19 जून 2026

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला)

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला)

‎नाच नचावँय अंगरी, काम सबो के आँन।
‎सारी जग के बात ला, ले पहुँचावँय कान।।
‎संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस।
‎हाथ लगा आवय नहीं, अंधियार मा नास।।
‎बिन संगी आधार ना, जोड़ी बिन बेकार।
‎पहरा देवय बैठ के, असली पहरेदार।।
‎बिन बोले पहिचान ले, पावय लाड दुलार।
‎चोर उचक्का देख के, भागय उल्टा द्वार।।
‎एक गोल डिब्बा भरे, बारहठन के अंग।
‎तीन सिपाही सँग चले, चढ़े समे के रंग।।
‎पन्ना अपन समेट के, भर रखथे भंडार।
‎मोती दाना खोज ले, पाबे नव उजियार।।
‎गार पसीना सींचथे, उठथे होत बिहान।
‎लावय हरियर सोनहा, कोन हरे पहिचान।।
‎हरियर थाली ले भरे, पहिरे बाली सोन।
‎चार मुड़ा ले डाड़ हे, बता सखी ये कोन।।
‎जिनगी चलथे साथ मा, जेकर धरके संग।
‎आवय जावय रोज के, अपन चढ़ावय रंग।।
‎नान्हे दाना पेट मा, धर रखथे जग छाँव।
‎बड़का हो फल-फूल दे, बूझव संगी नाँव।।
‎उत्तर:-1. मोबाइल, 2. छइहाँ (परछाई), 3. तारा-कूची (ताला-चाबी), 4. कुकुर (कुत्ता), 5. घड़ी, 6. पोथी (किताब), 7. किसान, 8. खेती-खार (खेत-खलिहान), 9. दिन-रात, 10. बीजा (बीज)
‎रचनाकार - हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा 

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