30 नव॰ 2024

जुबान (कुंडलिया छंद)

निकले वापस फेर ना, आवय तोर जुबान।

जइसे निकले तीर ले, आवय नहीं कमान।।

आवय नहीं कमान, बात ला छेड़व गुनके।

शारद दे आशीष, शब्द ला रखलव चुनके।।

कहे हेम कविराय, बोल तँय गुरतुर मन ले।

सब कड़वाहट फेक, फेर ना वापस निकले।।

- हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा

22 नव॰ 2024

याद रखें बर हावय

कभू दुबारा नई मिले गा, 

ये दाई ददा जवानी।

इकर मान ला रखले बढ़िया, 

झन बनबे तँय अभिमानी।।


करे नाम ला बदनामी ये,

लालच गुस्सा अउ चोरी।

करँव कभू झन कोनो ककरो,

चारी चुगली मुँहजोरी।।


बइरी जर जमीन के कारन,

होथे भाई ले भाई।

रहव सबो मिलके आपस मा,

होवव झन कभू लड़ाई।।


सबला प्यारा होथे सबले,

बाई धन दौलत दाई।।

सोच समझ के रद्दा चुनहूँ,

कतको हे आगू खाई।।


असली सुख के रोड़ा हावय, 

कोट कचहरी के द्वारी।

जिनगी मा मत हो कोनो ला,

तन मन के कुछु बीमारी।।


चुरा नई ले जावय कोनो,

अक्कल कला सदाचारी।

बने तोर दुख के कारन ये,

जलन आलसी लाचारी।।


याद रखें बर हावय सबला,

जनम मरन के सच्चाई।

तोर मान ला सदा बढ़ाही,

धरम करम अउ अच्छाई।।

-हेमलाल साहू

ग्राम-गिधवा, जिला-बेमेतरा


20 मई 2022

जागव रे (सरसी छंद)

जागव रे जवान जागव रे, संगी मोर सियान।
धरती गोहार लगावत हे, देवव अबतो ध्यान।।

झन काँटव जंगल झाड़ी ला, धरती के श्रृंगार।
सबो जीव के हवय बसेरा, जिनगी के आधार।।

जैसे काँटत जाबे जंगल, कतको बनही घाँव।
बंजर हो जाही भुइँया हर, उजड़त जाही गाँव।।

सूखा जाही पानी सब्बो, मर जाबे तँय प्यास।
बिना हवा पानी जिनगी के, तोर छूट जहि साँस।।

तीप जही भुइँया लकलक ले, चट-चट जरही पाँव।
लेसा जाही तन तोर घाम मा, मिले नहीं जुड़ छाँव।।

रुख राई ले पवन बहे गा, जिनगी के बन प्रान।
पैसा खातिर झन बेचव गा, भविष्य अउ ईमान।।

जंगल हसदेव ला बचाके, करलव गरब गुमान।
हमर आदिवासी संस्कृति के, जेन हवय पहचान।।

समे रहत ले चेत लगाके, जंगल अपन बचाव।
सुखी रही जिनगानी सबके, सुघ्घर पेड़ लगाव।।

- हेमलाल साहू
छन्द साधक, सत्र-1
ग्राम- गिधवा, जिला बेमेतरा

16 अप्रैल 2022

जय हनुमान (हेम के बरवै छन्द)

प्रभु श्री राम दुलारे, जय हनुमान।
महाबली जग के, तँय भगवान।।

तन मन अपन बसाये, प्रभु श्री राम।
आठो पहर राम के, जपथस नाम।।

बल बुद्धि शक्ति सबला, देय अपार।
नर नारी तोर लगावै, सब जयकार।।

नाम लेत सब विपदा, हर टल जाय।
कन्द मूल फल तोला, हे मन भाय।।

सुमिरत तोर नाम ला, काँपे भूत।
अपन संग धर लाये, यम के दूत।।

दुश्मन भाग बचाये, अपन परान।
जय होवै महावीर,  जय हनुमान।।

-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र-1
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

19 फ़र॰ 2022

हेम के बरवै छन्द (सतगुरु रविदास)

