20 जन॰ 2017

हेम के कुण्डलिया

जाड़ा

आगे दिन हा जाड़ के, सबके मन ला भाय।
ओढ़व चादर साल ला, सुघ्घर जाड़ा आय।।
सुघ्घर जाड़ा आय, बनालव बढ़िया सेहत।
तन मन होवय पोठ, मजा जाड़ा के लेवत।।
तापव भूरी बारके, जाड़  हा  जावय  भागे।
काँपत हाथे गोड़ हा, जाड़ के दिन हा आगे।।

औंधी
जावय  राहर  ला  रखै, मिलके  संझा बेर।
दूसर के  ला  ओ करै,  खूब हेर अउ फेर।।
खूब हेर अउ फेर,  टोर  राहर  ला  लावय।
औंधी ऊसन खात, मजा मौसम के हावय।।
ताकत हे रखवार, चोर  ला  नइ तो  पावय।
लइका अऊ सियान, रखै ला राहर जावय।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

गाँव (उल्लाला छंद)

सुघ्घर हावे गाँव हा, मिलै मया के छाँव हा।
खेत खार के ठाँव हे , गिधवा मोरे गाँव हे।।

चिरई चिरगुन हा रहै, बोल मया के ओ कहै।
नवरा नदिया हा भरै, झरझर झरझर ओ करै।।

रुख राई हरियर रहै, निरमल पुरवइया बहै।
सबो डहर ए गाँव हे, बर पीपर के छाँव हे।।

पहुना हे भगवान गा, रहिथे जिहाँ किसान गा।
बइला हवै मितान गा, गइया मात समान गा।।

सुरता आथे गाँव हा, जिहाँ मिलै ए नाँव हा।
गोठ करत ए हेम गा, रखव गाँव बर प्रेम गा।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

8 जन॰ 2017

पुतरी पुतरा (रोला छन्द)

करथे लीला देख, बना के हमला पुतरी।
लीलाधर के हाथ, रहै लगाम के सुतरी।।
माया के ए जाल, देख नइ पाये आँखी।
हावे आत्मा अमर, भरै बिद्या के साखी।।

सुघ्घर खेलन खेल, रहै  भइया  ठठ्ठा  के।
संगी साथी साथ, सबो  पुतरी   पुतरा के।।
आगे मोला समझ, बने जिनगी आत्मा के।
आथे बचपन याद, बने  पुतरा  कुरता के।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

माया (उल्लाला छंद )

मन अपने  काबू रहै, बड़े  बड़े  ज्ञानी कहै।

सबो डहर बइरी खड़ै, भाई से भाई लड़ै।।


मन मा माया हा भरै, मानव  ओकर  से परै।

फइले माया जाल हा, देखत हावय काल हा।


फसगे मनखे भोग मा, छुटकारा ना रोग मा।

हावे आत्मा अमर गा, जानव माया जहर गा।।


मन के आँखी खोल ले, मया प्रीत ला बोल ले।

मन के माया छोड़ ले, जग से नाता जोड़ ले।।


-हेमलाल साहू 

ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा

तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ.ग.) 

6 जन॰ 2017

सुरता(रोला छन्द)

बाँधे  गठरी  खोल, धराये  जेमा  सुरता।।
लमा मया ला तोर, रहै जेमा मन सुमता।।
हाँसी खुसी रहाय,  मया के बोहय गंगा।
सुरता मा बल आय, होय संगी मन चंगा।।

कुदरत के ए रंग, रहै  भुइँया  मा हरियर।
अहंकार ला छोड़, होय मन तोरे फरियर।।
मया सबो बर राख, बाँध ले मन के सुमता।
माटी  केे  ए संग,  हवै जिनगी  के  सुरता।।

सुरता  हावय आज, हमर  दाई  के  लोरी।
जेमा हवय  बँधाय, मया के  सुघ्घर  डोरी।।
बइठन मिलके एक, सबो झन छोरा छोरी।
देवय दाई सीख, सुना के  किस्सा  लोरी।।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

