4 जन॰ 2020

हेम के ताटंक छंद

किसम किसम के खेल ल खेलन, मिलके बाँटी भौरा।
बचपन  के  सुरता  आवत हे,  महावीर  गौरा  चौरा।1।

रेस टीप  अउ खोखो  ठप्पा, पचरंगा  गिल्ली डंडा।
पतरगढ़ी फुगड़ी खेले बर, अपनावन कतको फंडा।2।

देख सबो झन जुरियावन जी, रवि बंटी बल्ला बल्लू।
खेलन खेल ल मिलके संगी, सँग दादू लल्लू कल्लू।3।

रोज चलावन साईकिल ला, सबो गली अउ मोहल्ला।
एक एक रुपया ला माँगन, डारन बर पैसा गल्ला।4।

कूद कूद के भैसा धोवन, देवय बाबा हा पैसा।
खेले कूदे बर तरिया मा, बोरव कतको ले भैसा।5।

देख जवाना बदलत हावय, अब सब्बो हा नंदागे।
लइका से लेके सियान मन, मोबाइल मा फंदागे।6।

धरके मोबाइल ला चुपकन, कुरिया मा सब धंधागे।
तइहा के खेल ल नइ पावस, गेम वीडयो के आगे।7।

छोड़ वीडियो टीवी के लत, बने राख मन ला चंगा।
खेल कूद के बढ़िया संगी, नहा कठौती जी गंगा।8।

-हेमलाल साहू
ग्राम -गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील- नवागढ़, जिला- बेमेतरा

30 नव॰ 2019

हेम के दोहे

मनखे मनखे एक हन, काबर करथच भेद।
जात पात ला देख के, तोला काबर खेद।1।

गाँव शहर सब एक हो, जात पात ला छोड़।।
भाई चारा ला  बढ़ा,  सबसे  नाता  जोड़।2।

करथे देश समाज ला, देखव नशा उजाड़।
नशा नाश के जड़ हवे, एला फेक उखाड़।3।

बेटी घलोक कम नहीं, झन रख मन मा धोख।
बेटी  बेटा  एक  हे,  मरवा  झन  तँय  कोख।4।

सोच समझ अच्छा बुरा, सत रस्ता अपनाव।
देख परक के देश मा, मुखिया ला चुन लाव।5।

गाँव शहर मिलके सबो, शिक्षा ला बगराव।
सुम्मत के रस्ता बना, भोर नवा ले आव।6।

जिनगी के दिन चार हे, सब बर हे अनमोल।
मन के कड़ुवा फेक के, गुरतुर बोली बोल।7।

सबला मानिस एक हे, बाँट मया के खीर।
बाबा घासीदास हो, या हो संत कबीर।8।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

30 सित॰ 2019

सरसी छंद *दाई*

सजगे दाई तोर दुवरिया, गूँजत हे जयकार।
लाली लुगरा पहिरे दाई, किसम किसम के हार।।

आगे हावय नव दिन के ये, सुघ्घर ओ नवरात।
रिगबिग रिगबिग दीया बरथे, महिमा तोरे गात।।

नव दिन ले रखथे जी सुघ्घर, दाई के उपवास।
तन मन अर्पित करके लोगन, रहिथे दाई पास।।

पान सुपारी नारियल चढ़ा, पूजा करथे तोर।
मन के मनोति ला ओ माँगय, हाथ ल दूनो जोर।।

मादर डोलक झांझ मँजीरा, सुघ्घर हवय बजात।
लगे हवय सेवा मा सेउक, तोर भजन ला गात।।

काली दुर्गा लक्ष्मी देवी, सबला जानव एक।।
दाई बहनी दीदी बेटी, हावय रूप अनेक।।

महिमा गावत हावव दाई, कर दे जग उद्धार।
नइया पार लगा दे सबके, तहि जग तारन हार।।

जियत मरत ले तोर संग हे, जग मा नाता मोर।
पर सेवा पर उपकार करव, ले के नावे तोर।।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा

27 अग॰ 2019

*हाकलि छन्द* बरखा रानी

कसके पानी ला गिरा, बरखा रानी झन थिरा।
सुघ्घर आँव मया रखबे, दुख पीड़ा हमरो हरबे।।

दाना पानी कहाँ मिले, तोर बिना ये जगत हिले।
सुख्खा खेती खार परे, बिन पानी सब जीव मरे।