16 फरवरी सतगुरु रविदास जयंती के हार्दिक बधाई अउ शुभकामनाएँ

मँय बन्दत हव तोला, गुरु रविदास।
मानवतावादी तँय, सतगुरु खास।।

तोरे अमरित वाणी, हे अनमोल।
शांत धीर अउ गुरतुर, हावे बोल।।

मन आत्मा ला पूजे, अंतर ध्यान।
मन मंदिर ला खोले, पाये ज्ञान।।

जग मा सबो एक हे, ये भगवान।
राम रहिम अउ ईसा, एक्के जान।।

काम बुता ला सुग्घर, करले नेक।
भाई चारा ल बढ़ा, ईष्या फेक।।

मन ला चंगा राखे, करहूँ काम।
पाव कठौती गंगा, बाढ़य नाम।।

जात पात मा झनकर, गरब गुमान।
धरम करम बड़का हे, रख ईमान।।

सुन रविदास कहे, जाँगर पेर।
फेर रहे ना जिनगी, मा अंधेर।।

-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र-1
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

*हेम के विधाता छन्द (किसान)*

हरे अनमोल हीरा ओ, कमाथे जे किसानी ला।
नफा सूझे कहा भैया, इहाँ ओ अन्न दानी ला।।
कमाये पेर जाँगर ओ, सहे गा घाम पानी ला।
बहाये तन पसीना ओ, खपा देये जवानी ला।।

*-हेमलाल साहू*
छन्द साधक, सत्र -1
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

17 फ़र॰ 2022

हेम के बरवै छंद (आगे नवा बछर)

आगे नवा बछर के, पहली भोर।
हैप्पी न्यू ईयर हे, सबला मोर।।

अंग्रेजी कैलेंडर, जग भर छाय।
कोनो नइहे संगी, अब पिछ्वाय।।

नवा बछर मा सबले, रिश्ता जोड़।
बैर भाव अउ झगरा, सबला छोड़।।

सादा जिनगी रखबे, उच्च विचार।
सुम्मत के सुग्घर जग, बगरय नार।।

नवा बछर मा संगी, बनव निरोग।
अच्छा स्वास्थ्य रइही, करलव योग।।

बीड़ी तम्बाकू अउ, मदिरा पान।
बीमारी ला पनपा, लेथे जान।।

नवा बछर मा गुरतुर, बोली बोल।
दया मया के सुग्घर, बानी घोल।।

मन आपा झन खोवय, बाँधव पार।
जिनगी के सब विपदा, ला दे टार।।

आही नवा बछर के, नव अंजोर।
आसा हावय सुग्घर, मन मा मोर।।

फेर भाग्य हर खुलही, सुग्घर तोर।
जी जान लगाके तँय, जांगर टोर।।

-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र- 1
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा

हेम के सरसी छन्द (बसन्त ऋतु)

आगे हे राजा बसंत ऋतु, सबके मन ला भाय।
रंग बिरंगी जग मा सुघ्घर, छटा प्रकृति के छाय।।

झुमके काँदी करथे स्वागत, फूल देख मुस्काय।
चिरई चिरगुन घूम घूम के, संदेशा बगराय।।

गोंदा चम्पा अउ चंदैनी, बगिया ला महकाय।
मस्त मगन भौरा नाचे, देख खूब इतराय।।

सरर सरर चलथे पुरवइया, बहिथे चारो ओर।
तरिया अउ नदिया के पानी, मारे देख हिलोर।।

धीरे धीरे आमा मउरे, कोयल गावय गीत।
लाली लाली परसा फूले, जागे सबके प्रीत।।

पीयर पीयर सरसो फूले, छाये मन उल्लास।
रुख राई के हरियर पाना, लाये नव उज्जास।।

- हेमलाल साहू
छन्द साधक, सत्र-1
ग्राम- गिधवा, जिला बेमेतरा

16 फ़र॰ 2022

हेम के सार छंद (बेटी)


 जग बर वरदान हवे, समझव इखरो पीरा।
झन मारव संगी कोख म, अनमोल एक हीरा।।

लक्ष्मी दाई बनके सुघ्घर, घर मा आथे बेटी।
दया मया के गठरी बांधे, लाये सुख के पेटी।।

दादा दादी के सँगवारी, बनथे मीत मयारू।
दाई बाबू बर सुख दाता, बेटी होय जुझारू।।

सबो परीक्षा मा अव्वल जे, पढ़े लिखे मा आगू।
डॉक्टर सैनिक बने शिक्षिका, नइहे बेटी पाछू।।