4 जन॰ 2017

हेम के रोला छन्द

जगत जानही जान, छंद ला छत्तीसगढ़ी।
रखही जम्मो मान, छंद के तो नाव बढ़ी।।
पूरा सपना होय, एकदिन जग हा जानय।
भाव मया के राख, छन्द के भागे जागय।।

रीत नवा ला देख, बफा सिस्टम हा आये।
मनखे बनगे कुकुर, देख घूम घूम के खाये।।
भुलगे पंगत देख, विदेश  रीत  ला  लाये।
जुन्ना संस्कृति हमर, सबो हा देख धराये।।

भैया करहू माफ, हेम करत हवै अरजी।
मनके हावव साफ, फेर नो हव में फरजी।।
गलती  होइस  मोर, आँव  भाई  में  तोरे।
में देखत रहिगेव, दांत ला अपन  निपोरे।।

बढ़िया सोच बिचार, ममन चिंतन कर भाया।
जिनगी हावय गणित, सीख ले एकर माया।।
गुना भाग के खेल,  पून्य  जोर  अपन संगी।
हवय  मेहनत   सार,  दूर   होवय  सब  तंगी।।

बासी चटनी नून, सुनव गावत हव गरिमा।
सेहत के हे राज, देख खाके जी महिमा।।
हवै नसीहत सुनव, हेम हा सबला देवत।
खावव भैया खूब, बनय बढ़िया गा सेहत।।

बइला गाड़ी चलय, धान बोझा ह भराये।
आगू हवय किसान, किसानी गीत ल गाये।।
लाली  अऊ  सफेद, दुनो बइला हे साथी।
बइला जाँगर देख,  फ़ैल बड़े बड़े हाथी।।
नया साल के रंग, दू  हजार आय सतरा।
सोला भागे भाग, सबो टलगे अब खतरा।।
मिलने साहित्यकार, होइस हे तुर्री धामे।
पिकनिक होंगे अमर, याद में रइही नामे।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

मेला (रोला छन्द)

सुन हल्दी बाजार, रहिस राउत के मेला।
आनी बानी देख, आय रहिस इहाँ  ठेला।।
किसम किसम के लोग, रहिस हे रेलम पेला।
लेके खाये हवन, सेव बरफी अउ केला।।

सुघ्घर सजगे हवय, देख आसो के मेला।
जाबो मेला हमन, चढ़ाबो नरियर भेला।।
पाबो हम आशीष, टेकबो माथा अँगना।
दाई करबे  सफल, मोर पूरा हो सपना।।

जिनगी मेला हवय, झाँक के देखव संगी।
अंतर दरशन करव, होय मन तोरे चंगी।।
सुख दुख हावे खेल, देख तोरे जिंनगी के।
मन ला अपने ठान, मया रखले संगी के।।

देखव  मेला  रंग, सबो  डहर  हवै छाये।
लइका मन के संग, बबा हा सुग्घर जाये।।
गात प्रेम के गीत, मया ला  सुघ्घर धरके।
नाती ला देखाय,  बबा मेला  ला घुमके।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

टेटका(रोला छन्द)

पींयर हरियर लाल, रंग बदलत हे काया।
कुदरत  के  ए संग, टेटका के  हे माया।।
चाल बाज ए होय, सबो ला ए बिजराथे।
कुदरत के उपहार, मुड़ी ला ए मटकाथे।।

फेर आज ला देख, टेटका बनगे  नेता।
बदलत हावे रंग, पकड़ नई आय बेटा।।
झूठ लबारी बोल, देख  करथे  ए वादा।
चोला पहिर सफेद, बनै ए पंडित सादा।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

3 जन॰ 2017

बनव जगत के अंजोर(आल्हा छन्द)

भूतह भागे बइरी काँपै, भगत काल काली के आँव।
मारव पापी पारव काठी, का बचॉव अउ काला खाँव।

