बुधवार, 29 नवंबर 2017

*कज्जल छन्द*

पावन छत्तीसगढ़ मोर।
मया दया ला रखे जोर।
हवे किसानी के सोर।
संग मितानी रहे तोर।

देव विराजे इहाँ जान।
साधु संत के हवे मान।
भुइँया के हावे किसान।
कहिथे जेला ग भगवान।

बइला जेकर हे मितान।
जाँगर हावे ग पहचान।
बोय उन्हारी अऊ धान।
भुइँया हावय ये महान।

भाखा हावय मीठ मोर।
लागे गुरतुर मया लोर।
ये भुइँया के रहे सोर।
जग मा लाही नव अँजोर।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

मंगलवार, 28 नवंबर 2017

*कुकुभ छन्द*

छत्तीसगढ़ी बोली भाखा, बड़ गुरतुर मोला लागे।
जन्म जन्म के रिश्ता हावे, जेला मोरे मन भागे।

मोर हवय जे दाई भाखा, मानव जेला भगवाने।
मीठ मीठ अउ गुरतुर बोली, बोलव जी सीना
ताने।

नाचत पन्थी अऊ सुवा ला, करथन जेमा गुनगाने।
राग ददरिया करमा सुघ्घर, भाषा दे हे पहचाने।

दान दया ला राखे सुघ्घर, मया प्रीत ला हे बाँधे।
करम धरम के गुन ला गाथे, राम नाव ला हे साधे।।

फेर देख हालत भासा के, आँखी ले आँसू आथे।
हमर शहर ला हमरे भाखा, काबर अइसन नइ भाथे।

छोड़व मन के संका अबतो, राज काज देवव मोरो।
पढ़ लिख ले दाई भाखा मा, भाग जागही अब तोरो।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

*मोद सवैया* (छन्द)

1)
बालक छोट रहे हम खेलन कूदन जी धुर्रा अउ माटी।
जावन होत बिहान धरे थइली भर जी भौंरा अउ बाँटी।
नाचत कूदत खूब मजा लन जी पहिरे माला गर घांटी ।।
देवन जी सँगला बढ़िया अउ जावन गा संगी बन खाँटी।
2)
खेलन जी मिलके कतको ठन खेल ल गा पारी  दर पारी।
रेलम रेस ल खेलन दाम ल देवन जी संगी सँगवारी।
खेलन खेल ल जेकर हे महिमा जग मा संगी बड़ भारी।।
खोजन ढूढन खोर गली अउ जी सबके कोठा घर बारी।
3)
पाँव परे जयकार लगावय जी भुइँया के मोर किसाने।
राग बने धरके भइया करथे भुइँया के रोज बखाने।
धान लुये बर जात हवै धरके हँसिया ला मोर मिताने।
देखव खोर गली अँगना परगे सब सुन्ना होत बिहाने।
4)
गागर मा भरले तँय सागर ज्ञान ल भैया तोर बढ़ाके।
बाँटव सुघ्घर ज्ञान ल ये जग मा मनके दीया ल जलाके।
रोवत गावत ये दुखहारिन ला बढ़िया जी संग हँसाके।
दान दया धरके रखबे बढ़िया तँय भैया संग जगाके।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

मंगलवार, 31 अक्तूबर 2017

त्रिभंगी छन्द

जय जय हो भुइँया, परथँव पँइया, रोजे तोरे, ध्यान धरँव।
मोरे महतारी, तँहि सँगवारी, अपन राज के, मान रखँव।।
बाढ़य गरिमा, गावँव महिमा, दाई जब मँय, गान करँव।
मन ला मँय खोलँव, भाषा बोलँव, इँहचे के ए, मोर कहँव।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831273

शुक्रवार, 27 अक्तूबर 2017

*कज्जल छन्द*

1)
वरुण देव हा जी रिसाय।
पानी आसो नइ गिराय।।
रोवत नदिया बहत जाय।
हाल देख भुइँया सुनाय।

रोवत हावे सब किसान।
आसो होइस नहीँ धान।
भुइँया जेकर हवै जान।
सुक्खा मा छूटत परान।

पानी के नइ पास धार।
सुन्ना हावय खेत खार।
रोवय बारी बइठ मरार।
पानी बिन नइ हवै नार।