मनखे जम्मो गुनत रही, तोर बिना उद्धार नही।
नदिया नरवा कहाँ बहे, सुख्खा ओ बिन तोर रहे।।

रुख राई मुर्झावत हे, पानी बिन अइलावत हे।
चिरई मन अकुलावत हे, सब बरखा ल बुलावत हे।

सबके मन मुस्कान फिरे, कसके पानी फेर गिरे।
आके जग हरियर कर दे, अबतो तँय पानी भर दे।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

31 मई 2019

पादाकुलक छन्द

झरझर झरझर झाँझे लागे,
दिन हा नवतप्पा के आगे।
सूरज हा आगी बरसावे,
पाँव जरत भुइँया मा हावे।1।

होत बिहनिया घाम जनावे,
ठण्ठा जिनिस घूब मन भावे।
प्याज ल धरके घर ले जाथे,
नवतप्पा ले जौन बचाथे।2।

रस्ता मन हा परगे सुन्ना,
खोर गली झन जाबे मुन्ना।
कहिथे महतारी सुन दादू,
नवतप्पा कर देही जादू।3।

लगवा देही लू बीमारी,
धर लेबे तँय खटिया भारी।
रहिबे मंझनिया घर द्वारी,
आय नहीं गा लू के पारी।4।

कर लेबे थोकुन उपकारी,
पेड़ लगा ले घर अउ बारी।
नवतप्पा हा कम हो जाही,
रुख हा लू ले तोर बचाही।5।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

26 मई 2019

हेम के सरसी छंद

मोर श्रीमती जी ला जन्म दिन के हार्दिक बधाई के संग सरसी छंद समर्पित हावय......

जपव रोज के राम नाम ला, जेकर हावय प्रीत।

सुघ्घर जोड़ी मोरो हावय, जिनगी भर के मीत।1।


दया मया के भाव धरे हे, सुशील अउ संजोर।

गोरी नारी सुघ्घर हावय, चुक ले सजनी मोर।2।


पढ़े लिखे हावय सुघ्घर जी, बी ए ओ कालेज।

काम सिलाई के करथे रख, ब्यूटी के नॉलेज।3।


सबले छोटे घर के लइका, पाय मया के छाँव।

नाम निर्मला साहू जेकर, हरय देवरी गाँव।4।


लक्ष्मी बनके घर आइस हे, खुले भाग हा मोर।

घर मा खुशियाँ छागे बढ़िया, जग लागे अंजोर।5।


इरखा ले दुरिहा रहिके ओ, बनही घर के शान।

मान बढ़ावै कुल के सुघ्घर, पावय नित सम्मान।6।


अरजी हावय मोरो सुनले, जग तँय हर भगवान।

सुख दुख मा साथ रहय ओ, मोर बने वरदान।7।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा

तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

20 फ़र॰ 2019

हेम के कुण्डलिया

रखहूँ मँय हर मान ला, मत रो दाई मोर।
मुख के भाषा मोर तँय, मया राखहूँ तोर।।
मया राखहूँ तोर, करव झन गुस्सा दाई।
जिनगी के आधार, तोर सँग मोर भलाई।।
कहत हेम कविराय, मया मँय नित करहूँ।
गाके महिमा तोर, मान ला मँय हर रखहूँ।।
-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

31 अक्टू॰ 2018

मोर माटी

छत्तीसगढ़ी मा करवँ, मँय जिनगी भर गोठ।
मोर बढ़े नित ज्ञान हाँ, होवय भाखा पोठ।।

मोर माटी मोर हावय, देख ले अभिमान रे।
मोर जिनगी बर बने हे, आज जे वरदान रे।।
देख करथौ गान ला मँय, नित धरे मन राग रे।
नाम जेकर जाप करथौ, मोर जागय भाग रे।।

-हेमलाल साहू
ग्राम-गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

6 अक्टू॰ 2018

सरसी छंद (गीत- मोर मया के)

मोर मया केे सुनले गोरी, तँय हर दिल के बात।
तोर मया के छीन छीन ओ, सुरता मोला आत।।

जनम जनम के नाता हावे, मन हर गावे गीत।
तोर मोर ओ सदा सदा ले, जग मा रइही प्रीत।
गुस्सा करके मोला सजनी, तँय काबर तड़पात।
तोर द्वार मा लेके जाहू,  मयँ हर अपन बरात।1।
मोर मया केे …….......