दू ठन कुल ला रखें बाँध के, कतको झेल झमेला।
दाई बहनी भाभी पत्नी, बिन जिनगी न कटेला।।

कुल गौरव चरित्र निर्मात्री, बेटी बड़ संस्कारी।
जग हे जेकर बिना अधूरा, महिमा हावे भारी।।
-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र-1
ग्राम -गिधवा, जिला बेमेतरा



29 जन॰ 2022

शंकर छंद (लाल बहादुर शास्त्री)

जय हो लाल बहादुर शास्त्री, मोर भारत रत्न।
राम राज्य के देखे सपना, रहिस जन प्रसन्न।।

अटल अमर हे तोर कहानी, सुनत हे संसार।
दू अक्टूबर जन्म दिवस हे, पाय बड़ संस्कार।।

सरल सादगी जिनगी तोरे, उच्च रहिस विचार।
बड़का सतरंज के खिलाड़ी, खाय कभू न हार।।

छोटे कद काठी दुरिहा ले, जाय जे पहिचान।
खादी टोपी कुरता धोती, बढ़ाय तोर मान।।

नारा जय जवान जय किसान, अमर जग मा तोर।
ईमानदार सबके साथी, रहिस शास्त्री मोर।।

-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र -1
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा

27 दिस॰ 2021

सरसी छंद (गुरु घासीदास बाबा)*

सत्य नाम ला अमर करइया, जय गुरु घासीदास।
जग मा लाये हच तँय बाबा, सुग्घर नवा उजास।। 
करम धरम ला पोठ करे हस, बन महान तँय संत। 
सुग्घर जग मा अपन चलाये, सत्य नाम के पन्त।। 
मनखे मनखे एक बरोबर, सबके बनव हितेश। 
भेद भाव ला छोड़ कहे तँय, सबला दे संदेश।। 
बिना कर्म के कहाँ मिले फल, जैसे बिन गुरु ज्ञान। 
कहे अंध विस्वासी झन बन, बनव सबो विद्वान।। 
सादा जिनगी ला धरबे तँय, करबे सद व्यवहार। 
छोड़ नशा ले दुरिहा कहिथस, रखबे उच्च विचार।।
-हेमलाल साहू 
छंद साधक सत्र-0१
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा

23 अग॰ 2021

हेम के कुण्डलिया (राखी)

बहनी राखी ला धरै, मइके आय दुवार।
भैया के मन भात हे, देवत मया दुलार।।
देवत मया दुलार, हाथ मा पहिने राखी।
नाता हे अनमोल, मया के बाँधे साखी।।
दे दव रक्षा वचन, मान लव मोरो कहनी।
लक्ष्मी बनके भाग्य, आय भाई घर बहनी।।
-हेमलाल साहू
छंद साधक, सत्र-1
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा

15 अग॰ 2021

हेम के त्रिभंगी छंद (हे भारत माता)

हे भारत माता, भाग्य विधाता, तोर शरण मा, माथ नवे।
झंडा फहराबो, जश्न मनाबो, शुभ दिन आये, आज हवे।।
मन राखे चंगा, बन बजरंगा, वीर सिपाही, मोर रहें।
भारत जयकारा, गूँजय नारा, भारतीय जय, जगत कहें।। -हेमलाल साहू
छंद साधक, सत्र-1 
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा

28 जुल॰ 2021

गुरु (हेम के कुण्डलिया)

‎

‎

‎गुरु वंदना

‎हेम के दोहे

‎करहूँ पहली वंदना, दाई-बाबू मोर।

‎गुरु ला दूसर वंदना, ज्ञान करय अंजोर।।

‎

‎

‎हेम के कुण्डलियाँ

‎करलौ पहिली वंदना, गुरु सम हे भगवान।

‎गुरु देवय हमला ज्ञान, धरलौ ओखर ध्यान।।

‎धरलौ ओखर ध्यान, सही रद्दा देखाही।

‎सबो ईरखा फेंक, ज्ञान के अलख जगाही।।

‎कहय हेम कविराय, बात ला गुरु के सुनलौ।

‎जिनगी होही पार, वंदना गुरु के करलौ।।

‎

‎रचनाकार – हेमलाल साहू

‎गाँव – गिधवा, जिला – बेमेतरा (छ.ग.)

