23 जुल॰ 2017

(चौपई छन्द) बरखा

बरखा के आवत हे सोर।
पानी गिरत गली अउ खोर।।
सावन महिना के हे जोर।
नाचत हावय बन मा मोर।।

धरै मेचका सुघ्घर राग।
झिंगरा गावत हावे फाग।।
देख केकड़ा पीटत डोल।
घोंघी खेलय घांदी गोल।।

मछरी करय तमासा आज।
डोरी खेलय सुघ्घर गाज।।
हरियर हरियर खेती खार।
तरिया नदिया भरय अपार।।

बरखा रानी लावय प्रेम।
दुनिया जेकर हावय फेम।।
बढ़िया बढ़िया खेलय गेम।
मजा करय जी हर टेम।।

- हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

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