17 फ़र॰ 2022

हेम के सरसी छन्द (बसन्त ऋतु)

आगे हे राजा बसंत ऋतु, सबके मन ला भाय।
रंग बिरंगी जग मा सुघ्घर, छटा प्रकृति के छाय।।

झुमके काँदी करथे स्वागत, फूल देख मुस्काय।
चिरई चिरगुन घूम घूम के, संदेशा बगराय।।

गोंदा चम्पा अउ चंदैनी, बगिया ला महकाय।
मस्त मगन भौरा नाचे, देख खूब इतराय।।

सरर सरर चलथे पुरवइया, बहिथे चारो ओर।
तरिया अउ नदिया के पानी, मारे देख हिलोर।।

धीरे धीरे आमा मउरे, कोयल गावय गीत।
लाली लाली परसा फूले, जागे सबके प्रीत।।

पीयर पीयर सरसो फूले, छाये मन उल्लास।
रुख राई के हरियर पाना, लाये नव उज्जास।।

- हेमलाल साहू
छन्द साधक, सत्र-1
ग्राम- गिधवा, जिला बेमेतरा

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