रही रही के मोबाइल मा, मोर हाथ हा जात।
तोला देखें बर मोरे मन, कइसन हे अकुलात।
तोर सुरतिया हा आँखी मा, आके बड़ तरसात।
राख मया ला दिल मा गोरी, काबर हवस भगात।2।
मोर मया केे …….......

गुरतुर बोली तोरे सुघ्घर, दिल ला मोरे भाय।
रोज तोर ओ सुरता करके, आँसू मोर बहाय।।
जोहत रहिथव तोला मँय हर, दिन होवय या रात।
तोर पाँव के पैरी बाजय, सुन मन हा हरषात।3।
मोर मया केे …….......

मोला बड़ तो आस हवय ओ, आबे मोरे संग।
गुस्सा ला तँय अपन छोड़के, जिनगी भर दे रंग।
रद्दा देखव घड़ी घड़ी मँय, जिनगी ला पहवात।
मोला दाना पानी कुछु भी, अब नइ हवे सुहात।4।
मोर मया केे …….......

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

27 अग॰ 2018

हेमलाल साहू के चौपाई छंद

मच्छर अपन जहर फैलावत। गाँव शहर के घर घर जावत।
डेंगू के बीमारी बगरावत। कहर मौत के हे बरपावत।1।

देख राज मच्छर के आगे। तोर स्वच्छता कहाँ गवागे।
रोज एक झन ला मरना हे। मच्छर के तो ये कहना हे।2।

रहे गन्दगी गाँव शहर मा। रइहव सबके मयँ घर घर मा।
जिनगी मोर गंदगी अंदर। कहिथे मच्छर जंतर मंतर।3।

जात पात ला मँय नइ देखव। थोर थार सफई नइ घेपव।
गन्दा में हे रहना बसना। सबो डहर हे मोर बिछवना।4।

हवे गन्दगी दुनिया भर के। गाँव शहर मा देखव कसके।
कहाँ स्वच्छता तोर लुकागे। भुन भुन बोले मच्छर भागे।5।

फेंक गन्दगी घर के अँगना। जन कहिथे हमला का करना।
अब मच्छर के होंगे बढ़ना। हवे गन्दगी मा ओला रहना।6।

नेता मंत्री मन ला का करना। उनला तो कोठी हे भरना।
रहिस स्वच्छता चारे दिन के। फेर बइठ गे पैसा बिन के।7।

बनिस हवे सब घर सौचालय। काम अधूरा ला करवावय।
रख रखाव ला नइ बनवावय। गली गन्दगी हा बोहावय।8।

हाल गाँव मन के अब देखव। स्वच्छ गन्दगी मा जी  रेगव।
गाँव गली घर मच्छर बसगे। डेंगू के प्रकोप सब बनगे।9।

डेंगू ले पाबे तँय काबू। अपन स्वछता मा रख बाबू।
दूर भागथे जी बीमारी। राख स्वच्छ घर अँगना बारी।10।

22 अग॰ 2018

सरकार के संचार क्रांति योजना

आगे जी संचार क्रांति हा, होही खूब विकास।
मनखे सबो आलसी बनही, करही टाइप पास।1।

घर घर बाँटे मोबाइल ला, रमन कका हा भेज।
जम्मो लाभार्थी लेवत हे, बिना करे परहेज।2।

ढकोसला संचार क्रांति के, अपन गिनावत काज।
सस्ता मोबाइल ला देके, अपन करत हे राज।3।

करबे तँय विकास के सुघ्घर, मीठा मीठा गोठ।
सरकारी लूट खजाना ला, गोठी भरले पोठ।4।

ब्लास्ट आज मोबाइल होवत, देख क्रांति संचार।
जान भले जावय जनता के, उनला सत्ता प्यार।5।