‎

‎

11 अप्रैल 2021

हेम के चौपाई छंद (कोरोना जागरूकता)

हेम के चौपाई छंद

घर भीतर रह कहिथे मोना।
घर बाहिर बइरी कोरोना।।
करत हवय जे जादू टोना।
नइहे हमला जिनगी खोना।।

बहनी चुन्नी आव बिसाबो। 
साबुन सेनिटाइजर लाबो।
बारम्बार हाथ ला धोबो।
कोरोना ला दूर भगाबो।।

सुनले भैया तँय हर राजन।
करव लॉक डाउन के पालन।।
कहिथे शासन संग प्रसाशन।
बढ़िया से घर मा हम राहन।।

खाँसी सर्दी बुखार आवय।
लक्षण कोरोना के हावय।।
झटसे अस्पताल मा जावव।
कोरोना के टेस्ट करावव।।

सबसे दुरिहा रह ले राजू।
दू गज रख के आजू बाजू।।
सबला संगी आव जगाबो।
कोरोना से हमन बचाबो।।

-हेमलाल साहू 
छंद साधक सत्र-1
ग्राम- गिधवा, जिला बेमेतरा

चौपाई छंद (गरमी)

आसो गरमी के दिन आगय।
सुरुज देव आगी बरसावय।।
खरी मंझनिया लू बरपावय।
नोनी सबला बात बतावय।।

डारा पाना सबो सुखावय।
रोज झाँझ हर खूब जनावय।
लकलक तीपत धरती हावय।
चट चटाक पाँव जरत जावय।।

रुख राई सबके मन भावय।
जीव पेड़ छइहा सुस्तावय।।
गरमी के दिन बैठ बितावय।
ठण्डा ठण्डा बढ़िया लागय।।
-हेमलाल साहू 
छंद साधक सत्र-1
ग्राम- गिधवा, जिला बेमेतरा

21 फ़र॰ 2021

हेम के कुंडलिया

विश्व महतारी भाखा दिवस के हार्दिक बधाइयां
महतारी भाखा हरे, छत्तीसगढ़ी मोर।
ननपन ले पायेंव मँय, दाई कोरा तोर।।
दाई कोरा तोर, तही दे पहली आखर।
मुख पोथी बन मोर, बनायें मोला साक्षर।।
कहे हेम कविराय, तोर महिमा हे भारी।
रखहूँ दाई मान, मोर भाखा महतारी।।
-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र-१
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
जिला बेमेतरा (छ. ग)

20 फ़र॰ 2021

हेम के कुण्डलिया

रोना रोवत आम जन, जबले बड़गे भाव।
डीजल अउ पेड्रोल के, बाढ़े दाम चढ़ाव।।
बाढ़े दाम चढ़ाव, देख मारत ऊँछाली।
बढ़े जिनिस के दाम, जेब होवत हे खाली।।
देखत हे सरकार, हवे जन ला अब ढोना।
नेता बइठे शांत, आम जन रोवत रोना।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
जिला बेमेतरा (छ. ग.)

हेम के कुण्डलिया

जय हो माता शारदा, करव तोर गुणगान।
सब्बो अवगुण दूर कर, दे दे हमला ज्ञान।।
दे दे हमला ज्ञान, तोर जस ला मँय गावँव।
मोर कंठ कर वास, ज्ञान ला सब्बो पावँव।।
सुमिरत तोरे नाव, दूर मनके सब भय हो।
करँव आरती तोर, शारदा माता जय हो।।

- हेमलाल साहू
ग्राम - गिधवा, पोस्ट नगधा
जिला - बेमेतरा (छ. ग)

