8 जन॰ 2017

पुतरी पुतरा (रोला छन्द)

करथे लीला देख, बना के हमला पुतरी।
लीलाधर के हाथ, रहै लगाम के सुतरी।।
माया के ए जाल, देख नइ पाये आँखी।
हावे आत्मा अमर, भरै बिद्या के साखी।।

सुघ्घर खेलन खेल, रहै  भइया  ठठ्ठा  के।
संगी साथी साथ, सबो  पुतरी   पुतरा के।।
आगे मोला समझ, बने जिनगी आत्मा के।
आथे बचपन याद, बने  पुतरा  कुरता के।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

कोई टिप्पणी नहीं:

तुरते ताही

‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद)‎

‎हास्य कविता  ‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद) ‎ ‎एक्के झन हे मोर मयारू, सुरता आवय रतिया। ‎सुनलव मोर मया के किस्सा, नाव हवे फुलमतिया।। ‎ ...