भुला जही दू दिन बाद सबो, होइस अत्याचार।
फेर वोट हा उनला मलही, बनही जी सरकार।6।

पानी बिन किसान हा रोये, सुख्खा हावय खेत।
मरना हावय सब किसान ला, लेवत नइहे चेत।7।

मोबाइल ला हमला दे के, हमर चुकादिस नून।
आगे अब चुनाव हा बढ़िया, फेर रमन ला चून।8।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा

11 अग॰ 2018

ताटंक छन्द -मया के सुरता

गोरी तोर मया के सुरता, रही रही के आथे ओ।
तोला देखे बर आँखी हाँ, ये मोर तरत जाथे ओ।1।

तोर बिना जग सुन्ना लागे, कुछु मोला नइ भावे ओ।
रात मोर बर बइरी होगय, नींद कहाँ ले आवे ओ।2।

काबर हवस रिसाये गोरी, काबर तँय गुस्साये ओ।
मोला रोज हँसाके तँय हर, काबर अब रोवाये ओ।3।

काम बुता मा मन नइ लागे, खावत हव मँय गारी ओ।
तोर बिना हे मोर अधूरा, सुनले जिनगी सारी ओ।4।

बात मान ले मोर आज तँय, सँग जीबो सँग मरबो ओ।
सुघ्घर जिनगी हमन बिताबो, एक संग जब रहिबो ओ।5।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा
तहसील- नवागढ़, जिला- बेमेतरा
छत्तीसगढ़ मो. 9977831273

10 अग॰ 2018

हरेली तिहार सरसी छंद

हरियर हरियर डारा पाना, हरियर दिखथे खार।
आगय आगय हमर हरेली, पहली आज तिहार।1।

नोनी बाबू अउ सियान मन, होंगे गा तैयार।
कोरे गाँथे बड़ चुकचुक ले, बइठे तरिया पार।2।

लीपे पोते घर अँगना ला, साफ बहार बटोर।
लाही घर मा हमर हरेली, सुघ्घर नव अंजोर।3।

नागर अउ बइला ला धोये, धोये सब औजार।
नवा नान के माटी बढ़िया, पूजा करे अपार।4।

भोग लगाये गुड़हा चीला, नरियर बेला फोर।
लइका मन हा गेड़ी चढ़हे, गाँव गली अउ खोर।5।

डारा खोंचय नीम घरों घर, राउत आज हमार।
चौखट मा खीला ठोकय, घर घर मा सोनार।6।

सबो गाय गरुमन ला लाके, लोदी बना खवाय।
फूँक झार के मंतर मारय, रोग कभू झन आय।7।

जादू टोना दूर रथे जी, बइगा बाँधय गाँव।
बर पीपर के पूजा करथे, मिले सदा जी छाँव।8।

नरियर भेला फेक खेलथे, अउ खेले छू छुवाल।
खुशी खुशी ले देख हरेली, सब मनाय हर साल।9।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

18 मई 2018

हेम के कुण्डलिया

भाई सुनले गोठ ला, बने लगा के चेत।
बीड़ी गुटका संग मा, दारू जीवे लेत।।
दारू जीवे लेत, काल के जानव संगी।
करथे घर ला नाश, लाय पैसा के तंगी।।
कहे हेम कविराय, नशा छोड़े म भलाई।
सुखी रही परिवार, मान ले बात ल भाई।।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. नं. 9977831273

15 मार्च 2018

हेम के छन्न पकइया छंद‎‎‎ -मितानी के मया-

‎हेम के छन्न पकइया छंद

‎मितानी के मया

‎छन्न पकइया छन्न पकइया,
‎अटूट रहय मितानी।
‎बाँधे राख मया के रिस्ता,
‎रखही मान मितानी।।

‎छन्न पकइया छन्न पकइया,
‎मिलके अलख जगाबो।
‎सुख-दुख मा बनके सँगवारी,
‎जिनगी संग निभाबो।।

‎छन्न पकइया छन्न पकइया,
‎मन के मैल भगाबो।
‎मया-नेह के फूल खिलाके,
‎जग सुवास बगराबो।।

‎छन्न पकइया छन्न पकइया,
‎आवव हाथ मिलाबो।
‎मिहनत कर सब्बो सँगवारी,
‎खुशहाली बगराबो।।

‎छन्न पकइया छन्न पकइया,
‎रचबो नवा कहानी।
‎मोर मयारू मितवा-हितवा,
‎बनही मया निशानी।।