मनखे रोवत हावय भोगत, अपन करम के पाये भाग।
जइसन बोवत तइसन पावत, जिनगी मा नइ पाये जाग।।

रखै कपट ला काबर मन मा,  देख आज के सब  इंसान।
अपने खोवत अपने पावत, जगत नई पाइस पहचान।।

फसगे हे माया मा मनखे, देवय ओला कोन बताय।
ए अमर हवै आत्मा भैया, कइसे मनखे समझ न पाय।।

नहा पून्य के तँय गंगा मा,  होवय जी मन चंगा तोर।
जिनगी ला जानव भैया हो, बनव जगत के तुम अंजोर।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, 9977831273

छेरी (रोला छन्द)

लबलबही तो होय, जन्म के जानव छेरी।
चरके कतको आय, जाय फिर घेरी बेरी।
तीन रंग के होय, सफेद खैर अउ कारी।
आँखी जेकर तेज, बोल  मैं  मै के भारी।।

आमदनी हा बढ़य, करव पालन जी छेरी।
बढ़िया साधन आय, करव झन भैया देरी।।
छेरी  करव  व्यपार,  माँग  एकर  हे भारी।
काँटव  चाँदी  रोज, पाल के  छेरी  कारी।।

छेरी जेकर द्वार , भाग  जागे जी  ओकर।
दूध माँस के संग, मिलै  आमदनी ओवर।।
एक  ठने  इक्कीस, होय घर मा जी छेरी।
करय  गरीबी  दूर, बचत के हावय फेरी।।

छेरी घर  में राख, हवै भैया उपयोगी।
देख दूध अउ मूत, काम लेवय हर रोगी।।
ताकत  देवय  दूध, मूत से घाँवे मिटथे।
छेड़ी लेड़ी जाय, खेत मा ऊपज बढ़थे।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

21 दिस॰ 2016

पंथी अउ देवदास बंजारे( हेम के दोहे)

ढोलक तबला थाप मा, बाजय मांदर संग।

नाचय साधक साधके, देखव पन्थी रंग।।


बाबा घासी दास के, करथे सुघ्घर गान।

गावय महिमा देखले, गुरु के करत बखान।।


चोला पहिर सफेद गा, नाचय पंथी नाँच।

बाँधे घुँघरू गोड़ मा, गोठ करै गा साँच।।


सादा हवय लिवाज हा, सादा झण्डा जान।

सबला देवत सीख हे, मानव एक समान।।


देव दास सिरजन करे, पन्थी नाँच बिधान।

बगराइस सब देश मा, करके गुरु के गान।


-हेमलाल साहू

छन्द साधक सत्र-01

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ.ग.)

छत्तीसगढ़ के रंग(हेम के दोहे)

कोरबा

ऊर्जा के नगरी हवे, रखे अलग पहिचान।

सबला दे अंजोर गा, नाव कोरबा जान।।


आवव देखव कोयला, करिया हीरा खान।

बड़े कारखाना चलै, देखव ओकर शान।।


बिलासपुर

न्याय राजधानी बसे, रहिस बिलासा गाँव।

मिलथे सबला न्याय हा, बिलासपुर हे नाव।।


केवटिन ओ नारी सती, आय बिलासा जान।

लाज बचाये बर अपन, ओ गवाइस परान।।


रइपुर


हमर राजधानी हरे, देखव ओखर शान।

रंग भरे जग के हवे, रइपुर ला पहिचान।।


आनी बानी बोल हे, किसम किसम के लोग।

मानव के माया नगर, अपन दिखावय योग।।


मारो

मान सिंह राजा रहे, किल्ला जेकर आन।

सुग्घर हावय आज भी, मारो गढ़ के शान।।


भारी बड़का गढ़ रहे, रखे अलग पहिचान।

देख समे बलवान हे, खोइस ओकर मान।।


कांकेर

तपोभूमि ऋषि कंक के, हरे पहाड़ी धाम।

दाई    हे  कांकेश्वरी,   पूरन  करथे  काम।।

 

