27 जुल॰ 2020

छत्तीसगढ़ी मिष्ठान (हेम के दोहे)

रोटी चौसेला दिखे, सबके मन ललचाय।
चटनी बनय पताल के, चाट चाट के खाय।।

लाड़ू मिलै बिहाव मा, जावय सगा बरात।
सबला सँग बैठार के, लाड़ू भात खवात।।

हमरो दाई डोकरी, रोटी गजब बनाय।
संगी साथी रोज के, लुका लुका के खाय।।

टपकत हावे लार हा, सुनके सबके बात।
जागेंव अभी नींद ले, देख बिजौरी भात।।

अइसा खुरमी ठेठरी, सुघ्घर सबला भाय।
तीजा पोरा के परब, सब घर खूब बनाय।।

भजिया सोंहारी बरा, चीला मुठिया खाय।
सुरता मोला आत हे, घर मा हमर बनाय।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

कोई टिप्पणी नहीं:

तुरते ताही

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला)

‎ ‎हेम के दोहे (बाल जनऊला) ‎ ‎नाच नचावँन अंगरी, काम सबो के आँन। ‎सारी जग के बात ला, ले पहुँचावँन कान।। ‎ ‎संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस...