सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

नारी शक्ति(आल्हा छन्द)

नारी जग के देबी भैया, झन करहूँ जी अत्याचार।
दुरगा काली लछमी देबी, बनके आथे अँगना द्वार।।

जेकर घर नारी के पूजा, बसथे उहाँ सबो भगवान।
हो अपमान जिहाँ नारी के, उहाँ बसेरा ले शैतान।।

अबला नारी जान समझ के, झन देबे तैहा ललकार।
अपन सहत ले सहिथे भैया, बन जाथे ओहा तलवार।।

भागे पापी तरथर काँपै, धरै रूप ला जब विकराल।
सबला कटकट मारे काटे, बनथे पापी मन के काल।।

काल भैरवी रूप जान ले, झन करबे  तैहा अपमान।
पाबे सुख के जिनगी भैया, देवी के मिलही वरदान।।

करथे विनती भाई तोरे, नारी के करबे सम्मान।
बनै जगत हा नर नारी से, राखव भैया जग के प्रान।।

- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

रविवार, 19 फ़रवरी 2017

@महावीर के मै हा चेला@(आल्हा छन्द)

महावीर के मै हा चेला, आँव महूँ अड़बड़ बलवान।
हवै भुजा मा ताकत भैया, कहिथे मोला जगत किसान।।

अपन मेहनत अउ ताकत ले, बंजर भुइँया धान उगाव।।
भुइँया दाई के सेवा मा, जिनगी सुघ्घर अपन बिताव।।

संगी के संगी जानव जी, आँव महूँ बइरी के काल।
बइला मोर मितनवा साथी, नता जनम से सालों साल।।

का कहिबे गरमी अउ सरदी, सबो मोर बर एक समान।
घाम छाँव हे सबो बरोबर, पगड़ी धोती मोरे शान।।

हँसिया नागर अऊ तुतारी, मोरे जिनगी के पहचान।
बसथे भुइँया मा परान हा, चलथव सुघ्घर सीना तान।।

ढेला पखरा माँटी गोंटी, अपन उठा लेथव में हाथ।
करम धरम हे मोरे साथी, महावीर देवत हे साथ।।

- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

मै बेटा छत्तीसगढ़ीया(आल्हा छन्द)

मै बेटा छत्तीसगढ़ीया, हरै मोर भुइँया भगवान।
भुइँया के सेवा ला करथव, बसथे जेमा मोर परान।।

मैं भुइँया के आँव पुजारी, हावय जेमा मया दुलार।
दाई के सेवा मा रहिथव, रात अऊ दिन मै मतवार।।

संगी के संगी जानव गा, बन जाथव जेकर मैं ढाल।
बैरी के बैरी जानव गा, बन जाथव जेकर मैं काल।।

ए भुइँया बर आँख झन गड़ाबे, आँखी लेहू तोर निकाल।
ए भुइँया संग मया करबे, दया मया देहू भरमाल।।

भोला भाला झने समझबे, जानव गा हमला तलवार।
लाल आँन भुइँया दाई के, जेकर बर हे मया अपार।।

- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

@बसंत @(आल्हा छन्द)

गावत हव महिमा बसंत के, कइथे जेला जग रितु राज।
चार मास के जेकर शासन, सुघ्घर करथे जग मा काज।।

गावत हवै कोयली महिमा,  कुह कुह के सुनले तँय तान।
हाँसत हावय रुख राई हा, आगे जग मा नवा बिहान।।

करथे स्वागत भँवरा भइया, खिलथे किसम किसम के फूल।
बनके प्रेमी जावत हावय, दुःख दरद ला अपने भूल।।

धरती दाई करथे सुघ्घर, हरियर रूप धरै श्रृंगार।
चारों मुड़ा खुसी हा छावय, सुघ्घर आगे देख बहार।।

लाली लाली परसा फूले, आमा हा सुघ्घर मउराय।
चिरई चिरगुन खेती घूमे, देख सबो के मन हरसाय।।

खेलत हावय रंग गुलाले, देख उड़त हे फाग महंत।
नाचय खेलत अउ कूदत हे, गावत हावय गीत बसंत।।

पींयर पींयर सरसों फूले, देख रूप  ला मन भाय।
पीरा मा रोवत प्रेमी हा, कहाँ प्रेमिका हवै लुकाय।।

भागे जाड़ा दिन हा भैया, सूरुज हा खेलय गा खेल।
गावत हव महिमा बसंत के, देख मया के भैया मेल।।

- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

वीर नारायन सिंह (आल्हा छंद)

