17 मई 2016

हेम के दोहे

जाँगर पेरव आप मन, जाय नहीं बेकार।

लाय परिश्रम रंग जी, मानव झन जी हार।।


धरे कलम कागज महूँ, लिखहूँ सुघ्घर आज।

संगत साधक के हवे, सफल होय सब काज।।


-हेमलाल साहू

ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)

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