14 दिस॰ 2017

*(सुन्दरी सवैया छन्द)*


1)
सुनके रहिबे गुनके चलबे, तबतो बढ़िया जगमें रहि पाबे।
चल जाँगर पेर बने कसके ,नइ तो जिनगी भर गा पछताबे।
करले तँय दान दया बढ़िया, सुन ले भइया बड़ पुण्य कमाबे ।
जपले मनमा हरि नाम बने, तँय हा भइया जग ले तर जाबे।

2)
चल रे मितवा चल रे हितवा, मिलके सब मा नव जोश बढ़ाबो।
चल भारत ला बढ़िया भइया, मिलके हम साक्षर देश बनाबो।
सब ज्ञान बने हमला मिलही, चलना भइया मन द्वार जगाबो।
पढ़बो लिखबो गढ़बो बढ़िया, अउ जी सबला हम फेर पढ़ाबो।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

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