26 जुल॰ 2020

धान के महिमा (हेम के दोहे)

गली खोर ममहाय जी, महके जब दुबराज।
धान महंगा आय जी, रखथे सुघ्घर साज।।

बोवय बिसनू भोग ला, मन हा देख हर्षाय।
अइस महामाया बने, कम पानी हो जाय।।

करिया करिया धान हे, कहिथे केसर नाग।
बढ़िया खेती होय गा, कचरा जावय भाग।।

सबले मोटा होय गा, रानी काजर धान।
बड़का बाली हा रहै, कूत गिये बड़ जान।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट बेमेतरा
तह. नवागढ़, जिला बेमेतरा(छ.ग.)

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