परम वीर नारायन जनमे, पावन भुइया सोनाखान।
दान दया के भाव धरै गा, रहिस हवै भारी बलवान।।

तरथर काँपे  बइरी भागे, गरजे  जब  नारायन  वीर।
मानवता के रहिस पुजारी, हरत रहिस हे सबके पीर।।

पता चलिस नारायन ला जब ,नगर घुसे नरभक्षी शेर ।
दूर करै बर जनता के दुख,  बघवा ला करदिस वो ढेर ।।

जन जन के सँगवारी मितवा, साँच प्रेम के बाँटय गोठ।
सब जनता ला एक करै गा, गुत्तुर बानी हिम्मत पोठ।।

लड़िस लड़ाई आजादी बर, नारायन मारिस ललकार।
होस उड़ागे बैरी मन के, जब निकलिस धरके तलवार।।

सब कोती पड़गे अकाल हा, मचगे भारी हाहाकार।
बिनती करथे जमाखोर से, नइ मानय तभो जमीदार।।

धावा बोलिस जमाखोर घर, लानिस हावे  सबला लूट।
जमाखोर मन बइरी बनगे, जन जन मा डालिस ओ फूट।।

बनगे नारायन हा आरोपी, देख हवै झूठा के मान।
नारायन ला बन्दी करदिस, भुइँया के होइस अपमान।

रइपुर के चौराहा मा जी, देदिस ओला फाँसी टाँग।
फेर उड़ादिस ओला तोप म, करै रहिस गोरो मन माँग।।

हाँसत हाँसत नारायन हा, होइस माटी बर आजाद।
पक्का बेटा भुइँया के ओ, ओकर आही हमला याद।।

- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

@किसान@(आल्हा छंद)

भुइँया दाई हा महतारी, तोला कहिथे जगत किसान।
सुख दुख के हावय सँगवारी, जेमा बसथे तोर परान।।

उठती बेरा बुढ़ती बेरा, करथस सूरुज देव प्रणाम।
रोज पाँव परथस भुइँया के, जेकर सेवा तोरे काम।।

नागर बइला अऊ तुतारी, तोर हवै भैया पहचान।
गार पसीना तन ले भैया, ऊगाथस तैहा जी धान।।

जगत तरे तोरे सेवा मा, तही जगत के पालनहार।
तोर मेहनत ला दुनिया हा, नइतो पावे भैया पार।।

चिरई चिरगुन आय संगवारी, बइठे रहिथे तोर दुवार।
गाना गावय मीठ जुबानी, राखे भइया मया अपार।।

- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

बनहूँ महूँ महान (आल्हा छन्द)

आजाद भगत गौतम गाँधी,  जइसे बनहूँ महूँ महान।
अपन देश  बर  मर मिट जाहू, रखहूँ दाई के में मान।।

भारत के बेटा आवव जी,  बनहूँ महूँ शिवाजी वीर।
भुइयां के मैं सेवा करके,   सबके हरहूँ मेहा पीर।।

कपट भेद ला मेटव मन के, मया नता रिश्ता ला जोर।
प्रेम दया ला बाटव सुघ्घर ,घर बाहिर गली अऊ खोर।।

अपन जगाबो मानवता ला, रखबो जग मा गा पहचान।
मिल नवा नवा रद्दा गढ़बो, भुइँया मा लाबो भगवान।।

हांसत रहय मोर भुइयां हा, दया मया के धरले छोर।
हरियर हरियर लुगरा पहिने ,सुघ्घर धरती दाई मोर।।

सबो डहर खुशयाली रइही, चिरई चिरगुन के बन सोर।
गाँव गाँव ला सरग बनाबो, आही  भैया  नवा  अँजोर।।

- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

बिलासा केंवटिन (आल्हा छन्द)

आवव संगी सुनव कहानी, रहिस सती नारी ओ वीर।
नाव बिलासा जात केंवटिन, रहै बसेरा नदिया तीर।।

छोटे छोटे गाँव रहै गा, छितका कुरिया मुकुत दुवार।
आमा अउ मउहा परसा के, रुख राई अरपा के पार।।

जइसे वो बघवा कस ताकै, बइरी मन सब जावय हार।
खोंपा पारै अलवा जलवा, इही बिलासा के सिंगार।।

मरद बरोबर लगै बिलासा, रेंगय  जब धरके तलवार।
जम्मो बइरी थरथर काँपै, लागय देवी के अवतार।।

हिरदे मा रख भाव दया के, राजा के राखै गा मान।
सेवा कर घायल राजा के, कइयो पइत बचाइस जान ।।

