हरे अनमोल हीरा ओ, कमाथे जे किसानी ला।
नफा सूझे कहा भैया, इहाँ ओ अन्न दानी ला।।
कमाये पेर जाँगर ओ, सहे गा घाम पानी ला।
बहाये तन पसीना ओ, खपा देये जवानी ला।।
*-हेमलाल साहू*
छन्द साधक, सत्र -1
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा
जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
धरके माटी भेस 🌿 चिमनी के बाती कस जरके, अँधियार ला हरावँ। दया-मया के आखर भर के, सबके बात सुनावँ।। छत्तीसगढ़ी के माटी मा, अपन पसीन...
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