‎रचनाकार-हेमलाल साहू

‎गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा



10 मार्च 2018

हेम के कुण्डलिया(बेटी)


बेटी घर के शान ये, देवव मया दुलार।
लक्ष्मी दुर्गा अउ हरे, सीता के अवतार।।
सीता के अवतार, मान बेटी के राखव।
देवव गा सम्मान, भेद भाव झने मानव।।
कहे हेम कविराय, धरे सुख के जी पेटी।
जग बर हे अनमोल, शान ये घर के बेटी।।
-  हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा 
छत्तीसगढ़ पिन- 491340

हेम के कुण्डलिया

दाई   बाबू   मोर   हे,  चारो   तीरथ  धाम।
रोजे साँझ बिहान गा, जेकर  जपथौ नाम।
जेकर जपथौ नाम, करँव मयँ हर जी पूजा।
मानव  मयँ  भगवान, अऊ  नइ हावे दूजा।
कहत  हेम  कविराय, बात  मानव  रे भाई।
हावय  जग  अनमोल, जान  ले  बाबू दाई।।
-  हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा 
छत्तीसगढ़ पिन- 491340

8 मार्च 2018

(*त्रिभंगी छंद*) नारी

सबके महतारी, जग मा नारी, ओकर मयँ नित, मान रखवँ।
हे राज दुलारी, सबके प्यारी, जेकर मयँ नित, गान करवँ।।
कहिथे जग तरनी, विपदा हरनी, जेहर महिमा, सार हवय।
नित आगू जावय, नाम कमावय, जग के ओहर, भार हरय।।
*-हेमलाल साहू*
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831273

13 फ़र॰ 2018

*इंटरनेट*(हेम के कुण्डलिया)

जबले गा आइस हवे, जग मा इंटरनेट।
जग हा समटागें हवे, करले सबसे चेट।।
करले सबसे चेट, कहा दुरिहा अब हावय।
करके मेल मिलाप, ठसन ले गोठीयावय।।
पूछय जम्मो हाल, भेंट ला करके सबले।
बाँधय इंटरनेट, मोह मा आइस जबले।।
-  हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा 

*शिव भोला*(हेम के कुण्डलिया)

सुनले शिव भोला बने, करत हवव गोहार।
तोर शरण मा आय हव, करदे नइया पार।।
करदे नइया पार, रहे ना मन अभिलासी।
जग के तारन हार, तही घट घट के वासी।।
कहत हेम कविराय, मैल ला मेटव मनले।
कण्ठ बिराजव मोर, बने शिव भोला सुनले।।

- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा 

5 फ़र॰ 2018

हेम के कुण्डलिया

सुनले बैसाखू कका, बिगड़े घर तन खेत।
बरबाद करँय ये नशा, बने लगा ले चेत।
बने लगा ले चेत,  रोग लावय गा भारी।
रहय न घर अउ घाट, संग रहिथे लाचारी।
कहत हेम कविराय, बने तँय एला गुनले।
नशा काल के जाल, कका बैसाखू सुनले।
- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा 

6 जन॰ 2018

हेम के दोहे

1)
खुल्ला हरव किताब मँय, पढ़के लेबे देख।
हेम मोर नावे हवे, लिखथव कविता लेख।।
2)
नगधा मोरे पोस्ट हे, गिधवा हावय गाँव।
जिला हवय बेमेतरा, जिहाँ मया के छाँव।।
3)
महमाया दाई रखे, किरपा अपन अपार।
जेकर महिमा गाव मँय , देवय मया दुलार।।
4)
बी ए हावव मँय पढ़े, जाके जी कालेज।
कम्प्यूटर के ज्ञान हे, अउ जरनल नॉलेज।।
5)
सँगवारी मन के बने, करथव मँय हा सोर।
जिनगी भर सुरता रहे, बाँध मया के डोर।।
6)
सीधा साधा भोकवा, मोला संगी जान।
छत्तीसगढ़ी मोर गा, बोली हे पहचान।।
7)
नान्हे पन के जे बने, हावय मोर मितान।
महतारी भाखा हवे, जग मा मोर महान।।
8)
सुघ्घर भाषा मोर हे, रखथव जेकर मान।
मीठ मीठ बोली हवे, जेकर करव बखान।।
9)
काबर करथे लोग हा, भाषा के अपमान।
छत्तीसगढ़ी मा भरे, कतको हावय ज्ञान।।
10)
विनती करथे हेम हा, मन के आपा खोल।
लाज सरम ला छोड़ के, छत्तीसगढ़ी बोल।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

