बड़े एक हे, जग मा रचनाकार।।

-हेमलाल साहू

ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

कोई टिप्पणी नहीं:

तुरते ताही

‎(हेम के हास्य कविता) ‎महँगाई के हाट‎

‎हेम के हास्य कविता  ‎महँगाई के हाट ‎ ‎लम्बा लिस्ट धराके बाई, ‎भेजिस मोला हाट। ‎जेब टटोलत पैसा गिनतें, ‎निकरेंव अपन बाट।। ‎ ‎पहिली गे हौं पत...