27 अक्टू॰ 2017

*कज्जल छन्द*

1)
वरुण देव हा जी रिसाय।
पानी आसो नइ गिराय।।
रोवत नदिया बहत जाय।
हाल देख भुइँया सुनाय।

रोवत हावे सब किसान।
आसो होइस नहीँ धान।
भुइँया जेकर हवै जान।
सुक्खा मा छूटत परान।

पानी के नइ पास धार।
सुन्ना हावय खेत खार।
रोवय बारी बइठ मरार।
पानी बिन नइ हवै नार।

जिनगी बर जी हवै काल।
सबके निकलत हवै खाल।
तीन साल परगे अकाल।
होवत नइ हे अंत राल।

जिनगी मा ला तँय बहाल।
वरुण देव करदे कमाल।
बारिश होय टरै दुकाल।
मन हरियर हो इही साल।

2)
जप ला करके राम राम।
छाँव रहय या बने घाम।
करले बढ़िया सँगी काम।
होयव जग मा तोर नाम।

जाँगर बढ़िया सँगी पेर।
जिनगी मा नइहे अँधेर।
पाबे सुख तँय बने फेर।
जिनगी बर तँय समे हेर।

होवय चर्चा गली खोर।
अपन मेहनत लगा जोर।
जस हा बाढ़त बने तोर।
पानी मा आलस ल बोर।

छोड़व मनके अंहकार।
दुरिहा होवय अंधकार।
दिया करम के बने बार।
आवय लछमी घर दुवार।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

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