4 जन॰ 2018

*सुखी सवैया*


सुमता रखले घर मा बढ़िया, परिवार सुखी रइही जिनगी भर।
मिलके रहिबे सबके सुनबे, तबतो चलही भइया जिनगी हर।
रख एक बरोबर गा सबला, इहि मान कमालव जी जिनगी बर ।
तँय राख दुलार बने सबला, सुन सुघ्घर जाहय ये जिनगी तर।

गुटखा मुँह मा भर खावय जी, अपने जिनगी बर काल बलावय।
मुँह भीतर मा सिगरेट धुँआ, अबड़े नुकसान नशा पहुँचावय।
बनथे तन हा गढ़ जेकर गा, अउ रोग बियाधि सबो सकलावय।
जिनगी बिरथा तब जान सखा, बनके जब काल नशा हर आवय ।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

28 दिस॰ 2017

*अरविंद सवैया*

1)
मनखे मन काँटिच हे बन ला, टँगिया हँसिया धरके हर साल।
निमगा पुरवा नइ पावच गा, बनगे जिनगी बर ओहर काल।
तरिया नदिया डबरा पटगे, पनिया बिन रोवत हे सब ताल।
बढ़िया रुखवा ल लगा बन मा, जिनगी बर ये बनही अब ढाल।
2)
गुरु के महिमा तँय गावत गा, बढ़िया मनमा भजले सतनाम।
मनखे मनखे सब एक हवे, सुभ भाव भरे कहिले सतनाम।
तँय मान बने कहना भइया, जिनगी भर जी धरले सतनाम।
दुख दारिद रोग सबो मिटथे, मनमा रखके जपले सतनाम।
3)
पहली चल आवव गा रखबो, हम साफ बने अँगना घर द्वार।
चमके बढ़िया हर खोर गली, सब साफ रहे तरिया अउ पार।
मिलके सब गा सहयोग करौ, अभियान चलाय हवे सरकार ।
तन स्वस्थ रहे मन स्वच्छ रहे, सबके घर हो सुख से परिवार।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

14 दिस॰ 2017

*(सुन्दरी सवैया छन्द)*


1)
सुनके रहिबे गुनके चलबे, तबतो बढ़िया जगमें रहि पाबे।
चल जाँगर पेर बने कसके ,नइ तो जिनगी भर गा पछताबे।
करले तँय दान दया बढ़िया, सुन ले भइया बड़ पुण्य कमाबे ।
जपले मनमा हरि नाम बने, तँय हा भइया जग ले तर जाबे।

2)
चल रे मितवा चल रे हितवा, मिलके सब मा नव जोश बढ़ाबो।
चल भारत ला बढ़िया भइया, मिलके हम साक्षर देश बनाबो।
सब ज्ञान बने हमला मिलही, चलना भइया मन द्वार जगाबो।
पढ़बो लिखबो गढ़बो बढ़िया, अउ जी सबला हम फेर पढ़ाबो।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

*शक्ति छन्द*  

1)
बने साफ हो जी गली खोर हा।
तभे गाँव आही ग अंजोर हा।
रहे गाँव मा जी सदा रीत हा ।
बसे हे घरो घर मया प्रीत हा।

2)
मया ले मया दे, रहे मीत हा।
बहे धार चारो, डहर प्रीत हा।
दया राख मनमा, कहे रीत हा।
बने भाय सबला, इही हीत हा।
3)
करव जाप मन मा, बसा राम ला।
अपन छोड़ चिंता, करव काम ला।
सबो आव रहिबो, बने साथ मा।
जगा मेहनत ला, अपन हाथ मा।
4)
रँगव मेहनत के, सदा रंग मा।
रहव साथ मिलके, सबो संग मा।
कला ला बनाले, सँगी तोर गा।
रहे फेर सुख के, सदा भोर गा।

