14 सित॰ 2026

धरहूँ माटी भेस 🌿

‎धरके माटी भेस 🌿
‎चिमनी के बाती कस जरके,
‎अँधियार ला हरावँ।
‎दया-मया के आखर भर के,
‎सबके बात सुनावँ।।
‎छत्तीसगढ़ी के माटी मा,
‎अपन पसीना गार।
‎फुलवा बन ममहावत रइहूँ,
‎काँटा सबो निकार।।
‎भलई के रस्ता मा हावय,
‎दुख के खड़े पहाड़।
‎सच के जांगर ले ओला,
‎जर ले फेंक उखाड़।।
‎धधकत कलम अंगरा बनके,
‎लबरा ला दव लेस।
‎माटी के पीरा ला हरदव,
‎धरके माटी भेस।।
‎रचनाकार - हेमलाल साहू
‎गाँव - गिधवा, जिला-बेमेतरा

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तुरते ताही

धरहूँ माटी भेस 🌿

‎धरके माटी भेस 🌿 ‎ ‎चिमनी के बाती कस जरके, ‎अँधियार ला हरावँ। ‎दया-मया के आखर भर के, ‎सबके बात सुनावँ।। ‎ ‎छत्तीसगढ़ी के माटी मा, ‎अपन पसीन...