ढावत कोरोना कहर, जी के हे जंजाल।
फैलावत हे रोग ला, बनके हमरे काल।
बनके हमरे, काल आय हे, माहामारी।
मनखे रोवत, आये हावय, विपदा भारी।
गाँव शहर मा, रोगी देखव, कसके बाढ़त।
कोरोना हा, अपन कहर ला, रोजे ढावत।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
21 जून 2020
तुरते ताही
हेम के दोहे (बाल जनऊला)
हेम के दोहे (बाल जनऊला) नाच नचावँन अंगरी, काम सबो के आँन। सारी जग के बात ला, ले पहुँचावँन कान।। संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस...
-
बाबा घासीदास गा, तोर आय हव द्वार। तँय हर दीया ज्ञान के, मोरो मन मा बार।। निचट अज्ञानी मँय हवव, बता ज्ञान के सार। बाबा अड़हा जान हव, जग ले मोल...
-
निकले वापस फेर ना, आवय तोर जुबान। जइसे निकले तीर ले, आवय नहीं कमान।। आवय नहीं कमान, बात ला छेड़व गुनके। शारद दे आशीष, शब्द ला रखलव चु...
-
ढोलक तबला थाप मा, बाजय मांदर संग। नाचय साधक साधके, देखव पन्थी रंग।। बाबा घासी दास के, करथे सुघ्घर गान। गावय महिमा देखले, गुरु के करत बखान।। ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें