23 अग॰ 2021

हेम के कुण्डलिया (राखी)

बहनी राखी ला धरै, मइके आय दुवार।
भैया के मन भात हे, देवत मया दुलार।।
देवत मया दुलार, हाथ मा पहिने राखी।
नाता हे अनमोल, मया के बाँधे साखी।।
दे दव रक्षा वचन, मान लव मोरो कहनी।
लक्ष्मी बनके भाग्य, आय भाई घर बहनी।।
-हेमलाल साहू
छंद साधक, सत्र-1
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा

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