5 फ़र॰ 2018

हेम के कुण्डलिया

सुनले बैसाखू कका, बिगड़े घर तन खेत।
बरबाद करँय ये नशा, बने लगा ले चेत।
बने लगा ले चेत,  रोग लावय गा भारी।
रहय न घर अउ घाट, संग रहिथे लाचारी।
कहत हेम कविराय, बने तँय एला गुनले।
नशा काल के जाल, कका बैसाखू सुनले।
- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा 

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