धरम देव राजा रहे, सिंह बनाय दुवार।

कंडरा रक्छा ला करे, दुश्मन जावे हार।।


हे सोनाई रूपई, सुघ्घर तरिया जान।

राजा के बेटी इहे त्यागिस हवे परान।।


ए सुक्खा होवय नहीँ, जेकर हे परमान।।

आधा पानी सोन गा, आधा चाँदी जान।


बस्तर

आवव बस्तर देख लव, जंगल झाड़ी आय।

हरियर हरियर देख लव, कुदरत रंग भराय।।


देख आदिवासी हवे, हमर इहाँ के शान।

भोला भाला सादगी, जेकर हे पहिचान।।


देखव बस्तर के महल, सुघ्घरता के खान।

दलपत सागर देख ले, बस्तर के हे आन।।


तीरथगढ़ बड़ निक लगे, सुघ्घर जलप्रपात।

आवव संगी देख लव, चित्रकोट मन भात।।


खास हवे गा दशहरा, अबड़ ख्याति जग जान।

सबले  हावय  अलग गा,  बाढ़य  बस्तर मान।।


देखव जी कैलास के, गुफा कुटुमसर आँव।

हवय प्रकृति के रंग हा, मिले मया के छाँव।।


-हेमलाल साहू 

ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा

तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ.ग.) 


14 दिस॰ 2016

बारव दीया (हेम के दोहे)

बारव दीया प्रेम के, सुघ्घर कर के दान।

हवे महीना धर्म के, आही घर भगवान।।


आत्मा बिन काया नहीँ, इही जगत के सार।

दीया बाती तेल मिल, करै जगत उजियार।।


माटी के दियना जले, जगत होय अंजोर।

जिनगी के बाती जले, तेल रहत ले मोर।।


आगे धनतेरस हवय, दीया ला घर बार।

लछमी दाई संग मा, लाय नवा उजियार।।

-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा

तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

7 दिस॰ 2016

@चीला रोटी@

हावे छत्तीसगढ़ के, चीला रोटी शान।
खाके तैहा देखबे, तब पाबे पहिचान।।

चक्का जइसे गोल हे, रहिथे छेद मितान।
सोंहारी तो नइ हरे, एकर कर पहिचान।।

आय नहीँ गेंहू बता, चाँउर आय पिसान।
चाँउर ला पिसके हवै, एला बनाय जान।।

बनही चीला आज गा, आये घर के आन।
नोनी अउ बाबू सबो, एला खावय जान।।

भउजी चूल्हा बारके, पिसान देवय घोर।
जइसे तावा हा तिपय, डाले चारो ओर।।

ढकनी देवय तोप गा, बने फेर सेकाय।
सुघ्घर चीला हा बने, मुँह मा पानी आय।।

अड़बड़ रहिथे स्वाद हा, एला सबो बनाय।
चटनी संग पताल के, माँग माँग सब खाय।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

20 नव॰ 2016

@भाजी@

@भाजी@

भाजी तिवरा अउ चना, देख सबो ललचाय।
फेव-रेट सब के हवे, सिरतो गजब मिठाय।।

खाले भाजी साग ला, सेहत के संसार।
रोग दूर तन के करै, देवत मया अपार।।

टोर खेड़हा खोटनी, भाजी राँध बघार।
सबला हवे पसंद गा, सेहत के भरमार।।

भाजी तिंपनिया रहै, हर पानी के छोर।
दार डाल के राँध ले, देत मया के सोर।।

नाव सोल भाजी हवय, छू के देख लजाय।
अबड़ मिठाथे साग हा, खाये जीभ लमाय।।

मुसकेनी भाजी रहै, गाँव गाँव अउ खार।
लान मुफत मा टोरके, रुपया लगे न चार।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

18 नव॰ 2016

@इहाँ पीटत डोल@

फेसबूक मनखे नकली, पहिरे हवे खोल।
अपन घर मया नई करै, इहाँ पीटत डोल।।
नाव गाँव के पता नहीँ, दिखत सबके पोल।
कइसे कहव मोर रानी, मनके मया बोल।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

