जय जय हनुमन्ता, तँय बलवन्ता, राम भगत जग, कष्ट हरौ।
रख शक्ति अनंता, निशचर हन्ता, सबके मनके पाप हरौ।।
मोरे भगवाने, जय हनुमाने, उर म विराजे , ज्ञान भरौ।।
हे राम दुलारे, सबके प्यारे, मम उर नित तुम, वास करौ।
-हेमलाल साहू
जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
धरके माटी भेस 🌿 चिमनी के बाती कस जरके, अँधियार ला हरावँ। दया-मया के आखर भर के, सबके बात सुनावँ।। छत्तीसगढ़ी के माटी मा, अपन पसीन...
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