20 जन॰ 2017

हेम के कुण्डलिया

जाड़ा

आगे दिन हा जाड़ के, सबके मन ला भाय।
ओढ़व चादर साल ला, सुघ्घर जाड़ा आय।।
सुघ्घर जाड़ा आय, बनालव बढ़िया सेहत।
तन मन होवय पोठ, मजा जाड़ा के लेवत।।
तापव भूरी बारके, जाड़  हा  जावय  भागे।
काँपत हाथे गोड़ हा, जाड़ के दिन हा आगे।।

औंधी
जावय  राहर  ला  रखै, मिलके  संझा बेर।
दूसर के  ला  ओ करै,  खूब हेर अउ फेर।।
खूब हेर अउ फेर,  टोर  राहर  ला  लावय।
औंधी ऊसन खात, मजा मौसम के हावय।।
ताकत हे रखवार, चोर  ला  नइ तो  पावय।
लइका अऊ सियान, रखै ला राहर जावय।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

2 टिप्‍पणियां:

Satwant Singh ने कहा…

बहुत सुंदर है ।

Satwant Singh ने कहा…

कविता पढ़ के बहुत अच्छा लगा ।

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