मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

*(किरीट सवैया)*

1. गुरु 
आवत जावत सोवत मैं गुरु के गुन रात अऊ दिन गावव।
जेकर जी सुनके महिमा अबतो बड़ मैं हर तो इतरावव।
पावव ताकत मैं गुरु के अबतो हर संकट मैं ह पुकारव।
मार इहाँ गुरु के मन मंतर मैं सबके मनके भूत भगावव।।

2. *साक्षरता*  
साक्षर भारत देश बने हमरो बनही अब मानत हावय।
रोशन होवय देश बने अब साक्षरता अपनावत हावय।
ज्ञान बने सबला मिलही हमरो अब देश ह जागत हावय।
देख सबो मनखे पढ़के बढ़िया अब ज्ञान ल पावत हावय।

3. *सुरता * 
आवत हावय रात अऊ दिन जी सुरता कइसे रह पावव।
रोवत रहिथे मनहा दुखला अपने कइसे ग सुनावव।
हावव मैं दुरिहा अपने घर ले कइसे ग समे ल बितावव।
आँख भरे मन भींजत मोर रहे कइसे दिन ला ग गुँजारव।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा पोस्ट नगधा

शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

*(छन्द त्रिभंगी)*

1)
हे जग महमाई, सबके दाई,   मन मे आके,  वास करौ।
हे मंगल करनी, जग के जननी, विपदा आके, मोर हरौ।
महिमा हे भारी,   शोभा न्यारी, सबझन तोरे, गान करै।
करथे मन सेवा, चढ़ा कलेवा, सब भक्तन मन, ध्यान धरै।
2)
बढ़िया मन राखत, मया जगावत, तँय सँगवारी, मोर रहे।
धरती महतारी, मोर चिन्हारी, मन हा दाई, रोज कहे।
मन हा बिसरावत, सुरता आवत, तोला दाई, ध्यान धरे।
महिमा ला गावत, मन मुस्कावत, मन हा मोरे, गान करे।
3)
सेवा कर भाई, ददा ग दाई, तीरथ गंगा, धाम हरे।
जप करले ओकर, झन खा ठोकर, नइया तोरे, पार करे।
तँय छोड़ दिखावा, छैल छलावा, जग के माया, आँख परे।
तँय धरम कमाले, दया दिखाले, जग मा सुघ्घर, दान धरे।
4)
का हवै ठिकाना, सबला जाना, देखव यम हा, प्रान धरे।
खाली तँय आबे, खाली जाबे, जिनगी के दिन, चार हरे।
माटी के काया, जग के माया, रिश्ता नाता, छोड़ चले।
तँय धरम कमाले, दान दिखाले, तोर जगत मा, नाम फले।
5)
हे बरखा रानी, बचा किसानी, सुख्खा खेती, देख परे।
खाली हे नदिया, देखव तरिया, सुरता सब झन, तोर करे।
पाना मुरझावत, पेड़ सुखावत, जोहत रहिथे, आस धरे।
ए जिनगानी मा, बिन पानी मा, अब यम आके, प्रान हरेे।

रविवार, 10 सितंबर 2017

सरसी छन्द फागुन

देख महीना आगय फागुन, घर मा हे अँधियार।
दूखन भूखन रहिके आसो, मानत हवन तिहार।।

तरिया नदिया सुक्खा हावे, सुक्खा खेती खार।
बिन पानी के मचगेे हावय, भारी हाहाकार।।

आसो के होरी मा परगे, हावय देख दुकाल।
दाना पानी बर तरसत हे, जी लागे जंजाल।।

मनखे मन ला देखव संगी, बिन पानी मुरझाय।
चिरई चुरगुन मन रोवत हे, राम राम चिल्लाय।।

लाल लाल जी परसा फुलगे, आमा हा मउराय।
मनके पीरा बाढ़त हावय, फागुन हा लकठाय।।

बबा सुनाके किस्सा ला जी, ढाढस बाँधत जाय।
आही सुख के दिन हा बेटा, कहिके ओ समझाय।।

आँव मनाबो सुघ्घर होरी, नवा नवा हे साल।
सुनही हमरो विनती रामा, खेलबो रंग गुलाल।।
-हेमलाल साहू

सरसी छन्द नारी

मान राख जग मा नारी के , झन कर अपमान।
नर नारी ले जग हा बनथे, होथे जग कल्यान।।

दुरगा काली लछमी दाई, बनके बाँटत ज्ञान।
देवी रूप हरे जी नारी , जग बर गा वरदान।।

फेर आज के समाज मा जी, हावे देखव बेहाल।
भोग विलासा वस्तु जानके, खींचत हावे खाल।।

बड़े बड़े हे ज्ञानी ध्यानी, काबर जी लाचार।
आँखी मा अन्याय देख के, करथे जी बेपार।।

नारी ताकत ला झन भुलबे, रखबे तँय हर याद।
भेष धरै जग मा काली के,  कर दे थे बरबाद।।

मूक सझम के नारी ऊपर, झन कर अत्याचार।
झन बनाव नारी ला चंडी, जग ला रखव सँवार।।

-हेमलाल साहू

गुरुवार, 31 अगस्त 2017

रोला छन्द

सुक्खा खेती खार, झने कर आना कानी।
रोवत आज किसान, देख ले बरखा रानी।
सुनले आज पुकार, गिरादे अब तो पानी।
नइहे जग मा जान, बिना पानी जिनगानी।

-हेमलाल साहू

शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

चौपई छन्द (पताल)

रहिथे गोल गोल जी, दिखथे लाल।
बारी मा फरथे जी, करय कमाल।।

जेकर हे पताल गा, सुनलव नाव।
घर बारी मा पाबे, सबके गाँव।।

बारो महिना रहिथे, जेकर माँग।
डारके बना संगी, बढ़िया साग।।

बने पीसके खाले, चटनी भात।
फेर बोलबे बढ़िया, तैहर बात।।

रहिथे जेमा अड़बड़, संगी स्वाद।
आथे सुघ्घर जेहा, बारिस बाद।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो.9977831273

मंगलवार, 25 जुलाई 2017

(चौपई छन्द) राखी

महिना हावय भादो मास।
भाई बहनी बर हे खास।।
भैया ला बहनी के आस।
मन मा राखे हे बिस्वास।।

आगय राखी हमर तिहार।
बहनी मन होवत तैयार।।
बहनी राखे मया दुलार।
भैया के आशीष अपार।।

बाँधय जी राखी ला हाथ।
सुघ्घर तिलक लगाये माथ।।
रखय सुखी जी दीनानाथ।
रहय सदा भाई हा साथ।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

सोमवार, 24 जुलाई 2017

चौपई छन्द

लाल लाल जी देख पताल।
महँगाई मा बनगे काल।।
हावय जेकर चढ़के भाव।
मारत हावय कसके ताव।।

-हेमलाल साहू