हेम के कुकुम्भ छंद


 हेम के कुकुम्भ छंद

जय छत्तीसगढ़ मोर माटी, जग बर हावच वरदानी।

सबले बढ़िया तोला कहिथे, तोरो हे गजब कहानी।।

सब दुख पीरा तही हरैया, तोला सब माथ लगाथे।

तोर शरण मा रहिके दाई, सुघ्घर जिनगी ल पहाथे।।


तोर हवे ये भुइँया पावन, बसे देवता अउ धामी।

गाँव गाँव माहामाया अउ, बसे राम अन्तर्यामी।।

घर घर रामायण बाचत हे, बहे ज्ञान गंगा गीता।

पावन हवे इहाँ के नारी, पूजे जस लक्ष्मी सीता।।


बगरे हावय खनिज सम्पदा, देख इहाँ कोना कोना।

हीरा मोती के खदान हे, भरे पड़े चाँदी अउ सोना।।

कतको हावय बड़का बड़का, देखव इहाँ कारखाना।

काम करे बाहर ले आवय, इहाँ बनावय ग ठिकाना।।


देख कला संस्कृति ला सँजोय, पावन हवे तोर माटी।

तोरच कोरा मा लइका मन, खेलय भँवरा अउ बाँटी।।

रंग बिरंगी चिरई चिरगुन, जिनकर गुरतुर हे बोली।

आनी बानी के जीव जन्तु, पाबे तँय टोली टोली।।


नाचा गम्मत लोगन मनके, देख खूब मन ला भावे।

सुवा ददरिया करमा पंथी, राग भरथरी जब गावे।।

मातर मड़ई मेला बर जी, गाँव गाँव राउत जागे।

नाच नाच के पारे दोहा, कतका सबला निक लागे।।


धान चना गेहूँ उपजाथस, अउ उपजाथस उँनहारी।

जय छत्तीसगढ़ मोर माटी, महिमा हवे तोर भारी।।

सबले बढ़िया तोला कहिथे, तोरो हे गजब कहानी।।

जय छत्तीसगढ़ मोर माटी, जग बर हावच वरदानी


-हेमलाल साहू

छंद साधक सत्र -1

ग्राम-गिधवा, पोस्ट नगधा

जिला बेमेतरा (छ. ग.)


19 फ़र॰ 2021

हेम के दोहे

हेम मोर हे नाव जी, गिधवा हावय गाँव।
दया मया मिलथे जिहाँ, रुख राई के छाँव।।

चिरई चिरगुन देखलव, सुनलव गुरतुर बोल।
बढ़िया फुदकत देखके, लागय जी अनमोल।।

पुरखा के खेती हवे, जिनगी के आधार।
राम नाम के जाप ले, होबो भव ले पार।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
जिला बेमेतरा (छ. ग.)

हेम के दोहे







अलवा जलवा लेखनी, आखर ले अनजान।
मइया जय हो शारदा, करहूँ तोर बखान।।

तोर दिये आशीष ले, बढ़िस कलम के मान।
मोर लेखनी मा बसे, अउ तहि दे पहचान।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
जिला बेमेतरा (छ. ग.)

26 नव॰ 2020

हेम के कज्जल छंद

भाजी
खूब विटामिन भरे पाव।
ताजा भाजी टोर लाव।
अपन बने सेहत बनाव।
भाजी पाला रोज खाव।

योग
करलव बढ़िया रोज योग।
होत बिहनिया करव भोग।
होवय तन हर जी निरोग।
भारत मा हो स्वस्थ्य लोग।


छत्तीसगढ़ी भाखा
भाखा ला जी अपन जान।  
आही फेर नवा बिहान।
छत्तीसगढ़ी रखव मान।
बोलव सबो अपन जुबान।


गुरतुर भाखा
गुरतुर भाखा सदा बोल।
मनमा तँय झन जहर घोल।
तोर शब्द के हवय मोल।
अपन बात रख तोल तोल।


घड़ी
देख समय के अंतराल।
डिब्बा अंदर के कमाल।
टिकटिक घूमे चक्र काल।
समय बतावत चले चाल।
-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र-01
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

14 अग॰ 2020

अमर अटल बनहूँ फौजी (हेम के कुकुम्भ छंद)

