20 जन॰ 2017

गाँव (उल्लाला छंद)

सुघ्घर हावे गाँव हा, मिलै मया के छाँव हा।
खेत खार के ठाँव हे , गिधवा मोरे गाँव हे।।

चिरई चिरगुन हा रहै, बोल मया के ओ कहै।
नवरा नदिया हा भरै, झरझर झरझर ओ करै।।

रुख राई हरियर रहै, निरमल पुरवइया बहै।
सबो डहर ए गाँव हे, बर पीपर के छाँव हे।।

पहुना हे भगवान गा, रहिथे जिहाँ किसान गा।
बइला हवै मितान गा, गइया मात समान गा।।

सुरता आथे गाँव हा, जिहाँ मिलै ए नाँव हा।
गोठ करत ए हेम गा, रखव गाँव बर प्रेम गा।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

1 टिप्पणी:

Satwant Singh ने कहा…

बड़ निक लागिस...

तुरते ताही

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला)

‎ ‎हेम के दोहे (बाल जनऊला) ‎ ‎नाच नचावँन अंगरी, काम सबो के आँन। ‎सारी जग के बात ला, ले पहुँचावँन कान।। ‎ ‎संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस...