2 सित॰ 2016

@नांगर @ जयकारी छन्द

लकड़ी, लोहा, चमड़ा जूर।
बनथे नांगर के तो पूर।।
डाड़ी, मुठिया, नांगर रंग।
जोता, जुड़ा, नहाना संग।।

कोकी लकड़ी म लगै नास।
जेहा नांगर के हे  खास।
बइला नांगर हावय सान।
माटी रेंगे उगले खान।।

माटी जोत बोय ला धान।
अरे तता ला कहै किसान।।
नांगर मा जागे हे भाग।
चलै मुधरहा पागे पाग।।

देख बढ़ै नांगर के मान।
उगथे जी माटी मा धान।।
लछ्मी दाई हाँसय मोर।
हवे घरो घर ओकर सोर ।।

घर घर मा नांगर ला धोय।
आय हरेली पूजा होय।।
सदा चलै नांगर हा मोर।
कोनो भूखे न रहै खोर।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील -नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़), मो. 9977831273

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