मोदी दीस तान सीना

मोदी दीस तान सीना, देख छप्पन इंच।
धन देख लाय बर करिया, नवा खोलिस पंच।।
वादा करिस अपन पूरा, जन के रखिस मान।
पांच सौ हजार नोट ला, करदिस बन्द जान।।

खून अउ पसीना लुटके, भरथे खूब माल।
पाप भागी कमीना के, होगय फेल चाल।।
आज ले नोट बन्द हवे, पांच सौवा हजार।
देख ले चोर ला करिया, मुँह ला रोत फार।।

देख ले करिया सिरागे, धन सबो हा आज।
पाँच अउ हजार जुन्ना, अब न आय काज।।
नोट आही नवा अब तो, देख सँगी बजार।
देख करिया चोर ऊपर, परगे आज मार।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

जाड़ा(शोभन छंद)

आइस जाड़ा अब संगी, काँपत हाथ गोड़।
घाम हा सुहाये सबला, रवनिया मत छोड़।।
कड़के कसके जाड़ा हा, तन मा घुसर जाय।
तापके गोरसी आगी, अपन जाड़ भगाय ।।

जाड़ के महीना सुघ्घर, सेहत चलव बनाव।
योगा अभ्यास मा सँगी, तन मन ला लगाव।।
स्वस्थ रखै तन मन ला जी, बनहूँ पहलवान।
स्वागत करले जाड़ा के, झन करव अपमान।।

कोयली राग ला धरके, गाय गीत बसंत।
लागे सुघ्घर मीठ तान, सुनले रे हेमन्त।।
प्रेम के गीत ला गावय, सबला बड़ सुहाय।
कुदरत संग मया करले, जिनगी हमर आय।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

शोभन छंद

तुलसी
पूजा रोज तैह करले, सुमर तुलसी नाम।
हरथे रोग शोक मनके, सफल करथे काम।।
तुलसी मा हवे बिराजै, देख लछमी मात।
सालिक राम संग परभू, बिसनू हे समात।।

पुन्नी
अपने  छोड़ मोह माया, चल गंगा नहान।
पुन्नी मा पून्य कमा ले, करव सुघ्घर दान।।
तन मन राख अपन पावन, परभू करव ध्यान।
पावय भाव भजन दरशन, ला दियै भगवान।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

शोभन छंद

तोरे संग मया होगय,  कइसे में बताव।
रतिहा नींद नई आवे, कइसे में पहाव।।
आथे तोर रोज सुरता, कइसे मेह भुलाव।
तोला मेह देखे बिना, मन कइसे मढ़ाव।।

मिलके आव करव संगी, ठठ्ठा अउ मजाक।
सुघ्घर गोठ बात करबो, मन ला लेव झाँक।।
करहूँ  बुरा झने ककरो, रखव मया परेम।
जिनगी के कहाँ भरोसा, काल हे हर टेम।।

हेम रूप मा झन जाबे, गुन ला तै निमार।
तन ले बड़े राख मन, पाबै सुख अपार।।
करले करम धरम ला तै, जिनगी हवय सार।
तै बढ़ा मया के सुघ्घर, जग मा अपन नार।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

आगय देवारी (शोभन छंद)

आगय संगी देवारी, देख हमर तिहार।
बारव दीया सुरहूती, लाव नव उजियार।।
लछमी दाई घर आवय, फैलय यस हमार।
आव दूर करबो मिल, जगत के अँधियार।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

शोभन (सिंहिका)

छन्द के छ के नवा पाठ - शोभन (सिंहिका) छन्द

अभी विष्णु पद छन्द सीखेन जेमा 16,10 मा यति रहिस। अंत गुरु से रहिस।
लगभग वइसने शोभन छन्द आय 14,10 यति।

