सँवरे जिनगी हा जिहाँ, पाके सुघ्घर ज्ञान।
हवय छंद परिवार हा, सबले मोर महान।
सबले मोर महान, करँव जेकर मँय पूजा।
अइसन घर परिवार, मिले ना जग मा दूजा।
बनके साधक दीप, आज जग मा हे बगरे।
अहो भाग्य हे मोर, जिहाँ जिनगी हा सँवरे।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
14 जून 2020
छंद परिवार ला समर्पित(कुंडलिया छंद)
तुरते ताही
धरहूँ माटी भेस 🌿
धरके माटी भेस 🌿 चिमनी के बाती कस जरके, अँधियार ला हरावँ। दया-मया के आखर भर के, सबके बात सुनावँ।। छत्तीसगढ़ी के माटी मा, अपन पसीन...
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