जिनगी बर जी हवै काल।
सबके निकलत हवै खाल।
तीन साल परगे अकाल।
होवत नइ हे अंत राल।

जिनगी मा ला तँय बहाल।
वरुण देव करदे कमाल।
बारिश होय टरै दुकाल।
मन हरियर हो इही साल।

2)
जप ला करके राम राम।
छाँव रहय या बने घाम।
करले बढ़िया सँगी काम।
होयव जग मा तोर नाम।

जाँगर बढ़िया सँगी पेर।
जिनगी मा नइहे अँधेर।
पाबे सुख तँय बने फेर।
जिनगी बर तँय समे हेर।

होवय चर्चा गली खोर।
अपन मेहनत लगा जोर।
जस हा बाढ़त बने तोर।
पानी मा आलस ल बोर।

छोड़व मनके अंहकार।
दुरिहा होवय अंधकार।
दिया करम के बने बार।
आवय लछमी घर दुवार।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

मंगलवार, 24 अक्तूबर 2017

बरवै छन्द

*महँगाई *

बाढ़े भावे कसके, हर दिन साल।
बइरी महँगाई हा,  बनके काल।।

झार गोंदली मारत, बइठे हाट।
होवय चर्चा जेकर, रस्ता बाट।।

लाल लाल होवत हे, सबके आँख।
मिरचा बइरी देवत, कसके काँख।।

रोवात हवय सबला, देख पताल।
संग कोचिया रहिके, करें बवाल।।

जनता  के मरना हे, बाढ़त दाम।
काम धँधा तो नइहे, फोकट राम।।

नेता  मन सब बइठे  देखत हाल।
अपन भरे बर कोठी, चलथे चाल।।

शासन ला का चिंता, भष्टाचार।
परगे महँगाई के, सबला मार।।

*मोर मया के पाती *

मोर मया  के पाती,  ले  संदेश।
सबला बढ़िया राखे, मोर गनेश।

बबा डोकरी दाई, जय सतनाम।
बाबू दाई दीदी, करवँ प्रणाम।।

भैया भाभी संगी, कर स्वीकार।
भेजत हव संदेशा, जय जोहार।।

घर अउ अँगना बढ़िया, होही मोर।
सपना देखत रहिथव, रतिहा जोर।।

बने मनाबो मिलके, हमन तिहार।
आहू  देवारी  मा, दिन  गुरुवार।।

दीया हमन जलाबो, घर अउ द्वार।
लाबो बढ़िया जग मा, नव उजियार।।

जगमग जगमग होवय, घर अउ खोर।
पढ़य लिखय नोनी अउ, बाबू मोर।।

राखय सबला बढ़िया, खुश भगवान।
आगू जावय बढ़िया,  मोर  किसान।।

सबझन ला पायलगी, अउ जय राम।
मोर कलम ला  देवत,  हव विश्राम।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा

मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

*(किरीट सवैया)*

1. गुरु 
आवत जावत सोवत मैं गुरु के गुन रात अऊ दिन गावव।
जेकर जी सुनके महिमा अबतो बड़ मैं हर तो इतरावव।
पावव ताकत मैं गुरु के अबतो हर संकट मैं ह पुकारव।
मार इहाँ गुरु के मन मंतर मैं सबके मनके भूत भगावव।।

2. *साक्षरता*  
साक्षर भारत देश बने हमरो बनही अब मानत हावय।
रोशन होवय देश बने अब साक्षरता अपनावत हावय।
ज्ञान बने सबला मिलही हमरो अब देश ह जागत हावय।
देख सबो मनखे पढ़के बढ़िया अब ज्ञान ल पावत हावय।

3. *सुरता * 
आवत हावय रात अऊ दिन जी सुरता कइसे रह पावव।
रोवत रहिथे मनहा दुखला अपने कइसे ग सुनावव।
हावव मैं दुरिहा अपने घर ले कइसे ग समे ल बितावव।
आँख भरे मन भींजत मोर रहे कइसे दिन ला ग गुँजारव।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा पोस्ट नगधा