जाँगर पेरव आप मन, जाय नहीं बेकार।
लाय परिश्रम रंग जी, मानव झन जी हार।।
धरे कलम कागज महूँ, लिखहूँ सुघ्घर आज।
संगत साधक के हवे, सफल होय सब काज।।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा(छ. ग.)
जनम जनम के बंधना, मया प्रीत के छाँव। भुइँया के बेटा हरव, जेकर महिमा गाव।। मोर छत्तीसगढ़ी रचना कोठी।
हेम के दोहे (बाल जनऊला) नाच नचावँन अंगरी, काम सबो के आँन। सारी जग के बात ला, ले पहुँचावँन कान।। संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस...
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