10 मार्च 2018

हेम के कुण्डलिया

दाई   बाबू   मोर   हे,  चारो   तीरथ  धाम।
रोजे साँझ बिहान गा, जेकर  जपथौ नाम।
जेकर जपथौ नाम, करँव मयँ हर जी पूजा।
मानव  मयँ  भगवान, अऊ  नइ हावे दूजा।
कहत  हेम  कविराय, बात  मानव  रे भाई।
हावय  जग  अनमोल, जान  ले  बाबू दाई।।
-  हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा 
छत्तीसगढ़ पिन- 491340

कोई टिप्पणी नहीं:

तुरते ताही

‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद)‎

‎हास्य कविता  ‎मोर मया के किस्सा (हेम के सार छंद) ‎ ‎एक्के झन हे मोर मयारू, सुरता आवय रतिया। ‎सुनलव मोर मया के किस्सा, नाव हवे फुलमतिया।। ‎ ...