सोभन (सिंहिका) छन्द (१४,१०)
डाँड़ (पद) - ४, ,चरन - ८ 
तुकांत के नियम - दू-दू डाँड़ के आखिर मा माने सम-सम चरन मा जगन, बड़कू,नान्हें,बड़कू  (२,१,२)
हर डाँड़ मा कुल मातरा – २४ ,
बिसम चरन मा मातरा – १४, सम चरन मा मातरा- १०
यति / बाधा – १४, १० मातरा मा
खास- एला सिंहिका छन्द घला कहिथें

राख सबसे प्रेम

हवै चार दिन के जिनगी, राख ले मन प्रेम।
का ठिकाना कहाँ मलही, फेर जी अब टेम।।
प्रेम ला अंतस राख ले, खोल तँय मन द्वार।
जान ले मान ले संगी, सब इही जग सार।।

गुन ला माटी के गावव, माथ अपन नवाव।
मोर हवै जाँगर साथी, मेह किसान आव।।
गारके पसीना तन ले, रोज करथव काम।
सुत उठ माटी दाई ला, करव मे  परनाम।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

16 नव॰ 2016

@जाड़ा@

@जाड़ा@

हेमन्त अपन रंग ला, सबो मुड़ा देखाय।
बनके जाड़ा देखले, अँगमा सरी समाय।।

होत बिहनिया सीत के, छोड़य तीर कमान।
अड़बड़ बड़गे जाड़ हा, सबके लेत परान।।

कड़कत हावे जाड़ हा, माँगत चादर साल।
लकड़ी जइसे तन लगे, पाये पता न खाल।।

उठके भइया बिहनिया, भूरी तापे जाय।
तन के जाड़ा दूर हो, फेर काम हा भाय।।

घामे लागे निक अबड़, जबले जाड़ा आय।
बइठ रवनिया मा बने, तन ला सेके जाय।।

स्वस्थ रखै तन मन बने, सबला जाड़ा भाय।
कसरत करले तँय बने, रोग कभू नइ आय।।

काँपत तन सबके हवे, जाड़ा अबड़ जड़ाय।
बाँधव पागा कान मा, जाड़ फेर न जनाय।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

12 नव॰ 2016

तुलसी

बिन्दा के सुरता रहै, महिमा हवे अपार।
हरथे सबके रोग ला, तुलसी पूजा सार।।

तुलसी बिरवा तँय लगा, परभू के रख मान।
लछमी घर आही सदा, बिसनू के वरदान।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

8 नव॰ 2016

@करिया नोट@


जुन्ना हजार पाँच सौ, बंद आज ले नोट।
रोत चोर करिया हवे, कसके लगगे चोट।।

धोखा करिया चोर हाँ, खाय हवे जी आज।
करिया पइसा आय न, संगी अबतो काज।।

आवय न कुछू काम गा, करिया धन हा मान।
करिया धन सरही सबो, घर कोठी मा जान।।

नोट होत बदली नहीँ,  जनता करत बवाल।
दू दिन कइसे गुजरही, हावे पेट सवाल।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

3 नव॰ 2016

*राख सबसे प्रेम*

हवै चार दिन के जिनगी, राख ले मन प्रेम।
का ठिकाना कहाँ मलही, फेर जी अब टेम।।
प्रेम ला अंतस राख ले, खोल तँय मन द्वार।
जान ले मान ले संगी, सब इही जग सार।।

गुन ला माटी के गावव, माथ अपन नवाव।
मोर हवै जाँगर साथी, मेह किसान आव।।
गारके पसीना तन ले, रोज करथव काम।
सुत उठ माटी दाई ला, करव मे  परनाम।।

आगय संगी देवारी, देख हमर तिहार।
बारव दीया सुरहूती, लाव नव उजियार।।
लछमी दाई घर आवय, फैलय यस हमार।
आव दूर करबो मिल, जगत के अँधियार।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं.-9977831273

