शुक्रवार, 31 मई 2019

पादाकुलक छन्द

झरझर झरझर झाँझे लागे,
दिन हा नवतप्पा के आगे।
सूरज हा आगी बरसावे,
पाँव जरत भुइँया मा हावे।1।

होत बिहनिया घाम जनावे,
ठण्ठा जिनिस घूब मन भावे।
प्याज ल धरके घर ले जाथे,
नवतप्पा ले जौन बचाथे।2।

रस्ता मन हा परगे सुन्ना,
खोर गली झन जाबे मुन्ना।
कहिथे महतारी सुन दादू,
नवतप्पा कर देही जादू।3।

लगवा देही लू बीमारी,
धर लेबे तँय खटिया भारी।
रहिबे मंझनिया घर द्वारी,
आय नहीं गा लू के पारी।4।

कर लेबे थोकुन उपकारी,
पेड़ लगा ले घर अउ बारी।
नवतप्पा हा कम हो जाही,
रुख हा लू ले तोर बचाही।5।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

रविवार, 26 मई 2019

हेम के सरसी छंद

जपव रोज के राम नाम ला, जेकर हावय प्रीत।
सुघ्घर जोड़ी मोरो हावय, जिनगी भर के मीत।1।

दया मया के भाव धरे हे, सुशील अउ संजोर।
गोरी नारी सुघ्घर हावय, चुक ले सजनी मोर।2।

पढ़े लिखे हावय सुघ्घर जी, बी ए ओ कालेज।
काम सिलाई के करथे रख, ब्यूटी के नॉलेज।3।

सबले छोटे घर के लइका, पाय मया के छाँव।
नाम निर्मला साहू जेकर, हरय देवरी गाँव।4।

करिया बदरी कस सुघ्घर हे, छोटे छोटे बाल।
पतली दुबली हावय छोरी, गोरी गोरी गाल।5।

लक्ष्मी बनके घर आइस हे, खुले भाग हा मोर।
घर मा खुशियाँ छागे बढ़िया, जग लागे अंजोर।6।

इरखा ले दुरिहा रहिके ओ, बनही घर के शान।
मान बढ़ावै कुल के सुघ्घर, पावय नित सम्मान।7।

अरजी हावय मोरो सुनले, जग तँय हर भगवान।
सुख दुख मा साथ रहय ओ, मोर बने वरदान।8।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

हेम के कुण्डलिया

रखहूँ मँय हर मान ला, मत रो दाई मोर।
मुख के भाषा मोर तँय, मया राखहूँ तोर।।
मया राखहूँ तोर, करव झन गुस्सा दाई।
जिनगी के आधार, तोर सँग मोर भलाई।।
कहत हेम कविराय, मया मँय नित करहूँ।
गाके महिमा तोर, मान ला मँय हर रखहूँ।।
-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

बुधवार, 31 अक्तूबर 2018

मोर माटी

छत्तीसगढ़ी मा करवँ, मँय जिनगी भर गोठ।
मोर बढ़े नित ज्ञान हाँ, होवय भाखा पोठ।।

मोर माटी मोर हावय, देख ले अभिमान रे।
मोर जिनगी बर बने हे, आज जे वरदान रे।।
देख करथौ गान ला मँय, नित धरे मन राग रे।
नाम जेकर जाप करथौ, मोर जागय भाग रे।।

-हेमलाल साहू
ग्राम-गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

शनिवार, 6 अक्तूबर 2018

सरसी छंद (गीत- मोर मया के)

मोर मया केे सुनले गोरी, तँय हर दिल के बात।
तोर मया के छीन छीन ओ, सुरता मोला आत।।

जनम जनम के नाता हावे, मन हर गावे गीत।
तोर मोर ओ सदा सदा ले, जग मा रइही प्रीत।
गुस्सा करके मोला सजनी, तँय काबर तड़पात।
तोर द्वार मा लेके जाहू,  मयँ हर अपन बरात।1।
मोर मया केे …….......