राजा देदिस राज कोष ला, देख बिलासा के बड़ काम।
पाइस ठाठ राजसी ओहर, फइलिस चारों कोती नाम।।

बनिस अंग रक्षक राजा के, बने चलावै तीर कमान।
दिल्ली मा करतब दिखलाइस, बढ़िस बिलासा के पहचान।।

बस गय शहर बिलासपुर तोर, कर गय अमर बिलासा नाम।
स्वाभिमान नारी झन खोवै, दे के गइस इही पैगाम।।
                      
-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा,
तहसील- नवागढ़, जिला - बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

  

गावव महिमा अपन गाँव के

चिरई मन के जिहाँ बसेरा, गिधवा हावय मोरे गाँव।
बर पीपर अउ रुख राई के, मिलथे भैया सुघ्घर छाँव।।

महमाई करथे रखवारी, बइठे सुघ्घर तरिया पार।
सुख दुख मा दाई ला सुमरे, आय गाँव के तारनहार।।

हवै गाँव मा धुर्रा चिखला, माटी पेवर आय कन्हार।
धरती दाई हाँसत रहिथे, कर हरियर हरियर श्रृंगार।।

रहै जिहाँ भुइँया के बेटा, भैया जेला कहै किसान।
खेती जेकर जिनगी जानव, जेमा ओकर बसे परान।।

उठती तरिया बुड़ती तरिया, भइया पाबे चारो धाम।गावव महिमा अपन गाँव के, सुरुज देव ला करँव प्रनाम।।

-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा,
तहसील- नवागढ़, जिला - बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

बेटी (कुण्डलिया छन्द)

बेटी घर मा जनम ले, लछमी बनके आय।
बेटी हे अनमोल जी, सबके मन ला भाय।।
सबके मन ला भाय, रूप देवी के जानय।
घर मा खुशियॉ लाय, आरती मंगल गावय।।
करय गरीबी दूर,  लाय घर मा सुख रोटी।
माँगव जी वरदान, जनम ले घर मा बेटी।।

-हेमलाल साहू
ग्राम-गिधवा, पोस्ट-नगधा,
तहसील -नवागढ़, जिला-बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

हेम के उल्लाला छन्द

नाचा(उल्लाला छन्द)

नकल दिखावय रीत के, गावय गाना मीत के।
निकले जोक्कड़ अउ परी, नाचत चौरा के तरी।।

ढोलक तबला  संग मा, नाचा  चढ़थे  रंग मा।।
धरै परी हा राग ला, गावत जोक्कड़ फ़ाग ला।।

देख  गाँव   भरके  जमे, रतिहा  के  नाचा  रमे।
मांगव झन ए भीख ला, देवय जम्मो सीख ला।।

नाँच नाँच के खेल मा, बनथे नाचा मेल मा।
गँवई के ए प्रान हे,  भुइँया  के पहचान हे।।

जोक्कड़ हा सबला फभे, फेर कहाँ हावय दबे।
समय समय के टेम मा, राखव नाचा प्रेम मा।।

छेर छेरा (उल्लाला छन्द)

परब छेर  छेरा परै, माँगत  लइका  मन हरै।।
अरन बरन कोदो दरन, देवव दान तभे टरन।

नान नान लइका हरै, देव रूप  ला  ओ धरै।
घर घर मा माँगत हवै, बने गीत गावत हवै।।

हेरव   कोठी  धान ला, पुन  के  करहू  दान  ला।
करलव सुघ्घर काम ला, रखव धरम के नाम ला।।

लइका मन हाँसत हवै, गली  गली  माँगत हवै।।
आथे बारह मास मा, पुन्नी  के दिन  खास  मा।

जय हो लछमी तोर ओ, भंडार भरै तै मोर ओ।
देत  छेर   छेरा हरै,   भाव   दया  के  ओ  धरै।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

हेम के कुण्डलिया

बसंत पंचमी

विनती करथे देख ले, माँ सेवा मा खोय।
आगय बसंत पंचमी, सारद पूजा होय।।
सारद पूजा होय, ज्ञान बर अरजी करथे।
मनके दीया जला, देख माँ बिद्या भरथे।।
जोड़व मनके तार, पाव जी सबो मनवती।
सबो पाय बर ज्ञान, देख गा करथे विनती।।