25 अक्टू॰ 2016

*आँव लाज रखबे*

हे नटवर नन्दलाल मोरे, आँव लाज रखबे।
बड़गे चारो मुड़ा पाप हा, आ अब तँय हरबे।।

बड़े बड़े सकुनी इहा हवे, चाल चलत अपने।
फेकत हावे जाल भरम के, रखथे कपट मने ।।

करथे अधरम हा राज इहा, दुर्योधन बनके।
धरम राज ला लूटत हावे, छल माया करके।।

करथे अत्याचार दुशासन, खींचत हे लुगरा।
बेटी माई होवत हावे, रोज इहा उँघरा।।

आँखी देखत बइठे मनखे, न्याय बने अँधरा।
साँच झूठ के फरक कहाँ हे, होवत हे झगरा।।

भाई भाई के बैरी हावे,  कपट भरे मन मा।
आज ददा दाई ला मनखेे, फेकत हे बन मा।।

मन मा आस हवे आके तै, लाज मोर रखबे।
कलजुग के सबो पाप ला तै , आव नास करबे।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831273

*जग लाव अँजोरी*

बार अपन मनके दीया ला, जग लाव अँजोरी।
सबो डहर परकास फैलही, मिटही अँधियारी।।

जोड़व नाता कुदरत संगी, जग बदव मितानी।
हरियर हरियर दिखही धरती, मत कर नादानी।।

हरियर होही मन हा सबके, रखव बचा पानी।
माटी सेवा मा तन मन राखव, कर बने किसानी।।

पर उपकार पर सेवा संगी, कर दव जिनगानी।
रइहव सुख के छइहा संगी, बोल मीठ बानी।।

कायर कपट छोड़ संगी,  हेम करत विनती।
प्रेम भाव से मन मा जलाव, दीया सुरहूती।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831273

लावव नवा अँजोर (हेम के दोहे)

ऊवत बेरा के जिहाँ, परथन सबझन पाँव।
बढ़ निक लागे गाँव हा, हवे मया के छाँव।।

सुघ्घर दाई के मया, महिमा हवय अपार।
अपन पीर अंतस रखें, हमला देत दुलार।।

बनके दीया मेटलव, जग के सब अँधियार।
लावव नवा अँजोर गा, मन मा दीया बार।।

बइला कस जाँगर हवय, ओला कसके पेर।
दूर गरीबी ला करँय, मिलय छाँव सुख फेर।।

शाबासी टॉनिक हमर, लागे अड़बड़ मीठ।
मन करथे चंगा भला, देख ठठा के पीठ।।

अवगुन करथे दूर गा, गोठ करू कर भोग।
करू करेला हा रखै, जइसे तन ल निरोग।।

-हेमलाल साहू 
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ.ग.) 

17 अक्टू॰ 2016

जय जय हो मात भवानी (बिस्नू पद छन्द )

जय जय हो मात भवानी, खोल द्वार मनके।
बारव दीया करव आरती, भाव भजन धरके।।

तोर अगोरा हावे घर मा, आ दाई बनके।
मया दया भाव धरे आहू, आस हवे सबके।।

पहली बहनी आय सारदा, ज्ञान भरय मनमें।
दूसर बहनी आवय गौरी, देवव बल तन में।।

तीसर बहनी आवय लछमी, धन लावय धरके।
चउथा बहनी आवय काली, नाश करै जर के।।

आय पाँचवा बहनी दुरगा, घर पावन दमके।
सब संग देवता मन लावय, दरसक रुप धरके।।

गुन गावय सब तोर भवानी, जय जय कार करे।
मोरे मन पावन रहै सदा,  तँय बल बुद्धि भरे।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831273

तुरते ताही

धरहूँ माटी भेस 🌿

‎धरके माटी भेस 🌿 ‎ ‎चिमनी के बाती कस जरके, ‎अँधियार ला हरावँ। ‎दया-मया के आखर भर के, ‎सबके बात सुनावँ।। ‎ ‎छत्तीसगढ़ी के माटी मा, ‎अपन पसीन...