रही रही के मोबाइल मा, मोर हाथ हा जात।
तोला देखें बर मोरे मन, कइसन हे अकुलात।
तोर सुरतिया हा आँखी मा, आके बड़ तरसात।
राख मया ला दिल मा गोरी, काबर हवस भगात।2।
मोर मया केे …….......

गुरतुर बोली तोरे सुघ्घर, दिल ला मोरे भाय।
रोज तोर ओ सुरता करके, आँसू मोर बहाय।।
जोहत रहिथव तोला मँय हर, दिन होवय या रात।
तोर पाँव के पैरी बाजय, सुन मन हा हरषात।3।
मोर मया केे …….......

मोला बड़ तो आस हवय ओ, आबे मोरे संग।
गुस्सा ला तँय अपन छोड़के, जिनगी भर दे रंग।
रद्दा देखव घड़ी घड़ी मँय, जिनगी ला पहवात।
मोला दाना पानी कुछु भी, अब नइ हवे सुहात।4।
मोर मया केे …….......

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

सोमवार, 27 अगस्त 2018

हेमलाल साहू के चौपाई छंद

मच्छर अपन जहर फैलावत। गाँव शहर के घर घर जावत।
डेंगू के बीमारी बगरावत। कहर मौत के हे बरपावत।1।

देख राज मच्छर के आगे। तोर स्वच्छता कहाँ गवागे।
रोज एक झन ला मरना हे। मच्छर के तो ये कहना हे।2।

रहे गन्दगी गाँव शहर मा। रइहव सबके मयँ घर घर मा।
जिनगी मोर गंदगी अंदर। कहिथे मच्छर जंतर मंतर।3।

जात पात ला मँय नइ देखव। थोर थार सफई नइ घेपव।
गन्दा में हे रहना बसना। सबो डहर हे मोर बिछवना।4।

हवे गन्दगी दुनिया भर के। गाँव शहर मा देखव कसके।
कहाँ स्वच्छता तोर लुकागे। भुन भुन बोले मच्छर भागे।5।

फेंक गन्दगी घर के अँगना। जन कहिथे हमला का करना।
अब मच्छर के होंगे बढ़ना। हवे गन्दगी मा ओला रहना।6।

नेता मंत्री मन ला का करना। उनला तो कोठी हे भरना।
रहिस स्वच्छता चारे दिन के। फेर बइठ गे पैसा बिन के।7।

बनिस हवे सब घर सौचालय। काम अधूरा ला करवावय।
रख रखाव ला नइ बनवावय। गली गन्दगी हा बोहावय।8।

हाल गाँव मन के अब देखव। स्वच्छ गन्दगी मा जी  रेगव।
गाँव गली घर मच्छर बसगे। डेंगू के प्रकोप सब बनगे।9।

डेंगू ले पाबे तँय काबू। अपन स्वछता मा रख बाबू।
दूर भागथे जी बीमारी। राख स्वच्छ घर अँगना बारी।10।

बुधवार, 22 अगस्त 2018

सरकार के संचार क्रांति योजना

आगे जी संचार क्रांति हा, होही खूब विकास।
मनखे सबो आलसी बनही, करही टाइप पास।1।

घर घर बाँटे मोबाइल ला, रमन कका हा भेज।
जम्मो लाभार्थी लेवत हे, बिना करे परहेज।2।

ढकोसला संचार क्रांति के, अपन गिनावत काज।
सस्ता मोबाइल ला देके, अपन करत हे राज।3।

करबे तँय विकास के सुघ्घर, मीठा मीठा गोठ।
सरकारी लूट खजाना ला, गोठी भरले पोठ।4।

ब्लास्ट आज मोबाइल होवत, देख क्रांति संचार।
जान भले जावय जनता के, उनला सत्ता प्यार।5।

भुला जही दू दिन बाद सबो, होइस अत्याचार।
फेर वोट हा उनला मलही, बनही जी सरकार।6।

पानी बिन किसान हा रोये, सुख्खा हावय खेत।
मरना हावय सब किसान ला, लेवत नइहे चेत।7।

मोबाइल ला हमला दे के, हमर चुकादिस नून।
आगे अब चुनाव हा बढ़िया, फेर रमन ला चून।8।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा