23 जुल॰ 2017

चौपई छन्द

जिनगी मा नइ हावय टेम।
तँय सुनले गा बाबू हेम।।
रखबे मन मा तैहर प्रेम।
जग मा तभे कमाबे नेम।।

महिना आय जेठ बैसाख।
देख उड़त माटी अउ राख।।
तात तात ले चलथे झाँझ।
होत बिहनिया ले जी साँझ।।

सुनते ही मुँह पानी आय।
खाये मा दांत कटकटाय।।
काम अबड़ एहा तो आय।
आत जात सबला ललचाय।।
- इमली

लगथे जइसे जाँगर टोर।
काबर हारत मन हा मोर।।
बूता मा अब मन नइ भाय।
जिनगी काबर हे अलसाय।।

बाँधत हव मैं मन ला जोर।
हौय पोठ मन कसके मोर।।
आस कभू झन छूटय खोर।
नानव जिनगी मा अँजोर।।

-हेमलाल साहू
ग्राम - गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़ मो. 9977831273

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