16 सित॰ 2016

त्रिभंगी छंद

मन मोर गाँव ला, नीम छाँव ला, प्रेम भाव ला, याद करै।
दाई बाबू के, बंधु बहिन के, सुरता करके, नयन भरै।।
सुघ्घर हे जिनगी, नइये तंगी, मिलके संगी तीर रहै ।
घर द्वार मया के, दान दया के, नेह प्रीत के धार बहै।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छ्त्तीसगढ़) मो. 9977831273

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