19 फ़र॰ 2022

*हेम के विधाता छन्द (किसान)*

हरे अनमोल हीरा ओ, कमाथे जे किसानी ला।
नफा सूझे कहा भैया, इहाँ ओ अन्न दानी ला।।
कमाये पेर जाँगर ओ, सहे गा घाम पानी ला।
बहाये तन पसीना ओ, खपा देये जवानी ला।।

*-हेमलाल साहू*
छन्द साधक, सत्र -1
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

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तुरते ताही

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