5)
करँव तोर दाई सदा भक्ति ला।
बढ़ा मोर मन के सदा शक्ति ला।
चलव नेक रस्ता मने ठान के।
बढ़य मोर अंजोर हा ज्ञान के।

6)
किसानी जुबानी, रखे मान ला।
सबो जात हावय लुये धान ला।
ददरिया हवे गात जी आन मा।
रखे हाथ हँसिया चले शान मा।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

29 नव॰ 2017

*कज्जल छन्द*

पावन छत्तीसगढ़ मोर।
मया दया ला रखे जोर।
हवे किसानी के सोर।
संग मितानी रहे तोर।

देव विराजे इहाँ जान।
साधु संत के हवे मान।
भुइँया के हावे किसान।
कहिथे जेला ग भगवान।

बइला जेकर हे मितान।
जाँगर हावे ग पहचान।
बोय उन्हारी अऊ धान।
भुइँया हावय ये महान।

भाखा हावय मीठ मोर।
लागे गुरतुर मया लोर।
ये भुइँया के रहे सोर।
जग मा लाही नव अँजोर।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

28 नव॰ 2017

*कुकुभ छन्द*

छत्तीसगढ़ी बोली भाखा, बड़ गुरतुर मोला लागे।
जन्म जन्म के रिश्ता हावे, जेला मोरे मन भागे।

मोर हवय जे दाई भाखा, मानव जेला भगवाने।
मीठ मीठ अउ गुरतुर बोली, बोलव जी सीना
ताने।

नाचत पन्थी अऊ सुवा ला, करथन जेमा गुनगाने।
राग ददरिया करमा सुघ्घर, भाषा दे हे पहचाने।

दान दया ला राखे सुघ्घर, मया प्रीत ला हे बाँधे।
करम धरम के गुन ला गाथे, राम नाव ला हे साधे।।

फेर देख हालत भासा के, आँखी ले आँसू आथे।
हमर शहर ला हमरे भाखा, काबर अइसन नइ भाथे।

छोड़व मन के संका अबतो, राज काज देवव मोरो।
पढ़ लिख ले दाई भाखा मा, भाग जागही अब तोरो।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

24 नव॰ 2017

*मोद सवैया* (छन्द)

1)
बालक छोट रहे हम खेलन कूदन जी धुर्रा अउ माटी।
जावन होत बिहान धरे थइली भर जी भौंरा अउ बाँटी।
नाचत कूदत खूब मजा लन जी पहिरे माला गर घांटी ।।
देवन जी सँगला बढ़िया अउ जावन गा संगी बन खाँटी।
2)
खेलन जी मिलके कतको ठन खेल ल गा पारी  दर पारी।
रेलम रेस ल खेलन दाम ल देवन जी संगी सँगवारी।
खेलन खेल ल जेकर हे महिमा जग मा संगी बड़ भारी।।
खोजन ढूढन खोर गली अउ जी सबके कोठा घर बारी।
3)
पाँव परे जयकार लगावय जी भुइँया के मोर किसाने।
राग बने धरके भइया करथे भुइँया के रोज बखाने।
धान लुये बर जात हवै धरके हँसिया ला मोर मिताने।
देखव खोर गली अँगना परगे सब सुन्ना होत बिहाने।
4)
गागर मा भरले तँय सागर ज्ञान ल भैया तोर बढ़ाके।
बाँटव सुघ्घर ज्ञान ल ये जग मा मनके दीया ल जलाके।
रोवत गावत ये दुखहारिन ला बढ़िया जी संग हँसाके।
दान दया धरके रखबे बढ़िया तँय भैया संग जगाके।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

31 अक्टू॰ 2017

त्रिभंगी छन्द

जय जय हो भुइँया, परथँव पँइया, रोजे तोरे, ध्यान धरँव।
मोरे महतारी, तँहि सँगवारी, अपन राज के, मान रखँव।।
बाढ़य गरिमा, गावँव महिमा, दाई जब मँय, गान करँव।
मन ला मँय खोलँव, भाषा बोलँव, इँहचे के ए, मोर कहँव।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831273

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‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद)‎

‎हास्य कविता  ‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद) ‎ ‎एक्के झन हे मोर मयारू, सुरता आवय रतिया। ‎सुनलव मोर मया के किस्सा, नाव हवे फुलमतिया।। ‎ ...