4 जन॰ 2017

मेला (रोला छन्द)

सुन हल्दी बाजार, रहिस राउत के मेला।
आनी बानी देख, आय रहिस इहाँ  ठेला।।
किसम किसम के लोग, रहिस हे रेलम पेला।
लेके खाये हवन, सेव बरफी अउ केला।।

सुघ्घर सजगे हवय, देख आसो के मेला।
जाबो मेला हमन, चढ़ाबो नरियर भेला।।
पाबो हम आशीष, टेकबो माथा अँगना।
दाई करबे  सफल, मोर पूरा हो सपना।।

जिनगी मेला हवय, झाँक के देखव संगी।
अंतर दरशन करव, होय मन तोरे चंगी।।
सुख दुख हावे खेल, देख तोरे जिंनगी के।
मन ला अपने ठान, मया रखले संगी के।।

देखव  मेला  रंग, सबो  डहर  हवै छाये।
लइका मन के संग, बबा हा सुग्घर जाये।।
गात प्रेम के गीत, मया ला  सुघ्घर धरके।
नाती ला देखाय,  बबा मेला  ला घुमके।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

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