31 अक्टू॰ 2017

त्रिभंगी छन्द

जय जय हो भुइँया, परथँव पँइया, रोजे तोरे, ध्यान धरँव।
मोरे महतारी, तँहि सँगवारी, अपन राज के, मान रखँव।।
बाढ़य गरिमा, गावँव महिमा, दाई जब मँय, गान करँव।
मन ला मँय खोलँव, भाषा बोलँव, इँहचे के ए, मोर कहँव।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831273

1 टिप्पणी:

Satwant Singh ने कहा…

बहुत खूब

तुरते ताही

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला)

‎ ‎हेम के दोहे (बाल जनऊला) ‎ ‎नाच नचावँन अंगरी, काम सबो के आँन। ‎सारी जग के बात ला, ले पहुँचावँन कान।। ‎ ‎संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस...