8 फ़र॰ 2017

बेटी (कुण्डलिया छन्द)

बेटी घर मा जनम ले, लछमी बनके आय।
बेटी हे अनमोल जी, सबके मन ला भाय।।
सबके मन ला भाय, रूप देवी के जानय।
घर मा खुशियॉ लाय, आरती मंगल गावय।।
करय गरीबी दूर,  लाय घर मा सुख रोटी।
माँगव जी वरदान, जनम ले घर मा बेटी।।

-हेमलाल साहू
ग्राम-गिधवा, पोस्ट-नगधा,
तहसील -नवागढ़, जिला-बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

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