गावय कोयल गीत ला,  आमा हा मउराय।
आगे सुघ्घर बसन्त हा,   सेहत ला हे लाय।।
सेहत ला हे लाय,   सबो के मन ला भावय।
बनके खुशियॉ छाय, मोर मन नाचय जावय।।
हाँसत हे कविराय, देख कुदरत ह लुभावय।
सुनव राग बसन्त,   गीत ला कोयल गावय।।

महँगाई
कसके ऊड़त सोर हा, शहर गाँव अउ खोर।
महँगाई के जोर हा, कनिहा ला दिस टोर।।
कनिहा ला दिस टोर, आज गा मरना होंगे।
बयपारी मन खात, आम जन भूखा सोगे।।
कइसे होवय बचत, होय गा खरचा सबके।
बड़े जिनिस के भाव, सोर हा ऊड़त कसके।।

रोजी रोटी पाय बर, होवत हावे टेम।
बेगारी के मार मा, रोवत हावय हेम।।
रोवत हावे हेम, रूपिया पैसा खातिर।
लूटत हावे देख, भगत जी बनके शातिर।
चलै दोगला राज, जॉब ला कइसे खोजी।
दर दर भटकत हवय, पाय बर रोटी रोजी।।

खेड़ा जरी
खावव जी खेड़ा जरी, स्वाद रहै भरमार।
राँध अमटहा संग मा, बनही जी रसदार।।
बनही जी रसदार, सबो झन ला पुर जाही।
खूब मजा ले खाव, गाँव के सुरता आही।।
कहिथे कविवर हेम, साग बढ़िया हे जानव।
सेहत अपन बनाव, जरी खेड़ा जी खावव।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पो. नगधा,
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

हेम के कुण्डलिया

जाड़ा

आगे दिन हा जाड़ के, सबके मन ला भाय।
ओढ़व चादर साल ला, सुघ्घर जाड़ा आय।।
सुघ्घर जाड़ा आय, बनालव बढ़िया सेहत।
तन मन होवय पोठ, मजा जाड़ा के लेवत।।
तापव भूरी बारके, जाड़  हा  जावय  भागे।
काँपत हाथे गोड़ हा, जाड़ के दिन हा आगे।।

औंधी
जावय  राहर  ला  रखै, मिलके  संझा बेर।
दूसर के  ला  ओ करै,  खूब हेर अउ फेर।।
खूब हेर अउ फेर,  टोर  राहर  ला  लावय।
औंधी ऊसन खात, मजा मौसम के हावय।।
ताकत हे रखवार, चोर  ला  नइ तो  पावय।
लइका अऊ सियान, रखै ला राहर जावय।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

गाँव (उल्लाला छंद)

सुघ्घर हावे गाँव हा, मिलै मया के छाँव हा।
खेत खार के ठाँव हे , गिधवा मोरे गाँव हे।।

चिरई चिरगुन हा रहै, बोल मया के ओ कहै।
नवरा नदिया हा भरै, झरझर झरझर ओ करै।।

रुख राई हरियर रहै, निरमल पुरवइया बहै।
सबो डहर ए गाँव हे, बर पीपर के छाँव हे।।

पहुना हे भगवान गा, रहिथे जिहाँ किसान गा।
बइला हवै मितान गा, गइया मात समान गा।।

सुरता आथे गाँव हा, जिहाँ मिलै ए नाँव हा।
गोठ करत ए हेम गा, रखव गाँव बर प्रेम गा।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

रविवार, 8 जनवरी 2017

पुतरी पुतरा (रोला छन्द)

करथे लीला देख, बना के हमला पुतरी।
लीलाधर के हाथ, रहै लगाम के सुतरी।।
माया के ए जाल, देख नइ पाये आँखी।
हावे आत्मा अमर, भरै बिद्या के साखी।।

सुघ्घर खेलन खेल, रहै  भइया  ठठ्ठा  के।
संगी साथी साथ, सबो  पुतरी   पुतरा के।।
आगे मोला समझ, बने जिनगी आत्मा के।
आथे बचपन याद, बने  पुतरा  कुरता के।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

माया (उल्लाला छंद )

मन अपने  काबू रहै, बड़े  बड़े  ज्ञानी कहै।
सबो डहर बइरी खड़ै, भाई से भाई लड़ै।।

मन मा माया हा भरै, मानव  ओकर  से परै।
फइले माया जाल हा, देखत हावय काल हा।

फसगे मनखे मोह मा, पाय न छुटकारा रोग मा।
हावे आत्मा अमर गा, जानव  माया  जहर गा।।

मनके आँखी खोल ले, मया प्रीत ला बोल ले।
मनके माया छोड़ ले, जग से नाता जोड़ ले।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील  नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273