सबके महतारी, जग मा नारी, ओकर मयँ नित, मान रखवँ।
हे राज दुलारी, सबके प्यारी, जेकर मयँ नित, गान करवँ।।
कहिथे जग तरनी, विपदा हरनी, जेहर महिमा, सार हवय।
नित आगू जावय, नाम कमावय, जग के ओहर, भार हरय।।
*-हेमलाल साहू*
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831273
जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
8 मार्च 2018
(*त्रिभंगी छंद*) नारी
तुरते ताही
हेम के दोहे (बाल जनऊला)
हेम के दोहे (बाल जनऊला) नाच नचावँन अंगरी, काम सबो के आँन। सारी जग के बात ला, ले पहुँचावँन कान।। संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस...
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