कहिथे नोनी सुन दाई ला, अमर अटल बनहूँ फौजी।

अपन देश के रक्षा खातिर, करहूँ मँय हर मन मौजी।।


मोरो रग रग मा भारत हे, बनहूँ मँय हर मर्दानी।

सब दुश्मन ले लोहा लेहूँ, बन मँय झाँसी के रानी।।


जय भारत जय भाग्य विधाता, रोजे मँय गावँव गाथा।

हे भारत भुइँया महतारी, अपन लगालँव तोला माथा।।


बइरी मन के काल बनव मँय, घुसे नहीं सीमा द्वारी।

खड़े तान के सीना रइहूँ, सौ सौ झन बर मँय भारी।।


काली दुर्गा रणचंडी बन, बइरी ला मार भगाहूँ।

भारत के वीर तिरंगा ला, सदा सदा मँय लहराहूँ।।


अटल खड़े रइहूँ पहाड़ जस, अपन देश के मँय सीमा।

देख देख बइरी मन भागय, ताकत रखहूँ जस भीमा।।


दुश्मन कतको मार भगाहूँ, रहूँ एकदम मँय चंगा।

मर जाहूँ ता पहिरा देबे, मोला तँय कफन तिरंगा।।


जय भारत जय भारतीय के, बोले दुनिया जयकारा।

अपन वीर बलिदानी मन के, गूँजय सबो डहर नारा।।


-हेमलाल साहू

छंद साधक सत्र-01

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

27 जुल॰ 2020

मोर परिचय ( हेम के दोहे)

सोनमती दाई हरे, देवय मया दुलार।
बैसाखू मोरे ददा, करथे मया अपार।।

दसरू के नाती हरव, बेटा आँव किसान।
पर सेवा उपकार मा, बसथे मोर परान।।

गिधवा हावे गाँव जी, हेमलाल हे नाव।
आय जिला बेमेतरा, माटी माथ लगाव।।

चिरई चुरगुन हा करे,  जिहाँ बसेरा जान।
चना उँहारी संग मा, बोवय सुघ्घर धान।।

-हेमलाल साहू 
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ.ग.) 

गहना ( हेम के दोहे)

माथे साजे बिंदिया, गला गजमुखन हार।
कनिहा मा करधन रहें, सोला कर सिंगार।।

लाल पटा अउ बिंदिया, चूरी लाली रंग।
लाली माहुर पाँव के, होठ गुलाबी संग।।

रुपया टोड़ा ला पहिर, देख जाय बाजार।
ऐंठी लच्छा संग मा, लेवत नथली हार।।

बिछिया फूली रुपया, देख देख मन भाय।
पहिर नाग मोरी सुता, रानी बन ओ आय।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

जनभाषा (हेम के दोहे)

सुघ्घर राख बिचार ला, सबके मन ला भाय।
लिखबो जन भाषा बने, सबला बने मिठाय।।

शब्द सहज दोहा सरल, जगा छंद के भाग।
सूर ताल बढ़िया रहे  धरके गावव फ़ाग।।

भाषा छत्तीसगढ़ के, होवय संगी पोठ।
बोल मया के बात ला, गुरतुर लागे गोठ।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

पहनावा (हेम के दोहे)

लुगरा छाया पोलखा, पहनावा हे जान।
धोती कुरता हा रहे, पुरखा के पहचान।।

पहली के पहनाव मन, नन्दावत हर गाँव।
अबतो खुमरी के कभू, मिले इहाँ ना छाँव।।

लुगरी धोती मन गये, देख सबो अब लुकाय।
सूट पीस अउ जीन्स हा, अब सबला हे भाय।।

नोनी पहिरे फ्रॉक अउ, पहिरे फाफे पेन्ट।
जावत रद्दा बाँट मा, सींच सींच के सेन्ट।।

धोती कुरता छोड़ के, पहिरत जींसे टाप।
लाल सरम ला बेच के, बने ब्रिटिश के बाप।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

मातर मड़ई (हेम के दोहे)

राउत निकले देख ले, लउठी धरके हाथ।
दोहा पारत जात हे, हावय मड़ई साथ।।

लउठी चाले हाथ मा, चलै अखाड़ा खेल।
देखइया मन आय हे, कतका ठेलम ठेल।।

मड़ई मातर निक लगे, राउत भैया तोर।
राउत नाचा संग मा, लावव नव अंजोर।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

गुरु (हेम के दोहे)

सुन के गुरु बानी मिटै, मन के माया हेम।
धुलथे मनके पाप हा, बाँच जथे बस प्रेम।।

अहंकार जबले बढ़ै, जग मा होय विनास।
ककरो नइहे फायदा, छोड़ अहम के दास।।

चलबो गुरु के नाँव मा, हमतो होय सवार।
डुबती नइया ले करें, भव सागर ले पार।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

तुरते ताही

धरहूँ माटी भेस 🌿

‎धरके माटी भेस 🌿 ‎ ‎चिमनी के बाती कस जरके, ‎अँधियार ला हरावँ। ‎दया-मया के आखर भर के, ‎सबके बात सुनावँ।। ‎ ‎छत्तीसगढ़ी के माटी मा, ‎अपन पसीन...