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सब एक हन (हेम के दोहे)

मनखे मनखे एक हन, काबर हे मन खोट।
भाई ला भाई करँय, काबर अइसन चोट।।

जाति धरम हा एक हे, काबर करथे भेद।
मानवता ला छोड़के, अन्तस करथे छेद।।

राम रहिम सब एक हे, छोड़व मनके द्वेष।
मिलके रहिबो हम सबो, होय कभू ना क्लेश।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट बेमेतरा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ.ग.)

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