27 जुल॰ 2020

गुरु (हेम के दोहे)

सुन के गुरु बानी मिटै, मन के माया हेम।
धुलथे मनके पाप हा, बाँच जथे बस प्रेम।।

अहंकार जबले बढ़ै, जग मा होय विनास।
ककरो नइहे फायदा, छोड़ अहम के दास।।

चलबो गुरु के नाँव मा, हमतो होय सवार।
डुबती नइया ले करें, भव सागर ले पार।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

कोई टिप्पणी नहीं:

तुरते ताही

‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद)‎

‎हास्य कविता  ‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद) ‎ ‎एक्के झन हे मोर मयारू, सुरता आवय रतिया। ‎सुनलव मोर मया के किस्सा, नाव हवे फुलमतिया।। ‎ ...