हेम के छन्न पकइया छंद
मितानी के मया
छन्न पकइया छन्न पकइया,
अटूट रहय मितानी।
बाँधे राख मया के रिस्ता,
रखही मान मितानी।।
छन्न पकइया छन्न पकइया,
मिलके अलख जगाबो।
सुख-दुख मा बनके सँगवारी,
जिनगी संग निभाबो।।
छन्न पकइया छन्न पकइया,
मन के मैल भगाबो।
मया-नेह के फूल खिलाके,
जग सुवास बगराबो।।
छन्न पकइया छन्न पकइया,
आवव हाथ मिलाबो।
मिहनत कर सब्बो सँगवारी,
खुशहाली बगराबो।।
छन्न पकइया छन्न पकइया,
रचबो नवा कहानी।
मोर मयारू मितवा-हितवा,
बनही मया निशानी।।
रचनाकार-हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा
1 टिप्पणी:
बहुत सुन्दर रचना हेम भाई बधाई हो।अउ मोर शुभकामना हे अइसने आगू बढ़त रहव।
एक टिप्पणी भेजें